क्या जैस्मिन लंबोरिया भारतीय सेना की पहली महिला मुक्केबाज बनकर विश्व बॉक्सिंग में गोल्ड जीतने में सफल हुई?

सारांश
Key Takeaways
- जैस्मिन लंबोरिया ने भारतीय सेना में पहली महिला मुक्केबाज बनकर गोल्ड मेडल जीता।
- महिलाओं के लिए मुक्केबाजी एक सशक्तिकरण का माध्यम है।
- उनकी कहानी रूढ़िवादिता को चुनौती देती है।
- सपनों को साकार करने के लिए दृढ़ संकल्प आवश्यक है।
- जैस्मिन की उपलब्धियां प्रेरणादायक हैं।
नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत में मुक्केबाजी तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रही है। ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भारतीय मुक्केबाज अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित कर रहे हैं। महिला मुक्केबाजी में भी एक नाम तेजी से उभर रहा है और वह नाम है जैस्मिन लंबोरिया।
24 वर्षीय जैस्मिन ने अपनी मेहनत, दृढ़ संकल्प और प्रतिभा के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
हरियाणा देश के सबसे प्रगतिशील राज्यों में से एक है। जैस्मिन का जन्म हरियाणा के भिवानी में 30 अगस्त 2001 को हुआ। भिवानी को 'लिटिल क्यूबा' के नाम से जाना जाता है। उनके पिता जयवीर लंबोरिया होमगार्ड हैं, जबकि मां जोगिंदर कौर गृहिणी हैं।
जैस्मिन के लिए मुक्केबाजी में करियर बनाना आसान नहीं था। एक लड़की होने के नाते उन्हें पारिवारिक और सामाजिक दवाब का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने एक बार विश्वास हासिल करने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके चाचा संदीप और परविंदर भी उनके साथ रहे, जो खुद मुक्केबाज हैं और राष्ट्रीय स्तर पर विजेता रहे हैं।
भिवानी की लैंबोरिया बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान जैस्मिन ने लड़कों के साथ अभ्यास किया, जिसने उनकी तकनीक और आत्मविश्वास को और मजबूत किया।
जैस्मिन ने 2021 में दुबई में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उसी वर्ष एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में रजत पदक और 2022 में बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 60 किग्रा लाइटवेट वर्ग में कांस्य पदक जीता।
इन उपलब्धियों के बाद उन्हें भारतीय सेना में नियुक्ति मिली, जहां वे पहली महिला मुक्केबाज बनीं।
अस्ताना में 2025 में आयोजित विश्व बॉक्सिंग कप में जैस्मिन ने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक में उनसे पदक की उम्मीद की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैस्मिन की सफलता उन लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो रूढ़िवादिता के बोझ तले अपने सपनों का समझौता कर लेती हैं।