जॉनसन मार्केट में मातम — आशूरा पर मर्सिया और मातमदारी
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 (शुक्रवार) को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर एक शिया मुसलमान ने शोक अनुष्ठान के तहत स्वयं को ज़ंजीर मारते हुए मातम अदा किया। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 (शुक्रवार) को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर एक शिया मुसलमान ने शोक अनुष्ठान के तहत स्वयं को ज़ंजीर मारते हुए मातम अदा किया। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को आशूरा जुलूस के दौरान शिया मुसलमानों ने 'आशूरा ध्वज' थामे शोक मनाया — यह ध्वज इमाम हुसैन इब्न अली की याद का प्रतीक माना जाता है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ पर शिया मुसलमानों ने शोक अनुष्ठान के रूप में ज़ंजीरज़नी की — यह परंपरा कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन की शहादत के ग़म में अदा की जाती है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को आशूरा जुलूस के दौरान एक शिया मुसलमान शोक अनुष्ठान में रक्तस्राव के बाद दर्द और ग़म का इज़हार करते दिखे — यह दृश्य मुहर्रम की 10वीं तारीख़ की मातमदारी का हिस्सा है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) के जुलूस में छोटे शिया बच्चे भी शामिल हुए — परिवारों ने नई पीढ़ी को इमाम हुसैन की शहादत की याद से जोड़ा। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को आशूरा जुलूस के दौरान शिया मुसलमानों ने 'अलम' (धार्मिक ध्वजदंड) उठाया — यह 'अलम' कर्बला के शहीदों की याद का पवित्र प्रतीक है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को आशूरा जुलूस के दौरान एक शिया मुस्लिम बच्चे ने रक्तस्राव के बाद शोक व्यक्त किया — मुहर्रम की 10वीं तारीख़ की यह तस्वीर भावनात्मक रूप से मार्मिक है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) के जुलूस में एक शिया मुस्लिम बच्चे ने ब्लेड युक्त ज़ंजीर से मातम अदा किया — यह शोक परंपरा इमाम हुसैन इब्न अली की शहादत की याद में निभाई जाती है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को आशूरा जुलूस के दौरान शिया मुस्लिम बच्चों ने 'मातम' (सीना ज़नी) अदा की — यह रस्म मुहर्रम की 10वीं तारीख़ पर कर्बला के शहीदों के शोक में निभाई जाती है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) के जुलूस में एक शिया मुस्लिम बच्चे ने 'मातम' (सीना ज़नी) की — इमाम हुसैन की शहादत की याद में यह दृश्य गहरे जज़्बात का प्रतीक है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)
बेंगलुरु के जॉनसन मार्केट में 26 जून 2026 को मुहर्रम की 10वीं तारीख़ (आशूरा) पर शिया मुसलमानों ने 'अज़ादारी' अदा की — यह सामूहिक शोक परंपरा कर्बला की लड़ाई में इमाम हुसैन इब्न अली की शहादत को समर्पित है। (फ़ोटो: राष्ट्र प्रेस)