मोदी जेटन की अफ्स्लुइटडिक बांध यात्रा — भारत नीदरलैंड्स जल साझेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 मई 2026 (रविवार) को नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ ऐतिहासिक अफ्स्लुइटडिक बांध का संयुक्त दौरा किया — यह यात्रा भारत नीदरलैंड्स जल प्रबंधन सहयोग को नई दिशा देने के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अफ्स्लुइटडिक बांध नीदरलैंड्स की उस टिकाऊ जल प्रबंधन विशेषज्ञता का प्रतीक है जिसे भारत अपनी तटीय परियोजनाओं — विशेषकर गुजरात की कल्पसर परियोजना — में अपनाना चाहता है।

गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना — जो खंभात की खाड़ी में एक विशाल मीठे पानी का जलाशय बनाने की योजना है — के लिए नीदरलैंड्स की डेल्टा इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

जलवायु अनुकूलन और टिकाऊ बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में भारत नीदरलैंड्स साझेदारी को प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से नई गति मिलने की उम्मीद है — दोनों देश समुद्र तटीय बाढ़ प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

भारत और नीदरलैंड्स के बीच द्विपक्षीय संबंध जल प्रबंधन से आगे — कृषि तकनीक, बंदरगाह विकास और अर्धचालक आपूर्ति श्रृंखला तक फैले हैं; प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा उस व्यापक साझेदारी को रेखांकित करती है।

नीदरलैंड्स की डेल्टा वर्क्स प्रणाली — जिसमें अफ्स्लुइटडिक जैसे बांध शामिल हैं — को वैश्विक स्तर पर बाढ़ नियंत्रण का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है; भारत इसी अनुभव को अपनी नदी तट और तटीय परियोजनाओं में लागू करने का इच्छुक है।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस यात्रा को जल कूटनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्शाया है — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रॉब जेटन ने 17 मई 2026 को अफ्स्लुइटडिक बांध का संयुक्त निरीक्षण किया।

17 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा में अफ्स्लुइटडिक बांध का दौरा केंद्रबिंदु रहा — यह यात्रा दोनों देशों के बीच जल, कृषि और प्रौद्योगिकी सहयोग की दिशा में एक ठोस कदम के रूप में देखी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के बाद भारत नीदरलैंड्स जल प्रबंधन सहयोग में नई परियोजनाओं की घोषणा की संभावना है — विशेषकर कल्पसर परियोजना और तटीय बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में डच तकनीकी सहायता को लेकर।

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