क्या तेजस्वी यादव बने राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष? बहन रोहिणी का तंज
सारांश
Key Takeaways
- तेजस्वी यादव का कार्यकारी अध्यक्ष बनना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम है।
- इस नियुक्ति से पार्टी में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है।
- रोहिणी आचार्य का तंज पार्टी की आंतरिक समस्याओं को उजागर करता है।
पटना, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की राजनीति में रविवार को एक महत्वपूर्ण घटना घटी, जब तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी ने अपने पिता और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि तेजस्वी को यह ज़िम्मेदारी पार्टी को मजबूत करने, राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने और पार्टी की रणनीति को सुदृढ़ बनाने के लिए दी गई है। तेजस्वी अब बिहार में युवा नेतृत्व के प्रतीक के रूप में उभरे हैं और उनकी भूमिका विपक्षी नेता के रूप में भी रही है। इस निर्णय के बाद पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में जबर्दस्त उत्साह है।
कई वरिष्ठ नेताओं ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद और भी प्रगति करेगा। ऐसा माना जा रहा है कि यह निर्णय भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस नियुक्ति से बिहार की राजनीति में राजद की भूमिका और अधिक प्रभावशाली होने की संभावना है।
इस अवसर पर, राजद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "एक नए युग की शुरुआत। तेजस्वी यादव बने राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष।"
इसी बीच, लालू यादव की बेटी और तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य ने तंज कसते हुए लिखा, "सियासत के शिखर-पुरुष की गौरवमयी पारी का एक तरह से पटाक्षेप, ठकुरसुहाती करने वालों और 'गिरोह-ए-घुसपैठ' को उनके हाथों की 'कठपुतली बने शहजादा' की ताजपोशी मुबारक।"
इससे पहले, रोहिणी ने पार्टी की मौजूदा स्थिति और नेतृत्व के बारे में सवाल उठाए थे। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घुसपैठियों ने पार्टी की कमान अपने हाथ में ले ली है, जिससे लालू प्रसाद यादव की विरासत संकट में है।