क्या वाकणकर ने आरएसएस की टोपी पहन कर इंदिरा गांधी से पद्मश्री सम्मान लिया?

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क्या वाकणकर ने आरएसएस की टोपी पहन कर इंदिरा गांधी से पद्मश्री सम्मान लिया?

सारांश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने डॉ. वाकणकर की उपलब्धियों की सराहना की, जिसमें उन्होंने आरएसएस की टोपी पहनकर पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया। यह समारोह भारतीय पुरातत्व के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था।

Key Takeaways

  • डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का भारतीय पुरातत्व में महत्वपूर्ण योगदान है।
  • उन्हें पद्मश्री सम्मान 1975 में मिला।
  • उन्होंने भीमबेटका के शैलचित्रों का उत्खनन किया।
  • उज्जैन में डोंगला की खोज की गई।
  • वाकणकर ने पुरातत्व को जन आंदोलन बना दिया।

भोपाल, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने भीमबेटका के शैलचित्रों का उत्खनन और गहन अध्ययन कर भारत को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। वहीं, जब उन्हें पद्म श्री अलंकरण के लिए चयनित किया गया तो उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की टोपी लगाकर यह सम्मान ग्रहण किया।

राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह और राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री यादव ने वाकणकर को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1957 में भीमबेटका के शैलचित्रों का उत्खनन और गहन अध्ययन कर न केवल इन प्राचीन स्थलों पर प्रकाश डाला, बल्कि भारत को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। आज भीमबेटका केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है। इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित किया जा रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने महेश्वर, मंदसौर, नावड़ाटौडी, इंद्रगढ़, मनोटी, आवरा, कायथा, आजादनगर, इंदौर, दंगवाड़ा और रूनिजा जैसे विभिन्न पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन और अध्ययन का नेतृत्व किया।

उन्होंने आगे कहा कि डॉ. वाकणकर को इस अद्वितीय योगदान के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1975 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया गया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक सेवक संघ के विचारों से ओत-प्रोत थे। मुख्यमंत्री यादव ने डॉ. वाकणकर द्वारा पद्मश्री सम्मान ग्रहण करने के समय का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि डॉ. वाकणकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गणवेश का प्रमुख अंग 'ब्लैक कैप' धारण करके ही पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया था।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान रहा है। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने पुरातत्व को जन आंदोलन बना दिया था। यह उनके व्यक्तित्व और संप्रेषण का ही प्रभाव था कि उज्जैन का जन-जन अपने परिवेश को पुरातत्व की दृष्टि से देखने लगा था। पुरातत्व को लोक रुचि का विषय बनाने का डॉ. वाकणकर का प्रयास अद्भुत और अनुकरणीय था। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर अनेक प्रतिभाओं के धनी थे। उन्होंने सितार वादन, मूर्ति कला, चित्रकला, काव्य लेखन एवं संगीत के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर के परिश्रम और प्रयासों से काल गणना के केंद्र डोंगला की खोज हुई।

उन्होंने बताया कि पृथ्वी की दीर्घकालीन घूर्णन धुरी में परिवर्तन के कारण उज्जैन में होने वाला शून्य देशांतर-रेखा और कर्क रेखा का मिलन उत्तर की ओर खिसक कर डोंगला में हुआ। पुरातत्वविद् डॉ. वाकणकर ने उज्जैन क्षेत्र में गहन सर्वेक्षण किया था। शंकु की सहायता से उन्होंने कर्क रेखा की नई स्थिति का पता लगाया। मुख्यमंत्री यादव ने पद्मश्री से सम्मानित डॉ. प्रो. यशोधर मठपाल को शॉल-श्रीफल और भू वराह की प्रतिकृति तथा 2 लाख रुपये का चैक भेंट कर 19वें डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान वर्ष 2022-2023 से सम्मानित किया। समारोह में अंतरराष्ट्रीय सितार वादक स्मिता नागदेव एवं कवि लेखक राहुल शर्मा ने सितार और कविता की जुगलबंदी से डॉ. वाकणकर द्वारा रचित कविता "इतिहास के पटल पर" का राग बैरागी भैरव में गायन प्रस्तुत किया।

Point of View

जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका और भारतीय पुरातत्व के विकास पर प्रकाश डाला गया है। यह जानकारी हमारे समाज की सांस्कृतिक धरोहर को समझने में मदद करती है।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

डॉ. वाकणकर ने किस वर्ष पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया?
डॉ. वाकणकर ने वर्ष 1975 में पद्मश्री सम्मान ग्रहण किया।
क्या वाकणकर ने भीमबेटका के शैलचित्रों को खोजा?
हाँ, डॉ. वाकणकर ने 1957 में भीमबेटका के शैलचित्रों का उत्खनन किया।
उज्जैन में शून्य देशांतर-रेखा और कर्क रेखा का मिलन कहाँ हुआ?
उज्जैन में यह मिलन अब डोंगला में हुआ है।
डॉ. वाकणकर के अन्य योगदान क्या हैं?
उन्होंने भारतीय पुरातत्व में कई स्थलों का उत्खनन किया और पुरातत्व को जन आंदोलन बना दिया।
कौन से अन्य क्षेत्रों में डॉ. वाकणकर ने काम किया?
उन्होंने सितार वादन, मूर्ति कला, चित्रकला, और संगीत के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा दिया।
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