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महाराष्ट्र सरकार का 2037 तक इलेक्ट्रिक बस बेड़े का संकल्प: 22,000 बसों का लक्ष्य

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महाराष्ट्र सरकार का 2037 तक इलेक्ट्रिक बस बेड़े का संकल्प: 22,000 बसों का लक्ष्य

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने 2037 तक अपने 22,000 बसों के बेड़े को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बनाने का संकल्प लिया है। यह राज्य की ईवी नीति और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र 2037 तक अपने 22,000 बसों को इलेक्ट्रिक बनाएगा।
800 बसें पहले से ही इलेक्ट्रिक हैं।
सरकार सौर ऊर्जा का उपयोग चार्जिंग स्टेशनों के लिए करेगी।
ईवी नीति 2026 में टैक्स में छूट दी जा रही है।
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का सबसे बड़ा बेड़ा है।

मुंबई, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस) परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने सोमवार का दिन विधान परिषद में यह जानकारी दी कि महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) का लक्ष्य है कि वह २०३७ तक अपनी २२ हजार बसों के पूरे बेड़े को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित कर दे।

सरनाइक ने बताया कि इस पहल के माध्यम से महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन जाएगा जिसने अपने सरकारी बस नेटवर्क को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का संकल्प लिया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में २२ हजार बसों में से लगभग ८०० बसें इलेक्ट्रिक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का यह दृष्टिकोण है कि २०४७ तक भारत पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (विद्युत-आधारित परिवहन) की ओर अग्रसर हो जाएगा।

इसी दिशा में, महाराष्ट्र ने यह ठान लिया है कि २०३७ तक एमएसआरटीसी का पूरा बेड़ा पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि पहले अगले पांच वर्षों में हर साल ५ हजार डीजल बसें खरीदने की योजना थी, लेकिन अब इस रणनीति में पूरी तरह से बदलाव किया गया है।

उन्होंने बताया कि जिन ८ हजार डीजल बसों पर काम चल रहा है, उनके अलावा भविष्य में शामिल होने वाली सभी बसें इलेक्ट्रिक होंगी। इसके साथ ही, डीजल बसों को ईवी में परिवर्तित करने के लिए एक योजना भी बनाई गई है। सरनाइक ने बताया कि चार्जिंग स्टेशनों के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने की योजना है, जिससे बिजली की बचत होगी और पर्यावरण को लाभ मिलेगा। राज्य सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों को चलाने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे पारंपरिक पावर ग्रिड पर निर्भरता कम होगी।

मंत्री ने बताया कि राज्य की 'ईवी नीति २०२६' के तहत ईवी खरीदने पर कई आर्थिक लाभ दिए जा रहे हैं, जिनमें टैक्स में छूट और टोल में रियायतें शामिल हैं। वर्तमान में, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग और अटल सेतु (एमटीएचएल) जैसे प्रमुख मार्गों पर ईवी को टोल में पूरी तरह से छूट दी जा रही है। राज्य सरकार प्रत्येक २५ किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग स्टेशन विकसित कर रही है, आर्थिक लाभ प्रदान कर रही है, और चार्जिंग तकनीक से जुड़े पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है।

अभी, दिल्ली के पास भारत में इलेक्ट्रिक बसों का सबसे बड़ा बेड़ा है, जिसमें ४,२०० से अधिक ईवी शामिल हैं। अपनी ईवी नीति के तहत, दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि २०२६ के अंत तक उसके इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार ७,५०० तक पहुंचे और २०२८ तक यह संख्या १४ हजार हो जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। सरकार का यह निर्णय पर्यावरण की रक्षा और ऊर्जा की बचत के लिए महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों की योजना कब शुरू की?
महाराष्ट्र सरकार ने 2037 तक अपने 22,000 बसों के बेड़े को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बनाने की योजना बनाई है।
कितनी बसें वर्तमान में इलेक्ट्रिक हैं?
वर्तमान में महाराष्ट्र में लगभग 800 बसें इलेक्ट्रिक हैं।
सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों के लिए कौन सी ऊर्जा का उपयोग करने की योजना बनाई है?
सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने की योजना बनाई है।
ईवी नीति 2026 में क्या लाभ दिए जा रहे हैं?
ईवी नीति 2026 के तहत टैक्स में छूट और टोल में रियायतें दी जा रही हैं।
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का कितना बड़ा बेड़ा है?
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा 4,200 से अधिक है।
राष्ट्र प्रेस
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