रोहित-विराट मैच-दर-मैच निखर रहे हैं, युवाओं को मिलती है सीख: गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले
सारांश
मुख्य बातें
टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले ने 29 सितंबर 2026 को गुवाहाटी में बताया कि रोहित शर्मा और विराट कोहली की मौजूदगी पूरी टीम को ऊर्जा और अनुभव से भर देती है। वेस्टइंडीज के खिलाफ बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में होने वाले दूसरे वनडे से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा कि दोनों वरिष्ठ बल्लेबाज हर सीरीज के साथ और पैने होते जा रहे हैं।
रोहित-विराट का टीम पर असर
बहुतुले ने कोहली की पहले वनडे में नाबाद 139 रनों की पारी का जिक्र करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि वह ऐसे खिलाड़ी हैं जो हर सीरीज और हर मैच के साथ और बेहतर होते जा रहे हैं। वह ऐसे खिलाड़ी हैं जो इतना कुछ हासिल करने के बाद भी और बेहतर करना चाहते हैं, जो बहुत शानदार है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि रोहित के साथ होने से दोनों दिग्गज मिलकर टीम में अपना अनुभव उड़ेलते हैं और युवा खिलाड़ी उनकी बातचीत और सोच से सीधे लाभ उठाते हैं।
कुलदीप यादव की भूमिका
तिरुवनंतपुरम में खेले गए पहले वनडे में बाएं हाथ के स्पिनर कुलदीप यादव ने 10 ओवरों में 40 रन देकर 4 विकेट झटके और वेस्टइंडीज को 295/7 पर रोकने में अहम भूमिका निभाई। उसी मैच में शुभमन गिल ने भी 110 रन की पारी खेली। बहुतुले ने कुलदीप की तारीफ करते हुए कहा, 'कुलदीप हमेशा से भारत के लिए मैच जिताने वाले खिलाड़ी रहे हैं। उनके आंकड़े भी यही बताते हैं और वह अपने खेल पर बहुत मेहनत करते हैं।' उन्होंने बताया कि कुलदीप हाल ही में काउंटी क्रिकेट खेलकर लौटे हैं, जहाँ उन्होंने खूब ओवर फेंके, इसलिए वह पूरी लय में इस सीरीज में उतरे हैं।
स्पिन विभाग में विकल्पों की भरमार
अगले साल होने वाले ICC मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप की तैयारियों के मद्देनजर बहुतुले ने स्पिन विभाग में गहराई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अक्षर पटेल की मौजूदगी टीम को परखने का मौका देती है, जबकि रवींद्र जडेजा (जिन्हें उन्होंने 'जड्डू' कहा) बल्ले और गेंद दोनों से अपनी उपयोगिता साबित करते रहे हैं। बहुतुले के अनुसार, 'पिछले छह महीनों में एक गेंदबाज के तौर पर उन्होंने निश्चित रूप से सुधार किया है।'
सीरीज का हाल और आगे की राह
भारत तीन मुकाबलों की इस सीरीज में 1-0 से आगे है और बुधवार को गुवाहाटी में सीरीज अपने नाम करने का मौका सामने है। गौरतलब है कि विश्व कप से पहले हर वनडे मैच टीम संयोजन और खिलाड़ियों के चयन के लिहाज से निर्णायक होता जा रहा है। कोचिंग स्टाफ का ध्यान न केवल जीत पर, बल्कि युवा खिलाड़ियों के विकास और रोल-स्पेसिफिक प्रदर्शन पर भी टिका है।