क्या भारत की सौर ऊर्जा क्षमता पिछले 10 वर्षों में 40 गुना बढ़कर 129 गीगावाट हुई?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2014 में 3 गीगावाट थी।
- 2025 तक यह 129 गीगावाट तक पहुंचने की संभावना है।
- गैर-जीवाश्म क्षमता 259 गीगावाट पार कर जाएगी।
- पंचामृत ढांचे के तहत कई लक्ष्यों की योजना बनाई गई है।
- भारत वैश्विक क्लीन ऊर्जा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
नई दिल्ली, 2 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत की सौर ऊर्जा यात्रा, जो लक्षित नीतियों, प्रौद्योगिकी नवाचार और सामरिक सहयोग के माध्यम से देश के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। सौर ऊर्जा न केवल भारत के नवीकरणीय ऊर्जा मिश्रण की रीढ़ है, बल्कि सतत आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु नेतृत्व के लिए भी एक उत्प्रेरक है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले दस वर्षों में सौर ऊर्जा इंस्टॉलेशन में वृद्धि ने भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता को दोगुना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2014 के 3 गीगावाट से 2025 में 40 गुना से अधिक बढ़कर 129 गीगावाट हो गई है।
इसके साथ ही, गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 259 गीगावाट को पार करने के साथ, अक्टूबर 2025 तक देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 500 गीगावाट के 50 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है।
आईआरईएनए रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2025 के अनुसार, भारत सौर ऊर्जा में तीसरे, पवन ऊर्जा में और कुल इंस्टॉल्ड रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है। यह रैंकिंग ग्लोबल क्लीन ऊर्जा में देश की महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतीक है।
भारत ग्रीन ट्रांजिशन को आगे बढ़ाने के लिए पंचामृत ढांचे के तहत अपना रोडमैप प्रस्तुत करता है। इस पंचामृत ढांचे के पांच मुख्य उद्देश्य हैं:
पहला लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित स्थापित बिजली क्षमता प्राप्त करना है, जिसमें सौर, पवन, बायोमास, हाइड्रो और न्यूक्लियर ऊर्जा शामिल हैं।
दूसरा उद्देश्य 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल करना है।
तीसरा लक्ष्य 2030 तक कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 अरब टन की कमी लाना है।
चौथा लक्ष्य 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता में 45 प्रतिशत की कमी लाना है।
पाँचवाँ लक्ष्य 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है, जिससे सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।