क्या अलवर में शादी उत्सव बन गई? दूल्हा हेलीकॉप्टर से दुल्हन लेने आया!
सारांश
Key Takeaways
- अलवर में हेलीकॉप्टर से शादी की अनोखी परंपरा।
- दूल्हा-दुल्हन के परिवारों में खुशी का माहौल।
- समुदाय के लिए गर्व का क्षण।
- युवाओं के लिए प्रेरणा।
- सांस्कृतिक विविधता का उत्सव।
अलवर, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत की मुंडेर पर खड़ी वह लड़की आसमान की ओर देखते हुए खुद से पूछ रही है, "कब आएगा मेरा दूल्हा राजा?" आसमान की ओर इसलिए, क्योंकि हर दूल्हे के समान उसका दूल्हा किसी गाड़ी या रेलगाड़ी से नहीं, बल्कि हेलीकॉप्टर से आ रहा है। इस स्थिति में उसकी आतुरता का चरम पर होना स्वाभाविक है।
यह उत्साह अगर दुल्हन तक सीमित होता, तो शायद आज यह चर्चा का विषय नहीं बनता। यह उत्साह अब राजस्थान के अलवर के हर व्यक्ति में है। हर कोई उस पल का इंतजार कर रहा है, जब दूल्हा अपनी दुल्हन को हेलीकॉप्टर से लेने आएगा। इस दृश्य का गवाह बनने के लिए शादी स्थल पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए हैं।
दूल्हे कृष्ण की बात करें, तो वह हेलीकॉप्टर लेकर अपनी दुल्हन को लेने के लिए निकल चुका है, सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। हेलीकॉप्टर में चढ़ने से पहले दूल्हे से जुड़े खास पलों को तस्वीरों में कैद किया गया है, ताकि भविष्य में जब वह अपनी शादी के संस्मरणों को याद करे, तो इन तस्वीरों को देखकर सुखद अनुभव का एहसास कर सके।
दूल्हे के पिता मुकेश ने इस पल को अपनी जिंदगी का खास पल बताया। उन्होंने कहा कि दूल्हे के दादा की ख्वाहिश थी कि जब उनके पोते की शादी हो, तो वह किसी गाड़ी या रेलगाड़ी से नहीं, बल्कि हेलीकॉप्टर से अपनी दुल्हन को ले जाए। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैंने पहले ही तय कर लिया था कि जब भी अपने बेटे की शादी करूंगा, उस दिन ऐसी व्यवस्था करूंगा कि वह हेलीकॉप्टर से अपनी दुल्हन को ले जाए। आज यह मेरी जिंदगी का सबसे खास पल है। मैं सच में बहुत खुश हूं।
दूल्हे के पिता ने बताया कि अभी मेरे बेटे की पढ़ाई चल रही है और दुल्हन भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है। मैं खुद ठेकेदार हूं, जबकि दुल्हन के पिता व्यापारी हैं। इस खास मौके पर दोनों परिवारों में खुशी का माहौल है।