वर्ल्ड कप 2027 से पहले बुमराह का वनडे सूखा: 2023 के बाद सिर्फ 2 मैच, न्यूजीलैंड दौरे में भी चूके मौके
सारांश
मुख्य बातें
जसप्रीत बुमराह को न्यूजीलैंड दौरे के लिए घोषित भारतीय टीम में टेस्ट स्क्वाड में जगह तो मिली है, लेकिन पाँच मैचों की वनडे सीरीज से उन्हें एक बार फिर बाहर रखा गया है। चिंताजनक पहलू यह है कि वनडे विश्व कप 2023 के बाद से अब तक बुमराह ने केवल दो एकदिवसीय मुकाबले ही खेले हैं — और वर्ल्ड कप 2027 में एक साल से भी कम का वक्त बचा है।
बुमराह का वनडे रिकॉर्ड: 2023 के बाद का सफर
2024 और 2025 में बुमराह ने एक भी वनडे मुकाबला नहीं खेला। 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ हुई तीन मैचों की वनडे सीरीज में उन्हें टीम में रखा गया, जहाँ उन्होंने दो मैच खेले — लेकिन चोट के कारण तीसरा मुकाबला नहीं खेल सके। इस तरह विश्व कप 2023 के बाद से उनका वनडे अनुभव महज दो मैचों तक सिमटा हुआ है।
वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल ही में हुई घरेलू वनडे सीरीज में भी बुमराह को टीम से बाहर रखा गया और उन्हें एशियन गेम्स 2026 में भाग लेने वाली टीम के साथ भेजा गया। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने केवल छह ओवर गेंदबाजी की — जो एक वनडे मैच के एक स्पेल से भी कम है।
न्यूजीलैंड दौरा: चूका हुआ अवसर
क्रिकेट विश्लेषकों के अनुसार, न्यूजीलैंड की परिस्थितियाँ तेज गेंदबाजों के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती हैं। ऐसे में पाँच मैचों की वनडे सीरीज बुमराह को 50 ओवर के फॉर्मेट में जरूरी मैच प्रैक्टिस दिलाने का एकदम उचित मौका था। लेकिन भारतीय चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन ने एक बार फिर वर्कलोड मैनेजमेंट को प्राथमिकता देते हुए उन्हें केवल टेस्ट टीम में रखा।
गौरतलब है कि न्यूजीलैंड दौरे पर खेले जाने वाले टेस्ट मैचों के अलावा इस दौरे में बुमराह की फिटनेस और रिदम का 50 ओवर के फॉर्मेट में परीक्षण भी हो सकता था।
वर्ल्ड कप 2027 से पहले का रोडमैप
न्यूजीलैंड दौरे के बाद भारतीय टीम के पास श्रीलंका और जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन-तीन वनडे मैचों की श्रृंखला बचती है — दोनों घरेलू सरजमीं पर। एशिया कप 2027 भी वनडे फॉर्मेट में खेला जाएगा। लेकिन वर्ल्ड कप 2027 की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया करने वाले हैं — यानी विदेशी परिस्थितियों में।
यह ऐसे समय में आया है जब विदेशी ज़मीन पर खेलने का अनुभव बेहद अहम होता है। घरेलू सरजमीं पर सीमित वनडे अभ्यास और विदेशी परिस्थितियों से अनजान होना बुमराह की तैयारियों पर सवाल खड़ा करता है।
वर्कलोड बनाम फॉर्मेट की तैयारी: बड़ा सवाल
बुमराह की गेंदबाजी क्षमता और फॉर्म पर किसी को संदेह नहीं है — वे निस्संदेह भारत के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज हैं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि वर्कलोड मैनेजमेंट और वनडे फिटनेस दो अलग-अलग पहलू हैं। 50 ओवर के फॉर्मेट के लिए एक खास मानसिकता, लय और शरीर की आदत जरूरी होती है, जो सिर्फ मैच खेलने से ही आती है।
वर्ल्ड कप से महज कुछ महीने पहले बुमराह को वनडे फॉर्मेट से व्यवस्थित रूप से दूर रखने का निर्णय, भारतीय चयन नीति के बारे में गंभीर सवाल उठाता है। आने वाले महीनों में चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को इस असंतुलन को सुधारना होगा।