क्या अहमदाबाद में उज्जैन महाकाल मंदिर का अद्वितीय प्रतिरूप है, जहां रोजाना भस्म आरती और शृंगार होता है?
सारांश
Key Takeaways
- महाकाल मंदिर की भस्म आरती सुबह चार बजे से होती है।
- यह मंदिर उज्जैन मंदिर का प्रतिरूप है।
- मंदिर में भगवान शिव महाकाल स्वरूप में विराजमान हैं।
- यह स्थान आस्था और शिव-ऊर्जा का केंद्र है।
- आरतियों में भक्तों की भारी भीड़ होती है।
नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उज्जैन में स्थित बाबा महाकाल को समय का देवता माना जाता है। यह कहा जाता है कि बाबा समय के अधीन नहीं हैं, बल्कि समय बाबा के अनुसार चलता है। लेकिन हर भक्त को उज्जैन जाने का सौभाग्य नहीं मिल पाता।
जो भक्त उज्जैन जाकर बाबा महाकाल के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं, वे अहमदाबाद में स्थित श्री महाकाल मंदिर में जाकर दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर का प्रतिरूप है, जहां रोजाना भस्म आरती से लेकर बाबा का अद्भुत शृंगार किया जाता है।
अहमदाबाद के अंबावाड़ी में स्थित यह महाकाल मंदिर एक आधुनिक आध्यात्मिक केंद्र है, और इसे प्रसिद्ध उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर की प्रतिकृति के रूप में जाना जाता है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और शिव-ऊर्जा का जीवंत केंद्र है। ऐसा कहा जाता है कि सरदार नगर में विराजमान श्री महाकाल के दर्शन मात्र से मन की बेचैनी शांत हो जाती है। यहाँ वही सुकून मिलता है जो उज्जैन जाकर मिलता है। अहमदाबाद के लोग इसे गुजरात में एक छुपा हुआ शिव-धाम मानते हैं, जहां एक बार दर्शन करने से उज्जैन के दर्शन का फल मिलता है।
मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव महाकाल स्वरूप में विराजमान हैं, और उनका आकार तथा गर्भगृह का डिज़ाइन भी उज्जैन के मंदिर के जैसा है। यहां मां पार्वती, भैरव, हनुमान, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं भी देखने को मिलती हैं। मंदिर के बाहरी आवरण को उज्जैन मंदिर की तरह ही बनाने की कोशिश की गई है, जिसमें शिखर की ऊंचाई और बनावट एक जैसी लगती है।
यह मंदिर अपने शांत और पवित्र वातावरण के साथ, भक्तों को मूल मंदिर का प्रामाणिक अनुभव प्रदान करता है। हालांकि इसकी कोई विशिष्ट ऐतिहासिक जड़ें नहीं हैं, फिर भी यह शिव भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
मंदिर में सुबह से लेकर शाम तक चार आरतियाँ होती हैं, और सुबह की शुरुआत भस्म आरती से होती है। हर दिन पूरी भक्ति से बाबा का अद्भुत शृंगार किया जाता है। पहली भस्म आरती सुबह चार बजे से छह बजे तक होती है, जबकि दूसरी नैवेद्य आरती सुबह दस से ग्यारह बजे के बीच होती है। संध्या आरती शाम छह बजे और शयन आरती रात दस बजे होती है। चारों आरतियों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। शिवरात्रि और सावन के महीने में भक्तों की संख्या हजारों में पहुँच जाती है।