क्या मध्य प्रदेश के उज्जैन में 15 फरवरी से 'विक्रमोत्सव' की शुरुआत होगी?
सारांश
Key Takeaways
- विक्रमोत्सव 15 फरवरी से 19 मार्च तक चलेगा।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आयोजन की समीक्षा की।
- इस वर्ष शिवरात्रि मेलों का उद्घाटन होगा।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नाट्य कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।
- उज्जयिनी गौरव दिवस 19 मार्च को मनाया जाएगा।
भोपाल/उज्जैन, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य को समर्पित एक भव्य आयोजन 'विक्रमोत्सव' इस वर्ष 15 फरवरी से आरंभ होगा और यह 19 मार्च तक चलेगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद इस विशाल कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की है, जिसमें धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और व्यापारिक गतिविधियाँ शामिल हैं।
सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, विक्रमोत्सव का शुभारंभ 15 फरवरी को शिवरात्रि मेलों, भव्य कलश यात्रा और कलाकारों के समूह द्वारा प्रस्तुत 'शिवोहम' संगीतमय प्रस्तुति के साथ होगा। इसके उपरांत, विक्रम थिएटर महोत्सव में 16 से 25 फरवरी के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध नाट्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे, जिनमें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित नाटक होंगे।
26 से 28 फरवरी के दौरान, एक अंतरराष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन, कठपुतली महोत्सव और अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद, सम्राट विक्रमादित्य के युग में न्याय व्यवस्था और शासन प्रणाली पर केंद्रित बौद्धिक सम्मेलन 28 फरवरी से 1 मार्च तक होगा। 7 मार्च को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें देशभर के प्रसिद्ध कवि भाग लेंगे।
विक्रमोत्सव के तहत अन्य प्रमुख गतिविधियों में 20 से अधिक देशों की प्रविष्टियों के साथ पौराणिक फिल्मों का एक अंतरराष्ट्रीय महोत्सव, वेद अंताक्षरी और गुड़ी पड़वा के अवसर पर रामघाट और दत्त अखाड़ा में सूर्योदय पूजा शामिल हैं। यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक विमर्श का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करेगा।
कार्यक्रम के अंतिम दिन, 19 मार्च को, वर्ष प्रतिपदा और सृष्टि आरंभ दिवस के अवसर पर 'उज्जयिनी गौरव दिवस' मनाया जाएगा। इस दिन शिप्रा नदी के तट पर मुख्य समारोह आयोजित होगा, जिसमें सम्राट विक्रमादित्य पुरस्कार का वितरण, विक्रम पंचांग 2082-83 का विमोचन और नृत्य-नाट्य प्रस्तुति 'महादेव की नदी कथा' प्रमुख आकर्षण होंगे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि विक्रमोत्सव में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और कृतित्व के सभी पहलुओं की प्रभावी और व्यापक प्रस्तुति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक निरंतरता को सशक्त बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक योगदान से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है।
सीएम मोहन यादव ने यह भी निर्देश दिए कि विज्ञान महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को विक्रमोत्सव से जोड़ा जाए, ताकि सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कालगणना, खगोल विज्ञान तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को उजागर करने वाले विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें।