क्या सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए?
सारांश
Key Takeaways
- सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई गई है।
- सुनवाई 7 फरवरी को निर्धारित की गई है।
- वकील का आरोप है कि गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।
- राजनीतिक दृष्टिकोण से यह मामला महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस की प्रमुख नेता सोनिया गांधी के मतदाता पहचान पत्र से संबंधित मामले में याचिकाकर्ता और वकील विकास त्रिपाठी ने कहा कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।
यह बयान उस समय आया है जब मतदाता सूची में कथित तौर पर नाम जोड़ने के मामले में सोनिया गांधी से संबंधित याचिका पर राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई स्थगित हो गई।
इस मामले में दाखिल रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई होनी थी, लेकिन सोनिया गांधी की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगे जाने पर अदालत ने अगली तारीख निर्धारित की है। अगली सुनवाई 7 फरवरी को होगी।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में वकील विकास त्रिपाठी ने कहा कि हमारी एकमात्र मांग है कि सोनिया गांधी के खिलाफ कथित रूप से गलत दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपनी नागरिकता के बारे में गलत जानकारी देकर भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में अपना नाम शामिल करवाने के लिए एफआईआर दर्ज की जाए।
सुनवाई टलने पर उन्होंने कहा कि वे अपना केस तैयार नहीं करना चाहते। वे जानबूझकर समय ले रहे हैं, क्योंकि सच का सामना तो करना ही पड़ेगा। उन्हें बताना होगा कि पहचान पत्र का उपयोग कहाँ और किन दस्तावेजों में किया गया था। एक समय था, जब आधार से पहले, पहचान के प्रमाण के रूप में मतदाता पहचान पत्र की आवश्यकता होती थी, लेकिन देश के खिलाफ इसका गलत उपयोग करने की क्या जरूरत थी? आप देश के साथ कितना धोखा कर सकते हैं? एक विदेशी महिला प्रधानमंत्री के घर में कैसे रह सकती है?
उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के वकील ने एक महीने का समय मांगा। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित दस्तावेज़ विरोधी पक्ष को एक हफ्ते पहले दिए जाएं, जिसके बाद फरवरी में दलीलें सुनी जाएँगी।