नागाँव में किसान पटसन से रेशा निकालते हुए

16 सितंबर 2026 को असम के नागाँव ज़िले में किसान सड़ी हुई पटसन की फ़सल से रेशा निकालते नज़र आए — यह प्रक्रिया पारंपरिक जूट खेती का अहम हिस्सा है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

असम के नागाँव ज़िले में 16 सितंबर 2026 को एक किसान सड़ी हुई पटसन की पौध से जूट रेशा निकालता दिखा — यह रेशा आगे बोरे, कालीन और पैकेजिंग सामग्री बनाने के काम आता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

नागाँव ज़िले में एक किसान पटसन की सड़ी हुई पौध को पानी में भिगोकर जूट रेशा अलग करता है — इस पारंपरिक तकनीक को 'रेटिंग' कहते हैं और यह उत्तर पूर्व भारत में सदियों से प्रचलित है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

असम के नागाँव ज़िले में 16 सितंबर 2026 को एक किसान रेशा निकालने से पहले पटसन के पौधों को धूप में सुखाता दिखा — सुखाने की यह प्रक्रिया गुणवत्तापूर्ण जूट रेशे के लिए ज़रूरी होती है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

असम के नागाँव ज़िले में पटसन की खेती हज़ारों किसान परिवारों की आजीविका का आधार है — 16 सितंबर 2026 को खिंची इन तस्वीरों में किसान जूट के पौधे सुखा रहे हैं, जो बाद में रेशे और उत्पादों में बदलेंगे। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)

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