कश्मीरी गेट पर मातम: शिया श्रद्धालु का सीनाज़नी अनुष्ठान

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के निकट 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर आयोजित जुलूस में एक शिया मुसलमान ने 'मातम' (सीनाज़नी का शोक अनुष्ठान) अदा किया। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली में आशूरा के अवसर पर निकाले गए मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमान 'आलम' (इमाम हुसैन का पवित्र ध्वज प्रतीक) लेकर कश्मीरी गेट के पास से गुज़रे — 26 जून 2026, शुक्रवार। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमानों ने 'अज़ादारी' (इमाम हुसैन की शहादत का सामूहिक शोक) अदा की। यह परंपरा कर्बला की त्रासदी की स्मृति में सदियों से निभाई जाती है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के निकट आयोजित जुलूस में शिया मुसलमानों ने गहरे शोक और दुख का इज़हार किया — इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत की याद में। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमान छोटे बच्चों ने काला लिबास पहनकर शोक व्यक्त किया — यह परंपरा इमाम हुसैन की याद में पीढ़ी दर पीढ़ी निभाई जाती है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

26 जून 2026 को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास आयोजित मुहर्रम जुलूस में आशूरा के अवसर पर श्रद्धालुओं के हाथों में धारदार ज़ंजीरें (ब्लेडेड चेन) दिखीं — यह शोक अनुष्ठान का एक प्रतीकात्मक हिस्सा है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में 'ज़ुलजनाह' (Dhul Janah) — इमाम हुसैन के घोड़े का प्रतीकात्मक स्वरूप — प्रदर्शित किया गया। यह शिया परंपरा में कर्बला की याद का अहम हिस्सा है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026, शुक्रवार को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर आयोजित जुलूस में बड़ी संख्या में शिया मुसलमान शामिल हुए और इमाम हुसैन की शहादत का शोक मनाया। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली में 26 जून 2026 को आशूरा के अवसर पर कश्मीरी गेट के पास मुहर्रम जुलूस में एक शिया मुसलमान ने गहरे दुख और शोक का इज़हार किया — कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत की याद में। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

26 जून 2026 को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास आशूरा के मुहर्रम जुलूस में एक शिया मुसलमान बालिका काला लिबास पहने दिखी — काला रंग इमाम हुसैन के शोक का प्रतीक है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में काला लिबास पहने एक शिया बालिका ने शोक व्यक्त किया — यह दृश्य कर्बला की त्रासदी की सामूहिक स्मृति को दर्शाता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली में 26 जून 2026 को कश्मीरी गेट के पास आशूरा के मुहर्रम जुलूस में एक शिया मुसलमान ने 'मातम' — सीने पर हाथ मारने का शोक अनुष्ठान — अदा किया। यह अनुष्ठान इमाम हुसैन की शहादत के प्रति शोक का प्रतीक है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

आशूरा (मुहर्रम की 10वीं तारीख़) पर नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास निकाले गए जुलूस में एक शिया मुसलमान ने 'मातम' का अनुष्ठान अदा किया — 26 जून 2026, शुक्रवार। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमानों ने सामूहिक रूप से 'मातम' (सीनाज़नी का शोक अनुष्ठान) अदा किया — इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत की याद में। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास जुलूस में शिया मुसलमानों ने 'मातम' अदा किया — यह वार्षिक धार्मिक अनुष्ठान इमाम हुसैन की स्मृति में सदियों से जारी है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली में 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में कश्मीरी गेट के पास एक शिया मुसलमान ने दुख और शोक का गहरा इज़हार किया — यह भावना कर्बला की त्रासदी की सामूहिक पीड़ा को दर्शाती है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

