धूल के बादल में बाइकर — मदापत्ना खदान की हकीकत

2 जुलाई 2026 को कर्नाटक के बेंगलुरु दक्षिण तालुक के मदापत्ना गाँव में पत्थर खनन से उठे धूल के गुबार के बीच एक बाइकर गुज़रता दिखा। खदान संचालन से होने वाले धूल प्रदूषण ने स्थानीय पर्यावरण और दैनिक जीवन पर गंभीर असर को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

2 जुलाई 2026 को मदापत्ना गाँव में पत्थर क्रशिंग का काम बदस्तूर जारी रहा, जबकि पास की कावेरी क्रशर स्टोन खदान में हुए घातक बोल्डर हादसे के बाद पूरे क्षेत्र की खनन गतिविधियाँ नए सिरे से जाँच के दायरे में आ गई हैं। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

बेंगलुरु दक्षिण तालुक के मदापत्ना में 2 जुलाई 2026 को पत्थर क्रशिंग कार्य जारी रहा। कावेरी क्रशर में हुए घातक बोल्डर हादसे के बाद इस पूरे क्षेत्र की खनन पद्धतियाँ कथित तौर पर नए सिरे से जाँच के घेरे में हैं। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

कर्नाटक में कावेरी क्रशर के पास हुए बोल्डर हादसे के मद्देनज़र मदापत्ना की खनन गतिविधियाँ अधिकारियों के अनुसार जाँच के दायरे में आ गई हैं। 2 जुलाई 2026 को भी यहाँ पत्थर क्रशिंग बिना रुके जारी रही। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

मदापत्ना की पत्थर खदानों में बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूर कार्यरत हैं, जो कावेरी क्रशर जैसे हादसों के बाद सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर सबसे अधिक जोखिम में हैं। 2 जुलाई 2026 को भी संचालन बिना रुके जारी रहा। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

कावेरी क्रशर स्टोन खदान में हुए घातक बोल्डर हादसे ने बेंगलुरु दक्षिण तालुक की समूची खनन पट्टी में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय अनुपालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2 जुलाई 2026 को भी पड़ोसी खदानों में काम जारी रहा। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

मदापत्ना गाँव के निवासी खदान संचालन से उठने वाले धूल और शोर के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। कावेरी क्रशर हादसे के बाद स्थानीय लोगों की चिंताएँ और बढ़ गई हैं, जबकि 2 जुलाई 2026 को भी क्रशिंग कार्य जारी रहा। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

अधिकारियों के अनुसार बेंगलुरु दक्षिण तालुक की खदानें कावेरी क्रशर हादसे के बाद नए सिरे से जाँच के घेरे में हैं। 2 जुलाई 2026 को भी मदापत्ना में पत्थर क्रशिंग संचालन जारी रहा, जो नियामक सवाल उठाता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

कर्नाटक में कावेरी क्रशर के घातक बोल्डर हादसे ने राज्य की खनन इकाइयों में औद्योगिक सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कथित तौर पर मदापत्ना सहित कई खदानें अब जाँच के दायरे में हैं। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

कावेरी क्रशर में घातक बोल्डर गिरने की घटना के बाद मदापत्ना गाँव और बेंगलुरु दक्षिण तालुक में पर्यावरण संरक्षण और खनन सुरक्षा की माँग तेज़ हो गई है। 2 जुलाई 2026 को भी यहाँ क्रशिंग गतिविधियाँ जारी रहीं। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस/धनंजय यादव)

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