अरालुलुसंद्र गाँव में दुग्ध संग्रह केंद्र पर काम करता किसान

बेंगलुरु दक्षिण के बिदादी स्थित अरालुलुसंद्र गाँव में एक किसान दुग्ध संग्रह एवं भंडारण केंद्र पर कार्यरत है — यह वही क्षेत्र है जहाँ किसान बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बिदादी के अरालुलुसंद्र गाँव में किसान दुग्ध संग्रह केंद्र पर काम करते हुए बिदादी टाउनशिप परियोजना हेतु प्रस्तावित कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। यह विरोध 17 जून 2026 को सामने आया। (राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु दक्षिण के बिदादी स्थित अरालुलुसंद्र गाँव में किसान नियमित डेयरी गतिविधियों के तहत पशुओं को चारा डाल रहे हैं। यहाँ के निवासी बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बिदादी के केम्पय्याना पाल्या गाँव में किसान एक पेड़ की छाँव में बैठे हैं। यहाँ के स्थानीय निवासी बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बिदादी के बन्निगेरे गाँव में एक महिला किसान धूप में मूँगफली सुखा रही है। यहाँ के किसान बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बिदादी के अरालुलुसंद्र गाँव में किसान रेशम उत्पादन (सेरीकल्चर) के कार्यों में लगे हैं। बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध के बीच यह दृश्य सामने आया। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु दक्षिण के बिदादी में अरालुलुसंद्र गाँव के किसान रेशम उत्पादन कार्यों में संलग्न हैं। बिदादी टाउनशिप परियोजना हेतु प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध के बीच यह उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बिदादी के केम्पय्याना पाल्या गाँव में एक महिला किसान अपनी कृषि भूमि पर काम कर रही है। बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए खेत अधिग्रहण के प्रस्ताव के विरोध में यहाँ के किसान एकजुट हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बिदादी के केम्पय्याना पाल्या गाँव में किसान कृषि भूमि पर काम कर रहे हैं। बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए प्रस्तावित खेत अधिग्रहण के विरोध में यहाँ के निवासी सक्रिय हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

रामनगर ज़िले के बिदादी में केम्पय्याना पाल्या गाँव के किसान अपनी ज़मीन पर खेती करते हुए बिदादी टाउनशिप परियोजना हेतु प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु दक्षिण ज़िले के बिदादी में केम्पय्याना पाल्या गाँव के किसान अपनी कृषि भूमि पर कार्यरत हैं। बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए खेत अधिग्रहण के प्रस्ताव से उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बिदादी के बन्निगेरे गाँव की कृषि भूमि पर नारियल और सागौन के पेड़ खड़े हैं। किसान बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए इस भूमि के प्रस्तावित अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बिदादी के बन्निगेरे गाँव में कृषि भूमि पर नारियल के पेड़ खड़े हैं। यहाँ के किसान बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए खेत अधिग्रहण के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु दक्षिण के बिदादी में बन्निगेरे गाँव की कृषि भूमि पर नारियल के पेड़ लहलहा रहे हैं। बिदादी टाउनशिप परियोजना के लिए इस खेत के अधिग्रहण के प्रस्ताव से किसान चिंतित हैं। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बैरमंगला झील मानसून के दौरान उफन रही है। एक समय 20 से अधिक गाँवों के लिए कृषि और आजीविका का अहम स्रोत रही यह झील अब वृषभावती नदी से बहने वाले अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरे के प्रदूषण से प्रभावित है। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

मानसून में उफनती बैरमंगला झील कभी 20 से अधिक गाँवों की कृषि और जीविका का आधार थी, लेकिन अब वृषभावती नदी के ज़रिए आने वाले अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट ने इसे प्रदूषित कर दिया है। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु दक्षिण में बैरमंगला झील मानसून में उफनती है, पर यह झील जो कभी 20 से अधिक गाँवों की कृषि एवं आजीविका की धुरी थी, आज वृषभावती नदी से आने वाले सीवेज और औद्योगिक कचरे के कारण प्रदूषित हो चुकी है। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु दक्षिण में एक किसान बैरमंगला झील के पास पशुओं को चरते देख रहा है। एक समय 20 से अधिक गाँवों की महत्वपूर्ण कृषि एवं आजीविका संसाधन रही यह झील वृषभावती नदी से बहने वाले अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरे के प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बेंगलुरु दक्षिण ज़िले में बैरमंगला झील के किनारे एक किसान पशुओं को चरते देख रहा है। वृषभावती नदी के ज़रिए आने वाले अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरे ने इस झील को गंभीर रूप से प्रदूषित कर दिया है, जिससे 20 से अधिक गाँवों की आजीविका खतरे में है। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

बैरमंगला झील के पास पशु चर रहे हैं। आसपास के गाँवों के लिए प्रमुख संसाधन होने के बावजूद यह झील अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक कचरे से गंभीर प्रदूषण का सामना कर रही है। (17 जून 2026, राष्ट्र प्रेस)

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