क्या विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले हितेश गुलिया को सम्मानित किया गया?

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क्या विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले हितेश गुलिया को सम्मानित किया गया?

सारांश

हितेश गुलिया ने विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय नौसेना का नाम रोशन किया। उनकी मेहनत और कोच सुरंजय सिंह की मेंटरशिप ने उन्हें इस सफलता तक पहुँचाया। जानें कैसे हितेश ने अपनी यात्रा शुरू की और क्या कहते हैं उनके सपने।

Key Takeaways

  • हितेश गुलिया ने विश्व मुक्केबाजी कप में स्वर्ण पदक जीता।
  • उनके कोच एम. सुरंजय सिंह की मेंटरशिप महत्वपूर्ण रही।
  • भारतीय नौसेना का समर्थन एक प्रेरणादायक तत्व है।
  • हितेश का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करना है।
  • उनकी कहानी युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा है।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। विश्व मुक्केबाजी कप सीरीज 2025 में शानदार प्रदर्शन करने वाले हितेश गुलिया और उनके कोच एम. सुरंजय सिंह को भारतीय नौसेना के एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने सम्मानित किया।

हितेश गुलिया और उनके कोच एम. सुरंजय सिंह दोनों ही भारतीय नौसेना में कार्यरत हैं।

एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (सीएनएस) ने युवा मुक्केबाज को वैश्विक मंच पर उनकी शानदार कामयाबी के लिए बधाई दी और कोच सुरंजय की उनकी मेंटरशिप और लगन के लिए तारीफ की। उनकी सफलता एक बार फिर नेवी के खेल में बेहतरीन प्रदर्शन को बढ़ावा देने और नेवी के एथलीटों की अगली पीढ़ी को प्रेरित करने के कमिटमेंट को दर्शाती है।

हितेश ने ब्राजील (स्टेज) और कजाकिस्तान (स्टेज 2) में हुए मुक्केबाजी विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ पदक जीते हैं बल्कि विश्व में भारतीय मुक्केबाजी और ताकत को प्रतिष्ठित किया है। हितेश ने ब्राजील में हुए मुक्केबाजी विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद कजाकिस्तान में उन्होंने रजत पदक जीता था। ग्रेटर नोएडा में हाल में संपन्न विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता है। उनकी सफलता देश के साथ ही भारतीय नेवी के लिए भी गर्व और उत्साह की बात है।

21 साल के हितेश गुलिया हरियाणा के झज्जर से संबंध रखते हैं। हितेश ने अपना वजन कम करने के लिए रिंग में कदम रखा था और कब मुक्केबाजी उनके लिए शौक और फिर जुनून बन गई, उन्हें पता भी नहीं चला। हितेश को बतौर मुक्केबाज अपना करियर बनाने में उनके परिवार का बड़ा समर्थन मिला है। उन्हें भारतीय मुक्केबाजी का अगला बड़ा नाम माना जा रहा है।

हितेश ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल्स में स्वर्ण जीतने के बाद कहा, "इस साल मैंने दूसरा स्वर्ण जीता है। इसके पीछे 10 साल की मेहनत है। मेरे जीवन में बड़ा मोड़ तब आया था जब मैं एक सेलर के तौर पर इंडियन नेवी में शामिल हुआ था। यहां मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिला। जैसे-जैसे मैं हर चीज को हासिल करता जा रहा हूं, बड़े सपने और नजदीक आते जा रहे हैं।”

Point of View

बल्कि यह भारतीय नौसेना और देश की खेल संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनके प्रयासों ने युवा एथलीटों को प्रेरित किया है और यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और समर्थन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

हितेश गुलिया ने कितने स्वर्ण पदक जीते हैं?
हितेश गुलिया ने इस साल दो स्वर्ण पदक जीते हैं, एक ब्राजील में और दूसरा ग्रेटर नोएडा में।
उनके कोच का नाम क्या है?
हितेश के कोच का नाम एम. सुरंजय सिंह है।
हितेश गुलिया किस राज्य से हैं?
हितेश गुलिया हरियाणा के झज्जर से हैं।
उनकी सफलता का रहस्य क्या है?
उनकी सफलता का रहस्य उनकी मेहनत, लगन और कोच की मेंटरशिप है।
हितेश ने कब से मुक्केबाजी शुरू की?
हितेश ने 10 साल पहले मुक्केबाजी शुरू की थी।
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