क्या वामन टिकरिहा ने छत्तीसगढ़ की मिट्टी से नया गौरव उभारा है?

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क्या वामन टिकरिहा ने छत्तीसगढ़ की मिट्टी से नया गौरव उभारा है?

सारांश

छत्तीसगढ़ के किसान वामन टिकरिहा को डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार से नवाजा गया है। उनकी मेहनत और नवाचार ने न केवल उन्हें सम्मान दिलाया, बल्कि अन्य किसानों के लिए प्रेरणा भी बनी है। जानिए कैसे उन्होंने सीमित संसाधनों में भी सफल खेती की है।

Key Takeaways

  • नवाचार से खेती में सफलता संभव है।
  • जैविक खेती और विविध फसलें लाभदायक हैं।
  • कृषि में प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करें।
  • मछली पालन और पशुपालन से आय में वृद्धि होती है।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

बलौदा बाजार, 2 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कभी जिस किसान के घर की मिट्टी का सौंधापन संघर्ष से भरा था, आज वही किसान छत्तीसगढ़ राज्य की शान है। छत्तीसगढ़ के किसान अब केवल अन्नदाता नहीं रहे, बल्कि नवाचार और प्राकृतिक खेती के प्रतीक भी बन गए हैं।

यह कहानी बलौदा बाजार जिले के पलारी ब्लॉक के छोटे से गांव मुसवाडीह के किसान वामन टिकरिहा की है, जिन्हें वर्ष 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने डॉ. खूब चंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार के लिए चयनित किया है।

यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ के उन प्रगतिशील किसानों को दिया जाता है, जिन्होंने कृषि क्षेत्र में नवाचार, जैविक और विविध आय आधारित खेती के माध्यम से नई दिशा दिखाई है।

राज्य स्थापना के बाद यह पहला अवसर है, जब बलौदा बाजार जिले से किसी किसान का चयन इस प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए हुआ है। जिले के कृषि समुदाय के लिए यह गर्व का क्षण है। गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक लोग इस उपलब्धि पर खुशी जता रहे हैं।

वामन टिकरिहा के चयन ने साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों में भी मेहनत, लगन और नई सोच से खेती को न केवल लाभदायक बनाया जा सकता है, बल्कि एक प्रेरणा भी दी जा सकती है।

राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में वामन टिकरिहा ने बताया कि वे साल 1990 से खेती कर रहे हैं और 2001 से जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास कर रहे थे। 25 साल के संघर्ष के बाद यह सम्मान मिला है। सरकार से उम्मीद है कि ग्रामीण इलाकों में कृषि अनुसंधान केंद्रों की पहुंच और प्रशिक्षण बढ़ाया जाए, ताकि किसान नई तकनीक से सीधे जुड़ सकें।

वामन टिकरिहा ने बताया कि वे मुख्य रूप से जैविक सुगंधित धान की खेती करते हैं। व्यावसायिक दृष्टिकोण से वे ‘महामाया’ और ‘स्वर्णा’ किस्म के धान की बुआई करते हैं। इसके साथ ही वे उद्यानिकी में भी विविध फसलें उगाते हैं।

उन्होंने कहा कि मैं बेर, अमरूद, नींबू के साथ-साथ जिमीकंद और करौंदा जैसी फसलें भी लगाता हूं।

टिकरिहा ने बताया कि वे मछली पालन भी करते हैं, जिसके लिए उन्हें विभाग की ओर से अनुदान प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि इससे मुझे प्रतिवर्ष एक से दो लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी होती है। इसके अलावा पशुपालन भी करता हूं। सरकार की योजनाओं से मुझे खेती में बहुत सहयोग मिला है।

उन्होंने अन्य किसानों से आग्रह किया कि केवल धान पर निर्भर न रहें। किसानों को उद्यानिकी, मत्स्य और पशुपालन को साथ लेकर चलना चाहिए। इससे आय में स्थिरता और वृद्धि दोनों मिलती है।

उनकी पत्नी माधुरी टिकरिहा ने कहा कि पुरस्कार की खबर सुनकर पूरा परिवार खुश है। हमने कभी सोचा नहीं था कि यह सम्मान मिलेगा। यह हमारे लिए गर्व का क्षण है। आज के युवा नौकरी के लिए प्रदेश से बाहर जाना चाहते हैं, जबकि खेती में भी अच्छी आमदनी के अवसर हैं। आधुनिक तकनीक और सरकार की योजनाओं के सहयोग से खेती अब पहले की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक हो गई है।

Point of View

बल्कि हर किसान के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हमें चाहिए कि हम ऐसे किसानों का समर्थन करें और उनके अनुभवों से सीखें।
NationPress
05/02/2026

Frequently Asked Questions

वामन टिकरिहा को पुरस्कार कब मिला?
उन्हें वर्ष 2025-26 के लिए डॉ. खूब चंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
वामन टिकरिहा किस प्रकार की खेती करते हैं?
वे मुख्य रूप से जैविक सुगंधित धान की खेती करते हैं और उद्यानिकी में विविध फसलें उगाते हैं।
वामन टिकरिहा ने कितने वर्षों से खेती की है?
उन्होंने 1990 से खेती शुरू की और 2001 से जैविक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
क्या वामन टिकरिहा को मछली पालन से आय होती है?
हां, वे मछली पालन करते हैं जिससे उन्हें प्रतिवर्ष एक से दो लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी होती है।
क्या वामन टिकरिहा का पुरस्कार अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है?
बिल्कुल, उनका पुरस्कार अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है कि वे भी नवाचार और मेहनत के जरिए सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
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