क्या मोहन भागवत ने नागपुर पुस्तक महोत्सव में सुनाया ऐसा मजेदार किस्सा?
सारांश
Key Takeaways
- ज्ञान और अनुभव का महत्व समझें।
- सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, जीवन के अनुभव भी जरूरी हैं।
- हंसना भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें सिखाता है।
- सच्चा ज्ञान वही है जो जीवन में काम आए।
- शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी नहीं, बल्कि समझदारी भी है।
नागपुर, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित ‘नागपुर पुस्तक महोत्सव’ में एक दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसे सुनने के बाद वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े।
संघ प्रमुख ने मजेदार किस्सा सुनाते हुए बताया कि एक बार गणित और फिजिक्स के प्रोफेसर एक नाव में यात्रा कर रहे थे। दोनों प्रोफेसरों ने नाव चलाने वाले से पूछा कि क्या वह जानता है कि नाव कैसे चलती है? पानी का वेग, गति और गुरुत्वाकर्षण कैसे कार्य करता है? इस पर नाव चलाने वाले ने कहा कि साहब जी, हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हम तो बस नाव चला कर अपनी जीविका चलाते हैं।
गणित के प्रोफेसर ने कहा, "ठीक है, तुम्हें इन सब चीजों की जानकारी नहीं है, लेकिन क्या तुम गिनना जानते हो?" तो नाव चलाने वाले ने कहा कि नहीं, उसे भी नहीं आता। वह तो केवल चवन्नी और अठन्नी की पहचान करता है।
फिर अचानक से नदी में तूफान आ गया। नाव चलाने वाले ने पूछा, "क्या आपको तैरना आता है?" दोनों प्रोफेसरों ने कहा, "नहीं।" इस पर नाव चलाने वाले ने कहा, "मेरी तो आधी जिंदगी बर्बाद हो गई, लेकिन अब आपकी पूरी जिंदगी खत्म होने वाली है।"
इस किस्से को सुनकर सभी लोग हंस पड़े। यहां तक कि संघ प्रमुख भी हंस पड़े। उन्होंने कहा कि यह किस्सा हमें बहुत कुछ सिखाता है। पढ़ाई से हमें ज्ञान और समझदारी दोनों मिलती हैं।