बच्चू कडू की 'जीवित समाधि' पर शिवसेना (UBT) का हमला, शिंदे गुट में शामिल होने को बताया राजनीतिक अवसरवाद

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बच्चू कडू की 'जीवित समाधि' पर शिवसेना (UBT) का हमला, शिंदे गुट में शामिल होने को बताया राजनीतिक अवसरवाद

मुंबई में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शनिवार, 3 मई 2025 को अपने मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक तीखे संपादकीय के ज़रिए पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री बच्चू कडू की तथाकथित "जीवित समाधि" को राजनीतिक दिखावा करार दिया। पार्टी ने कडू के हाल ही में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने और उसके तुरंत बाद विधान परिषद के लिए नामांकन पाने को समाज सेवा की आड़ में किया गया राजनीतिक अवसरवाद बताया।

समाधि समारोह और विधान परिषद नामांकन

ठाकरे गुट के संपादकीय के अनुसार, "समाधि समारोह" में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उनके समर्थक और बच्चू कडू स्वयं शामिल हुए। इस प्रतीकात्मक कार्यक्रम के कुछ ही समय बाद शिंदे ने कडू को विधान परिषद के लिए नामित कर दिया। पार्टी का आरोप है कि अपनी विधानसभा सीट गंवाने के बाद राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में चल रहे कडू के लिए यह नामांकन एक जीवनरेखा की तरह आया।

कडू का राजनीतिक सफर: सामाजिक कार्यकर्ता से पेशेवर राजनेता तक

संपादकीय में कडू के राजनीतिक इतिहास को विस्तार से रेखांकित किया गया है। वे मूल रूप से शिवसेना से जुड़े थे, लेकिन जब उन्हें चुनाव लड़ने का टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने पार्टी छोड़कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। बाद में उन्होंने उद्धव ठाकरे के मंत्रिमंडल में मंत्री पद भी संभाला। गौरतलब है कि 2022 की बगावत के दौरान वे पक्ष बदलकर सूरत, गुवाहाटी और गोवा की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो गए। नई सरकार में मंत्री पद न मिलने पर उन्होंने फिर विरोध का रास्ता अपनाया, और अंततः जब उनकी विधायक सीट खतरे में पड़ी, तो वे शिंदे गुट में जा मिले।

कडू के अपने बयान से विरोधाभास

शिवसेना (UBT) ने संपादकीय में कडू के एक पुराने बयान का हवाला देकर उनके हालिया कदम पर तीखा व्यंग्य किया। शिंदे गुट में शामिल होने से कुछ दिन पहले ही कडू ने सार्वजनिक रूप से कहा था,

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