पुलिस ने रोका तिब्बती प्रदर्शनकारियों को, साल्ट लेक में बढ़ा तनाव

कोलकाता के साल्ट लेक स्थित चीनी कौंसुलेट के बाहर 13 जुलाई 2026 को पुलिसकर्मियों ने तिब्बती समुदाय के सदस्यों को आगे बढ़ने से रोका — ये लोग चीनी अधिकारियों द्वारा हाल ही में लागू किए गए जातीय कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

तिब्बती समुदाय के सदस्यों का कहना है कि चीनी अधिकारियों द्वारा हाल ही में लागू किया गया जातीय कानून उनकी पहचान, भाषा, धर्म और संस्कृति के लिए सीधा खतरा है — इसी के विरोध में 13 जुलाई 2026 को कोलकाता में प्रदर्शन हुआ। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

तिब्बती युवा कांग्रेस और तिब्बती महिला संघ के सदस्यों ने कोलकाता के साल्ट लेक में चीनी कौंसुलेट के बाहर 13 जुलाई 2026 को विरोध प्रदर्शन किया — पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

प्रदर्शनकारी तिब्बतियों का आरोप है कि चीन का नया जातीय कानून उनके मौलिक अधिकारों — भाषा, धर्म और सांस्कृतिक पहचान — को कमज़ोर करता है; 13 जुलाई 2026 को कोलकाता में पुलिस ने उन्हें कौंसुलेट तक जाने से रोका। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

कोलकाता के साल्ट लेक में चीनी कौंसुलेट के सामने 13 जुलाई 2026 को बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने तिब्बती प्रदर्शनकारियों को घेर लिया — प्रदर्शन चीन के कथित जातीय कानून के विरोध में था। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

चीनी कौंसुलेट, साल्ट लेक के बाहर 13 जुलाई 2026 को पुलिसकर्मी पहरे पर तैनात रहे जबकि तिब्बती समुदाय के सदस्य चीन के नए जातीय कानून के खिलाफ़ प्रदर्शन करते रहे। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

तिब्बती समुदाय के सदस्यों ने कोलकाता में चीनी कौंसुलेट के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि चीन का नया कानून उनकी भाषा और धर्म को कथित तौर पर निशाना बनाता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

कोलकाता के साल्ट लेक में 13 जुलाई 2026 को तिब्बती समुदाय ने चीनी कौंसुलेट के बाहर आंदोलन किया और चीन की जातीय नीति पर सवाल उठाए — प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह कानून उनकी सांस्कृतिक अस्मिता को मिटाने की कोशिश है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

तिब्बती समुदाय ने कोलकाता में चीनी कौंसुलेट के समक्ष प्रदर्शन कर चीन के कथित जातीय कानून का विरोध किया — उनका कहना है कि यह कानून तिब्बती लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

13 जुलाई 2026 को कोलकाता के साल्ट लेक में चीनी कौंसुलेट के बाहर तिब्बती समुदाय के सदस्यों ने प्रदर्शन किया — यह विरोध चीन द्वारा हाल ही में लागू किए गए जातीय कानून के विरुद्ध था जिसे वे अपनी पहचान के लिए खतरा मानते हैं। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

प्रदर्शनकारियों के अनुसार चीन का नया जातीय कानून तिब्बती संस्कृति, धर्म और भाषा पर सीधा हमला है — कोलकाता के साल्ट लेक में चीनी कौंसुलेट के बाहर हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में तिब्बती शामिल हुए। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

साल्ट लेक, कोलकाता में चीनी कौंसुलेट के बाहर तिब्बती समुदाय ने चीन की जातीय नीति को खुली चुनौती दी — प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नया कानून तिब्बती लोगों के मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन करता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

तिब्बती युवा कांग्रेस और तिब्बती महिला संघ सहित तिब्बती समुदाय के विभिन्न संगठन 13 जुलाई 2026 को कोलकाता में एकजुट हुए और चीन के कथित जातीय कानून के खिलाफ़ एक सुर में आवाज़ उठाई। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

कोलकाता के साल्ट लेक में चीनी कौंसुलेट के सामने 13 जुलाई 2026 को तिब्बती समुदाय ने धरना दिया — पुलिस बल बड़ी संख्या में मुस्तैद रहा ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

कोलकाता से तिब्बती समुदाय ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया — 13 जुलाई 2026 को चीनी कौंसुलेट के बाहर हुए प्रदर्शन में उन्होंने नए जातीय कानून को तिब्बती अस्मिता पर हमला बताया और इसे वापस लेने की माँग की। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

तिब्बती प्रदर्शनकारियों ने कोलकाता में चीनी कौंसुलेट के बाहर चीन के हाल ही में लागू जातीय कानून के विरोध में आवाज़ उठाई — उनका कहना है कि यह कानून तिब्बती लोगों की पहचान और मौलिक अधिकारों को खतरे में डालता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

कोलकाता के साल्ट लेक स्थित चीनी कौंसुलेट के बाहर 13 जुलाई 2026 को तिब्बती समुदाय ने चीन की जातीय नीति के खिलाफ़ आक्रोश जताया — प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नया कानून तिब्बती जनजीवन की हर परत को प्रभावित करता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/कुंतल चक्रवर्ती)

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