एशियन गेम्स 2026: ईशा सिंह ने 25 मीटर पिस्टल में जीता सिल्वर, पिता बोले— 'यह गोल्ड से कम नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शूटर ईशा सिंह ने 28 सितंबर 2026 को टोयोटा में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में सिल्वर मेडल हासिल किया। मात्र 21 वर्ष की इस शूटर ने कड़े मुकाबले और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया, जिसे उनके पिता सचिन सिंह ने 'गोल्ड के बराबर' करार दिया।
मुकाबले का रोमांचक घटनाक्रम
ईशा ने उत्तर कोरिया की किम ह्योन सुक को पराजित कर सिल्वर मेडल पक्का किया। शूट-ऑफ में मुकाबला अत्यंत कड़ा रहा — शुरुआती दो शूट-ऑफ राउंड में दोनों खिलाड़ी बराबरी पर रहीं, जिसके बाद मुकाबला तीन शूट-ऑफ राउंड की सीरीज तक खिंच गया। गोल्ड मेडल के लिए चीन की शियाओ जियारुइक्सुआन के खिलाफ दो-सीरीज वाले शूट-ऑफ में ईशा को हार का सामना करना पड़ा।
आयोजकों की गलतियों के बीच ईशा की मानसिक मज़बूती
ईशा के लिए यह मुकाबला केवल प्रतिद्वंद्वियों तक सीमित नहीं था। शूट-ऑफ के दौरान आयोजकों की तरफ से अचानक लिए गए कुछ अनियोजित ब्रेक ने माहौल को और जटिल बना दिया — ऐसे व्यवधान आमतौर पर किसी भी एथलीट की लय तोड़ देते हैं। बावजूद इसके, ईशा ने अपना संयम बनाए रखा।
पिता सचिन सिंह ने कहा, 'असल में, अगर आप गलत कमांड देकर मैच रोकते हैं, तो दोनों एथलीट्स की लय बिगड़ जाती है। इससे दिमाग उलझ जाता है। ऐसे में वापस अपनी लय हासिल करते हुए शूटिंग करना बहुत मुश्किल काम है। उनकी कमांड गलत थी, और फिर वे लाइट बंद करना भी भूल गए। तो ये चीजें एथलीट को बहुत परेशान करती हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह सिर्फ सिल्वर नहीं, बल्कि ईशा के लिए गोल्ड है।'
ईशा की उपलब्धियों का सफर
हांगझोऊ एशियन गेम्स में दो मेडल जीतने वालीं ईशा ने इसके बाद भी अपनी रफ्तार कायम रखी। उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में टीम सिल्वर और मिक्स्ड सिल्वर जीता। इसके अलावा वर्ल्ड कप 2025 में इंडिविजुअल गोल्ड और वर्ल्ड कप 2026 में सिल्वर मेडल भी उनके नाम रहा। ईशा विश्व रैंकिंग में नंबर एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर भी रह चुकी हैं।
ओलंपिक की तैयारी और उम्मीदें
ईशा फिलहाल ओलंपिक गेम्स की तैयारी में जुटी हैं। पिता सचिन का मानना है कि एशियन गेम्स का यह मेडल उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगा। उन्होंने कहा, 'पिछले 18 महीनों में उन्होंने कई गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते हैं। वह वर्ल्ड चैंपियन बनीं, वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर बनीं और वर्ल्ड नंबर वन बनीं। तो ओलंपिक से पहले एक 21 साल की लड़की पर इतनी बड़ी उम्मीदों का बोझ था। यह बहुत बड़ा बोझ था जो वह अपने कंधों पर उठाए हुए थीं।' उन्होंने यह भी कहा कि एयर पिस्टल इवेंट में ईशा उस स्वाभाविक शूटिंग को रोकने की कोशिश करती दिखीं जो उनकी खासियत है, और यह मेडल उनके लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक बूस्ट है।
आगे क्या
एशियन गेम्स के इस प्रदर्शन के साथ ईशा की नज़रें अब ओलंपिक पोडियम पर टिकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शूटिंग टीम ओलंपिक चक्र में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज कराने की कोशिश में है।