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क्या सुभाष चंद्र बोस ने इतिहास को नया मोड़ दिया और हिंदुस्तान की आजादी से पहले सरकार बना ली?

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क्या सुभाष चंद्र बोस ने इतिहास को नया मोड़ दिया और हिंदुस्तान की आजादी से पहले सरकार बना ली?

सारांश

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का दृढ़ संकल्प और साहस ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला दिया। उन्होंने आजाद हिंद सरकार की स्थापना कर भारत की आजादी के लिए एक नया अध्याय लिखा। जानें कैसे उनकी सोच और कार्यों ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।

मुख्य बातें

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ।
उन्होंने 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार की स्थापना की।
उनका विचार था कि स्वतंत्रता का संघर्ष हर भारतीय की जिम्मेदारी है।
उन्होंने हमेशा भगवत गीता को अपने साथ रखा और इसका गहरा सम्मान किया।
आजाद हिंद फौज ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। "गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए एक दिल-एक प्राण होकर कटिबद्ध हो जाइए। हिंदुस्तान अब गुलाम नहीं रह सकता और न कोई ताकत इसे गुलाम रख सकती है।" यह 'नेताजी' सुभाष चंद्र बोस का जोशीला भाषण नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प था, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। जब पूरा देश स्वतंत्रता की जद्दोजहद में था, तब सुभाष चंद्र बोस जैसे महान सपूत 'आजाद हिंदुस्तान' की लौ प्रज्वलित कर रहे थे, जिससे अंग्रेज भी डरते थे।

"हमारे रास्ते में आएगी भूख, प्यास, तकलीफ, मुसीबतें और मौतें। कोई नहीं कह सकता है कि इस जंग में कितने लोग शामिल होंगे, उनमें से कितने लोग जिंदा बचेंगे। कोई बात नहीं है कि हम जिंदा रहेंगे या मरेंगे। बात यह है कि आखिर में हमारी कामयाबी होगी। हिंदुस्तान आजाद होगा।"

23 जनवरी 1897 को कटक, बंगाल प्रेसीडेंसी में जन्मे सुभाष चंद्र बोस पराक्रमी थे, और उनके जन्मदिन को पूरा देश 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाता है। उनका व्यक्तित्व इतना विराट था कि उसकी व्याख्या के लिए शब्द भी कम पड़ते हैं।

"मैं ये जानकर बेहद आनंदित हूं कि आप ये महसूस कर चुके हैं कि आजादी हासिल करने की जिम्मेदारी सिर्फ देश में रह रहे लोगों के कंधों की जिम्मेदारी नहीं है।"

ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ने का उनका उत्साह उनके बचपन के एक सवाल में झलकता है। 15 वर्षीय सुभाष ने 1912 में अपनी मां से पूछा था, "इस स्वार्थी युग में, कितने निस्वार्थ पुत्र अपनी मां के लिए अपने निजी हितों का पूर्णतः त्याग करने को तैयार हैं?"

1921 में भारतीय सिविल सेवा से इस्तीफा देकर उन्होंने अपने बड़े भाई शरत को लिखा, "केवल त्याग और कष्ट की भूमि पर ही हम अपने राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।"

नेताजी ने अपने माता-पिता के प्रभाव में गहन धार्मिकता विकसित की। वे हमेशा अपनी वर्दी की जेब में भगवत गीता रखते थे। उन्होंने उपनिषदों के 'त्याग' के सिद्धांत को अपनाया और देश के लिए अथक परिश्रम करने का संकल्प लिया।

"मैं सुभाष चंद्र बोस, अपने जीवन की अंतिम सांस तक स्वतंत्रता के पवित्र युद्ध को जारी रखूंगा।"

21 अक्टूबर 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की, और वे देश के पहले राष्ट्राध्यक्ष बने।

इस सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली, जिससे भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई को नई पहचान मिली। नेताजी के नेतृत्व में आजाद हिंदू फौज ने बहादुरी से कई मोर्चों पर गोरी सेना को हराया।

26 अगस्त 1943 को आईएनए की कमान संभालते हुए उन्होंने कहा, "मैं प्रार्थना करता हूं कि ईश्वर मुझे हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए शक्ति प्रदान करें।"

आजाद हिंद फौज ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक अमिट छाप छोड़ी। इसके सैनिकों की वीरता ने देशभक्ति की लहर पैदा की। यह दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज के वीर सेनानियों के साहस और बलिदान को नमन करने का है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उनका साहस हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। हमें उनकी विचारधारा को समझते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद सरकार कब बनाई?
सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की।
सुभाष चंद्र बोस का जन्म कब हुआ?
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, बंगाल प्रेसीडेंसी में हुआ।
नेताजी का प्रसिद्ध नारा क्या था?
नेताजी का प्रसिद्ध नारा था, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।"
राष्ट्र प्रेस
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