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क्या यूजीसी के नियमों से विद्यार्थियों में नफरत फैल रही है? प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार से मांगी वापसी

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क्या यूजीसी के नियमों से विद्यार्थियों में नफरत फैल रही है? प्रियंका चतुर्वेदी ने सरकार से मांगी वापसी

सारांश

शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने यूजीसी के नए नियमों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि इससे विद्यार्थियों में नफरत का माहौल बन रहा है। क्या यह सही है? जानें इस पर उनके विचार और संबंधित मुद्दे।

मुख्य बातें

यूजीसी के नए नियम विवादास्पद हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने इन पर कड़ी आपत्ति जताई है।
जाति के आधार पर भेदभाव की आवश्यकता को लेकर चिंताएँ हैं।
शिक्षा में समानता का होना आवश्यक है।
बजट सत्र में अमेरिका के व्यापार संबंधों पर ध्यान दिया जाएगा।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। यूजीसी के नए नियमों को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस प्रकार के कदम से विद्यार्थियों में और अधिक नफरत का संचार हो रहा है। इसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।

प्रियंका चतुर्वेदी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "यह विवाद बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जाति के आधार पर भेदभाव यदि होता है, तो इसे सुधारने की आवश्यकता है। इस देश में कोई भी इस सत्य से इंकार नहीं कर सकता कि अगर कैंपस में जातिवाद है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।"

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी गाइडलाइंस लाना स्वयं में भेदभाव को बढ़ावा देने वाला कदम है, जो पहले से यह मानती हैं कि समाज में एक वर्ग हमेशा शोषित और दूसरा शोषणकर्ता है। प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा, "इन दिशानिर्देशों में शिकायत दर्ज कराने का अधिकार केवल कुछ वर्गों तक सीमित कर दिया गया है, जिसमें केवल अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग ही शिकायत कर सकते हैं, जो कि स्वयं में पक्षपातपूर्ण है।"

कांग्रेस के पूर्व नेता शकील अहमद के बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "कांग्रेस पार्टी के नेता अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं और इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा। लेकिन यह अचरज की बात है कि शकील अहमद कई वर्षों से कांग्रेस पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। वह मंत्री, सांसद और विधायक रह चुके हैं और संगठन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। अगर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है और उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, तो शायद वह अपने मन की बात कह रहे हैं।"

बजट पर सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, "हम बजट सत्र से क्या उम्मीद कर सकते हैं? पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका के टैरिफ लगाने के बाद यह पहला बजट सत्र होगा। हमें यह समझना होगा कि अमेरिका के साथ हमारी व्यापार संधियों में कौन से समझौते हैं और कौन से नहीं हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हमारे समाज की समरसता को भी चुनौती देता है। ऐसे नियमों का निर्माण जो भेदभाव को बढ़ावा देते हैं, समाज में और अधिक विभाजन का कारण बन सकते हैं। हमें ऐसी नीतियों को लागू करने से पहले उनके संभावित परिणामों पर ध्यान देना चाहिए।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूजीसी के नए नियमों का क्या प्रभाव है?
ये नियम विद्यार्थियों के मध्य भेदभाव और नफरत को बढ़ावा दे रहे हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि ऐसे नियम विद्यार्थियों में नफरत पैदा कर रहे हैं और इन्हें वापस लिया जाना चाहिए।
क्या जाति के आधार पर भेदभाव सही है?
जाति के आधार पर भेदभाव गलत है और इसे समाप्त करने की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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