26 जून 2026, शुक्रवार को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास आशूरा पर आयोजित मुहर्रम जुलूस में एक शिया मुसलमान ने गहरे शोक का इज़हार किया — इमाम हुसैन की शहादत की याद में यह भावनात्मक अभिव्यक्ति शिया परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर आयोजित जुलूस में एक शिया महिला शामिल हुई — महिलाएँ भी इस शोक परंपरा में सक्रिय भागीदारी निभाती हैं। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमान 'ताज़िया' (तज़िया) — इमाम हुसैन के मज़ार की लघु प्रतिकृति — लेकर चले। यह परंपरा भारतीय उपमहाद्वीप में शिया शोक संस्कृति की विशिष्ट पहचान है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमान 'आलम' (इमाम हुसैन का पवित्र ध्वज प्रतीक) उठाए हुए थे — यह प्रतीक कर्बला में शहीदों की याद में उठाया जाता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

26 जून 2026 को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर शिया मुसलमान जुलूस में शामिल हुए — यह वार्षिक जुलूस राजधानी में शिया समुदाय की आस्था और एकजुटता का प्रतीक है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में बच्चे धारदार ज़ंजीरें लेकर चले — यह दृश्य शिया शोक परंपरा में अगली पीढ़ी की भागीदारी को दर्शाता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के अवसर पर मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमानों ने 'अज़ादारी' अदा की — यह सामूहिक शोक अनुष्ठान इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को समर्पित है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

26 जून 2026, शुक्रवार को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास मुहर्रम जुलूस में 'अज़ादारी' करते शिया मुसलमान — यह धार्मिक जमावड़ा हर साल आशूरा पर राजधानी में आयोजित होता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

आशूरा पर नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमानों की 'अज़ादारी' — 26 जून 2026 को यह दृश्य शिया आस्था की गहराई और इमाम हुसैन के प्रति अटूट श्रद्धा को उजागर करता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमानों ने सामूहिक 'मातम' (सीने पर हाथ मारने का शोक अनुष्ठान) अदा किया — यह अनुष्ठान कर्बला की त्रासदी की याद में है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास जुलूस में शिया मुसलमानों ने 'मातम' अदा किया — 26 जून 2026 को यह शोक अनुष्ठान इमाम हुसैन की याद में हज़ारों श्रद्धालुओं ने मिलकर निभाया। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

26 जून 2026 को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास आशूरा के मुहर्रम जुलूस में एक शिया मुसलमान 'आलम' (इमाम हुसैन का पवित्र ध्वज प्रतीक) थामे हुए था — यह प्रतीक कर्बला के शहीदों की स्मृति का प्रतिनिधित्व करता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमानों ने 'ज़ुलजनाह' (Dhul Janah) परंपरा अदा की — यह अनुष्ठान इमाम हुसैन के घोड़े की कर्बला में भूमिका की याद में है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा पर मुहर्रम जुलूस में एक शिया मुसलमान ने 'मातम' का शोक अनुष्ठान अदा किया — सीने पर हाथ मारने की यह परंपरा इमाम हुसैन की शहादत के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर आयोजित जुलूस में एक शिया महिला शामिल हुई — इमाम हुसैन की याद में आयोजित इस जुलूस में महिलाओं की उपस्थिति शिया परंपरा का अहम हिस्सा है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

26 जून 2026, शुक्रवार को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास आशूरा के मुहर्रम जुलूस में एक शिया महिला नज़र आई — यह जुलूस इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत की याद में हर साल आयोजित होता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

आशूरा (मुहर्रम की 10वीं तारीख़) पर नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास जुलूस में एक शिया महिला26 जून 2026, शुक्रवार। शिया मुसलमान इस दिन इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को आशूरा के मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमान 'आलम' उठाए हुए जुलूस में शामिल हुए — 'आलम' इमाम हुसैन के पवित्र ध्वज का प्रतीक है जो कर्बला की याद में उठाया जाता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

26 जून 2026 को नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास आशूरा के मुहर्रम जुलूस में शिया मुसलमानों ने 'मातम' अदा किया — सीने पर हाथ मारने का यह शोक अनुष्ठान इमाम हुसैन की 61 हिजरी में कर्बला में शहादत की याद में है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

नई दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर जुलूस में शिया मुसलमानों ने 'मातम' अदा किया — यह शोक अनुष्ठान इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला में शहादत की चिरस्थायी याद में हर साल निभाया जाता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/दीपक कुमार)

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