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क्या सवर्ण एससी-एसटी और ओबीसी का उत्पीड़न करना अपना अधिकार समझते हैं?: स्वामी प्रसाद मौर्य

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क्या सवर्ण एससी-एसटी और ओबीसी का उत्पीड़न करना अपना अधिकार समझते हैं?: स्वामी प्रसाद मौर्य

सारांश

स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूजीसी के नए नियमों पर सवर्णों के विरोध पर कड़ा बयान दिया है। क्या सवर्ण समुदाय सच में एससी, एसटी और ओबीसी पर अत्याचार को अपना अधिकार मानते हैं? जानिए इस विवाद के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

यूजीसी लॉ 2026 का उद्देश्य सामाजिक समानता को बढ़ावा देना है।
स्वामी प्रसाद मौर्य का बयान सवर्णों के मानसिकता पर सवाल उठाता है।
जातिगत भेदभाव की समस्या शिक्षा प्रणाली में व्याप्त है।
सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानूनों की आवश्यकता है।
उच्च शिक्षण संस्थानों में सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।

लखनऊ, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा पेश किए गए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026' पर विवाद गहरा होता जा रहा है। इसी क्रम में पूर्व मंत्री एवं अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कड़ा बयान दिया है।

उन्होंने कहा कि इस कानून से जनरल कैटेगरी को आखिर किस बात का खतरा है। उन्होंने प्रश्न उठाते हुए कहा कि क्या सवर्ण समाज यह मानता है कि एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों पर अत्याचार करना उनका अधिकार है या वे यह सोचते हैं कि दूसरों के अधिकार छीनना उनका स्वाभाविक अधिकार है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान स्पष्ट कहा कि इस कानून से सवर्ण समाज को न तो कोई नुकसान है और न ही किसी प्रकार का खतरा, बल्कि यह कानून केवल उत्पीड़न के शिकार वर्गों को संरक्षण देने के उद्देश्य से लाया गया है, इसलिए इसका सभी को मिलकर स्वागत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि सवर्ण समाज के कुछ लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं, तो इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि तथाकथित मुट्ठीभर लोग आज भी देश की 90 प्रतिशत दलित और आदिवासी आबादी को हिंदू नहीं मानते। यदि वे वास्तव में उन्हें हिंदू मानते, तो शायद इस तरह का विरोध सामने नहीं आता। स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे सामाजिक समानता और समरसता के खिलाफ मानसिकता करार दिया।

यूजीसी लॉ 2026 को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह कानून पूरी तरह भारतीय संविधान के अनुरूप है और संविधान की मूल भावना को स्पष्ट रूप से लागू करता है। संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म, संप्रदाय, जाति, लिंग या स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता और यही सिद्धांत इस कानून के माध्यम से लागू किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और रीडर जैसे पदों पर नियुक्तियों में जातिगत भेदभाव खुले तौर पर देखने को मिलता है। एससी, एसटी और ओबीसी के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था का मजाक उड़ाया जाता है और कई जगहों पर इसे लगभग शून्य कर दिया गया है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगे कहा कि केवल शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ भी अक्सर अभद्र व्यवहार किया जाता है। ऐसे में इन सभी व्यवस्थाओं को सुचारू और न्यायसंगत बनाने के लिए यूजीसी लॉ 2026 जैसे कानून की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

इस दौरान संगम घाट पर अधिकारियों के साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य के हाथापाई और अभद्र व्यवहार के सवाल पर भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि शंकराचार्य की बेइज्जती हुई है तो यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि मौजूदा सरकार में अव्यवस्था फैली हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज शंकराचार्य भी उसी अव्यवस्था का शिकार हो गए हैं और अब उन्हें यह एहसास हो रहा है कि किस तरह के लोग सत्ता में बैठे हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने हाल ही में इटावा की घटना का भी जिक्र किया, जहां भागवत कथा कहने वाले यादव बंधुओं के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया और उनके सिर के बाल मुड़वा दिए गए तथा चोटी उखाड़ दी गई। उन्होंने कहा कि जब इस तरह की घटनाएं हो रही हैं तो शंकराचार्य के साथ अभद्र व्यवहार होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, बल्कि यह मौजूदा हालात की सच्चाई को उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह मुद्दा न केवल जातिगत भेदभाव पर प्रकाश डालता है, बल्कि यह समाज में गहरी सामाजिक असमानता को भी उजागर करता है। हमें एकजुट होकर इस मुद्दे के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य क्या है?
यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना और उत्पीड़ित वर्गों को संरक्षण देना है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सवर्णों को इस कानून से कोई खतरा नहीं है, बल्कि यह कानून एससी, एसटी और ओबीसी के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
राष्ट्र प्रेस
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