क्या परभणी नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी?

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क्या परभणी नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी?

सारांश

महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने कई नगर निगमों में जीत हासिल की है, लेकिन परभणी में शिवसेना की ऐतिहासिक जीत ने पुराने वर्चस्व को समाप्त कर दिया है। जानिए इस जीत की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।

Key Takeaways

  • परभणी में शिवसेना (यूबीटी) की ऐतिहासिक जीत।
  • एनसीपी-कांग्रेस का दो दशक पुराना वर्चस्व समाप्त।
  • स्थानीय नेतृत्व का महत्व।
  • महायुति के सहयोगी दलों से बेहतर प्रदर्शन।
  • भाजपा की चुनावी रणनीति में कमी।

मुंबई, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में शुक्रवार को भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने कई नगर निगमों में शानदार जीत हासिल की है, लेकिन परभणी जिला इस रुझान से अलग एक महत्वपूर्ण अपवाद बनकर उभरा है।

सत्तारूढ़ गठबंधन को बड़ा झटका देते हुए उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने परभणी में भाजपा की गति को रोकने में सफलता प्राप्त की। यह जीत शिवसेना (यूबीटी) के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है।

महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भाजपा और महायुति के पक्ष में माहौल होने के बावजूद परभणी नगर निगम (पीएमसी) में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने असाधारण जीत हासिल की है। यह पहली बार है जब उद्धव ठाकरे की पार्टी परभणी नगर निगम की सत्ता को सीधे तौर पर संभालेगी। इस जीत के साथ ही एनसीपी और कांग्रेस का लगभग दो दशक पुराना वर्चस्व समाप्त हो गया है।

कड़े मुकाबले में शिवसेना (यूबीटी) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने महायुति के सहयोगी दलों से बेहतर प्रदर्शन किया। चुनाव परिणामों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) को 25 सीटें मिलीं, कांग्रेस को 12, भाजपा को 12, एनसीपी (अजित पवार) को 11, जन सुराज पार्टी को 3, यशवंत सेना को 1 और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस अन्य दलों के समर्थन से मेयर पद पर दावा पेश करने की तैयारी कर रही हैं।

परभणी में आखिरी बार शिवसेना के पास 2007 में मेयर पद था, जब यह नगर परिषद थी। 2011 में नगर निगम बनने के बाद से यहां सत्ता एनसीपी और बाद में कांग्रेस के पास रही। 19 साल बाद शिवसेना (यूबीटी) की यह वापसी बेहद अहम मानी जा रही है।

इस जीत का श्रेय परभणी के सांसद संजय जाधव और विधायक डॉ. राहुल पाटिल के एकजुट नेतृत्व को दिया जा रहा है। जहां भाजपा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले जैसे बड़े नेताओं के साथ 200 से ज्यादा रैलियां और बैठकें कीं, वहीं ठाकरे गुट ने पूरी तरह स्थानीय नेतृत्व और जनसंपर्क पर भरोसा किया।

शिवसेना (यूबीटी) ने 48 सीटों पर चुनाव लड़ा और बाकी सीटों पर कांग्रेस के साथ ‘मैत्रीपूर्ण मुकाबला’ या तालमेल रखा, जिससे महायुति विरोधी वोटों का बंटवारा नहीं हुआ।

भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार गुट की एनसीपी मिलकर भी परभणी में 25 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर सकीं। भारी प्रचार के बावजूद महायुति को यहां सफलता नहीं मिली।

नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता मेघना बोर्डीकर ने कहा कि राज्य के बाकी हिस्सों में देवेंद्र फडणवीस का करिश्मा चला, लेकिन परभणी में पार्टी पीछे रह गई। हम हार के कारणों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसद संजय जाधव की स्थानीय पकड़ और ‘स्थानीय स्वाभिमान’ की भावना ने ठाकरे गुट को मजबूती दी। उद्धव ठाकरे के लिए यह जीत मनोबल बढ़ाने वाली है और इससे यह साबित हुआ है कि उनकी पार्टी अब भी कुछ क्षेत्रों में भाजपा-शिंदे-अजित पवार गठबंधन को मात देने की क्षमता रखती है।

Point of View

खासकर जब स्थानीय नेतृत्व मजबूत हो। यह चुनाव परिणाम भविष्य में अन्य राजनीतिक दलों के लिए एक संकेत हो सकता है।
NationPress
16/01/2026

Frequently Asked Questions

शिवसेना (यूबीटी) ने कितनी सीटें जीतीं?
शिवसेना (यूबीटी) ने परभणी नगर निगम में 25 सीटें जीतीं।
परभणी में एनसीपी और कांग्रेस का वर्चस्व कब समाप्त हुआ?
परभणी में एनसीपी और कांग्रेस का लगभग दो दशक पुराना वर्चस्व इस चुनाव के साथ समाप्त हुआ।
शिवसेना (यूबीटी) की जीत का श्रेय किसे दिया गया?
इस जीत का श्रेय परभणी के सांसद संजय जाधव और विधायक डॉ. राहुल पाटिल के नेतृत्व को दिया गया है।
क्या भाजपा ने चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया?
भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार गुट की एनसीपी ने मिलकर भी परभणी में 25 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर सकीं।
शिवसेना (यूबीटी) ने कितनी सीटों पर चुनाव लड़ा?
शिवसेना (यूबीटी) ने 48 सीटों पर चुनाव लड़ा।
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