विधान सौध के बाहर बिखरे काग़ज़ — वकीलों के विरोध की निशानी

बेंगलुरु में विधान सौध के बाहर सड़क पर बिखरे काग़ज़ उस प्रदर्शन की गवाही दे रहे हैं, जो वकीलों ने कर्नाटक अधिवक्ता हिंसा निषेध अधिनियम, 2023 के सख़्त क्रियान्वयन की माँग को लेकर 3 नवंबर 2026 (मंगलवार) को किया। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु में विधान सौध के पास पुलिसकर्मी कड़ी सुरक्षा के बीच तैनात रहे, जब वकीलों ने कर्नाटक अधिवक्ता हिंसा निषेध अधिनियम, 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन की माँग को लेकर 3 नवंबर 2026 को प्रदर्शन किया। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

3 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के विधान सौध परिसर के निकट पुलिसकर्मी सतर्क पहरे पर तैनात रहे — वकीलों के प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल, एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु और अन्य वकील संगठनों के सदस्यों ने विधान सौध के निकट प्रदर्शन कर कर्नाटक अधिवक्ता हिंसा निषेध अधिनियम, 2023 के सख़्त क्रियान्वयन और वकीलों पर हिंसा के ज़िम्मेदारों के ख़िलाफ़ तत्काल कार्रवाई की माँग की। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

कर्नाटक के विभिन्न वकील संगठनों ने एकजुट होकर माँग की कि अधिवक्ताओं पर हुई हिंसा के दोषियों के विरुद्ध त्वरित न्यायिक कार्रवाई की जाए और कर्नाटक अधिवक्ता हिंसा निषेध अधिनियम, 2023 को ज़मीन पर उतारा जाए। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु के विधान सौध के पास बड़ी संख्या में वकील एकत्र हुए और कर्नाटक सरकार से अधिवक्ता हिंसा निषेध क़ानून को पूरी तरह लागू करने का जवाब माँगा। यह प्रदर्शन 3 नवंबर 2026 को हुआ। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

कर्नाटक अधिवक्ता हिंसा निषेध अधिनियम, 2023 वकीलों को पेशेगत हिंसा से बचाने के लिए बना था, लेकिन कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल के अनुसार इसका प्रभावी क्रियान्वयन अब तक नहीं हो सका — यही इस आंदोलन की जड़ है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल और एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु के नेतृत्व में 3 नवंबर 2026 को हुआ यह प्रदर्शन दर्शाता है कि अधिवक्ता सुरक्षा की माँग कर्नाटक में अनसुली नहीं छोड़ी जाएगी — जब तक क़ानून ज़मीन पर नहीं उतरता। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

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