वनडे वर्ल्ड कप 2027: टीम इंडिया के सामने बैकअप ओपनर, मिडिल ऑर्डर और पेस अटैक के बड़े सवाल
सारांश
मुख्य बातें
वनडे विश्व कप 2027 का शेड्यूल घोषित हो चुका है और साउथ अफ्रीका, नामीबिया तथा जिम्बाब्वे की संयुक्त मेजबानी में यह मेगा टूर्नामेंट अगले साल खेला जाएगा। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 7 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगी। लेकिन टीम मैनेजमेंट और सिलेक्टर्स के सामने स्क्वॉड चयन को लेकर कई अनसुलझे सवाल खड़े हैं, जिनका हल वक्त रहते निकालना अनिवार्य है।
बैकअप ओपनर की कमी — सबसे बड़ी चुनौती
यह लगभग तय है कि विश्व कप में पारी का आगाज शुभमन गिल और रोहित शर्मा करेंगे। लेकिन यदि इनमें से कोई भी चोटिल हो जाता है, तो भारत के पास विश्वसनीय बैकअप ओपनर का अभाव साफ दिखता है। यशस्वी जायसवाल को लगातार वनडे दस्ते में शामिल किया जाता है, परंतु उन्हें मैदान पर उतरने का मौका मुश्किल से मिलता है।
जायसवाल ने अपने पूरे वनडे करियर में अब तक केवल 6 मैच खेले हैं, जबकि वर्ष 2026 में उन्हें मात्र 2 एकदिवसीय मुकाबलों में जगह मिली। हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ हुई वनडे सीरीज में भी उन्हें प्लेइंग XI में शामिल नहीं किया गया। यदि ईशान किशन को विकल्प माना जा रहा है, तो वह भी वर्ष 2026 में केवल 5 वनडे मैच खेल सके हैं — जो किसी भी तरह पर्याप्त अनुभव नहीं है।
मिडिल ऑर्डर का बिखरा हुआ ढाँचा
भारतीय मिडिल ऑर्डर की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। इंग्लैंड के खिलाफ हुई हालिया वनडे सीरीज में एक मैच में ईशान किशन नंबर चार पर उतरे, तो दूसरे में श्रेयस अय्यर को यही जिम्मेदारी दी गई। केएल राहुल की बल्लेबाजी पोजीशन भी बार-बार बदली जाती रही है, जो स्थिरता की कमी को दर्शाता है।
विश्व कप से पहले भारत के पास अब केवल 11 एकदिवसीय मैच और एशिया कप ही बचे हैं। इतने सीमित समय में मिडिल ऑर्डर का आदर्श संयोजन तय करना टीम मैनेजमेंट के लिए बड़ी परीक्षा होगी। लोअर ऑर्डर में भी चिंता बनी है — वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल का प्रदर्शन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका है।
विकेटकीपर की भूमिका पर सस्पेंस बरकरार
विश्व कप 2027 में विकेटकीपर की जिम्मेदारी कौन निभाएगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। केएल राहुल आमतौर पर वनडे में विकेटकीपिंग करते देखे गए हैं, लेकिन साउथ अफ्रीका की तेज और उछाल भरी पिचों पर उनकी कीपिंग चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। ऋषभ पंत को टीम से बाहर रखे जाने से यह संकेत मिलता है कि वह फिलहाल टीम की योजनाओं में फिट नहीं बैठ रहे। ईशान किशन को बतौर विकेटकीपर वनडे में पर्याप्त अवसर नहीं दिए गए हैं, जिससे यह भूमिका और भी अनिश्चित हो जाती है।
पेस अटैक — साउथ अफ्रीका के लिए सबसे जरूरी, सबसे कम तैयार
साउथ अफ्रीका की परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों की भूमिका निर्णायक मानी जाती है, लेकिन भारत के पेस अटैक की स्थिति भी साफ नहीं है। जसप्रीत बुमराह ने पिछले वनडे विश्व कप के बाद से अब तक केवल 2 एकदिवसीय मुकाबले खेले हैं और हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज से उन्हें बाहर रखा गया था।
प्रसिद्ध कृष्णा का बार-बार चोटिल होना चयनकर्ताओं के लिए सिरदर्द बना हुआ है। अर्शदीप सिंह टी20 में जितने प्रभावशाली हैं, वनडे में उतने कारगर नहीं दिखे। गुरनूर बरार को तीसरे तेज गेंदबाज के रूप में आजमाया जा रहा है, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल की सीरीज में वह काफी महंगे साबित हुए। हर्षित राणा भी चोटों से जूझते नजर आए हैं। बैकअप विकल्प के रूप में मोहम्मद सिराज और अंशुल कंबोज अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके हैं।
आगे का रास्ता — समय कम, चुनौतियाँ बड़ी
विश्व कप तक बचे सीमित मैचों में टीम इंडिया को न केवल सही संयोजन ढूंढना होगा, बल्कि खिलाड़ियों को उनकी भूमिकाओं में स्थापित भी करना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल के वर्षों में ICC टूर्नामेंटों में कई चूके हुए मौकों का बोझ उठाया है। सिलेक्टर्स और कोचिंग स्टाफ के लिए आने वाले महीने बेहद अहम साबित होंगे।