परंपरागत वाद्य यंत्र बजाते आदिवासी
पुरुलिया के अजोध्या पहाड़ियों में एक व्यक्ति बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सेंद्रा उत्सव के दौरान परंपरागत वाद्य यंत्र बजाते हुए दिखे — यह आदिवासी शिकार पर्व पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण अंग है।
पुरुलिया के अजोध्या पहाड़ियों में एक व्यक्ति बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सेंद्रा उत्सव के दौरान परंपरागत वाद्य यंत्र बजाते हुए दिखे — यह आदिवासी शिकार पर्व पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण अंग है।
पुरुलिया जिले के अजोध्या पहाड़ियों में 1 मई 2026 को समुदाय के सदस्य सेंद्रा उत्सव के दौरान परंपरागत वाद्य बजाते दिखे — यह सामूहिक पर्व जनजातीय समुदायों की एकता और सांस्कृतिक सजीवता को प्रदर्शित करता है।
पुरुलिया के अजोध्या पहाड़ियों में आदिवासी समुदाय सेंद्रा उत्सव के दौरान परंपरागत भाले ढोते दिखे — ये शिकार के हथियार जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं का प्रतीक हैं।
पुरुलिया जिले के अजोध्या पहाड़ियों में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर एक व्यक्ति परंपरागत बनाम (धनुष-बाण) ढोते दिखे — यह आदिवासी शिकार संस्कृति का एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को जीवंत रखता है।