जंतर मंतर पर असम की महिला प्रदर्शनकारी

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अगस्त 2026 को एक महिला प्रदर्शनकारी ने 'हम छठी अनुसूची चाहते हैं' लिखी तख्ती थामी, जबकि अन्य असम के लोगों ने 'ARWC ज़िंदाबाद' और 'छठी अनुसूची नहीं तो चैन नहीं' के बैनर लेकर भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में असम को शामिल करने की माँग की। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/क़मर सिब्तैन)

असम के प्रदर्शनकारियों ने जंतर मंतर पर 'इंक़लाब ज़िंदाबाद', 'ARWC ज़िंदाबाद', 'छठी अनुसूची नहीं तो चैन नहीं' और असमिया भाषा में संदेश वाली तख्तियाँ उठाईं — 10 अगस्त 2026 को भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में असम को शामिल करने की माँग के साथ। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/क़मर सिब्तैन)

असम से आए प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली के जंतर मंतर पर तख्तियाँ उठाकर माँग की कि भारतीय संविधान की छठी अनुसूची का विस्तार असम तक किया जाए, जिससे वहाँ की स्वदेशी जनजातियों को स्वायत्त परिषद और संरक्षण मिल सके। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/क़मर सिब्तैन)

ARWC के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने जंतर मंतर पर 'छठी अनुसूची नहीं तो चैन नहीं' का नारा बुलंद किया और असमिया भाषा में लिखे संदेश भी प्रदर्शित किए — 10 अगस्त 2026 को यह प्रदर्शन हुआ। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/क़मर सिब्तैन)

असम के प्रदर्शनकारियों ने जंतर मंतर पर असमिया भाषा के संदेशों के साथ-साथ 'इंक़लाब ज़िंदाबाद' और 'ARWC ज़िंदाबाद' की तख्तियाँ उठाईं — भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में असम को शामिल करने की यह माँग सोमवार, 10 अगस्त 2026 को उठाई गई। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/क़मर सिब्तैन)

असम के विभिन्न समूह 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर एकत्र हुए और 'इंक़लाब ज़िंदाबाद', 'ARWC ज़िंदाबाद', 'छठी अनुसूची नहीं तो चैन नहीं' तथा असमिया भाषा के संदेशों वाली तख्तियाँ लेकर भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में असम को शामिल करने की माँग की। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/क़मर सिब्तैन)

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