पुलवामा में आतंकी सहयोगी गिरफ्तार: पिस्तौल, हैंड ग्रेनेड और कारतूस बरामद, UAPA के तहत मामला दर्ज

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पुलवामा में आतंकी सहयोगी गिरफ्तार: पिस्तौल, हैंड ग्रेनेड और कारतूस बरामद, UAPA के तहत मामला दर्ज

सारांश

पुलवामा के राजपोरा में सेना, सीआरपीएफ और पुलिस के संयुक्त अभियान में आतंकी सहयोगी मोहम्मद उमर मलिक को दबोचा गया। उसके पास से पिस्तौल, हैंड ग्रेनेड और कारतूस बरामद हुए। यह गिरफ्तारी जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पूरे सपोर्ट सिस्टम को निशाना बनाने की बदली रणनीति का हिस्सा है।

Key Takeaways

मोहम्मद उमर मलिक , पुलवामा के काचीपोरा कस्बेयार का निवासी, 2 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया। बरामदगी में एक पिस्तौल , एक मैगजीन , दो कारतूस और दो हैंड ग्रेनेड शामिल। सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स , सीआरपीएफ की 183 बटालियन और पुलवामा पुलिस का संयुक्त अभियान। राजपोरा पुलिस स्टेशन में आर्म्स एक्ट और यूएपीए के तहत मामला दर्ज। सुरक्षा बल OGW, हवाला नेटवर्क और नशा तस्करों को भी आतंकी सपोर्ट सिस्टम के रूप में निशाना बना रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सुरक्षा बलों के एक संयुक्त अभियान के दौरान 2 मई 2026 को एक आतंकी सहयोगी को गिरफ्तार किया गया और उसके ठिकाने से हथियारों व गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया गया। राजपोरा इलाके में चलाए गए इस अभियान में सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ की 183 बटालियन और पुलवामा पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की।

गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण

गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद उमर मलिक के रूप में हुई है, जो पुलवामा जिले के काचीपोरा कस्बेयार का निवासी है। पुलिस के अनुसार, उसके ठिकाने की तलाशी के दौरान एक पिस्तौल, एक मैगजीन, दो कारतूस और दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए। यह सामग्री आतंकी नेटवर्क को आपूर्ति के लिए रखी गई थी, ऐसा अधिकारियों का मानना है।

कानूनी कार्रवाई

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राजपोरा पुलिस स्टेशन में आर्म्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। अधिकारी ने यह भी कहा कि आगे की जाँच जारी है और अन्य संदिग्ध कड़ियों की पड़ताल की जा रही है।

आतंकवाद के सपोर्ट सिस्टम पर निशाना

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने हाल के महीनों में अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब केवल हथियारबंद आतंकवादियों तक सीमित रहने के बजाय, सुरक्षा बल आतंकवाद के पूरे सपोर्ट सिस्टम को निशाना बना रहे हैं — जिसमें ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW), हमदर्द और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने वाले शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र शासित प्रदेश में आतंकी घटनाओं को कमज़ोर करने के लिए बहुस्तरीय दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है।

हवाला और नशे के नेटवर्क पर भी नज़र

अधिकारियों के अनुसार, नशीले पदार्थों के तस्कर, विक्रेता और हवाला मनी रैकेट में शामिल व्यक्ति भी सुरक्षा बलों की निगरानी में हैं। माना जाता है कि इन गैरकानूनी गतिविधियों से जुटाया गया धन अंततः जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

सीमा पर सुरक्षा का दायरा

जम्मू-कश्मीर में 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा (LOC) और 240 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) है। सेना LOC पर और सीमा सुरक्षा बल (BSF) IB पर निरंतर अभियान चला रहे हैं, जबकि पुलिस और अर्धसैनिक बल अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयाँ जारी रखे हुए हैं। इस बहुस्तरीय घेरेबंदी से आतंकी नेटवर्क पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

Point of View

हवाला चैनल और नशा तस्करी — ये तीनों आतंकवाद की जड़ों को सींचते हैं, और इन पर एक साथ प्रहार करना अधिक टिकाऊ परिणाम दे सकता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि यूएपीए जैसे कड़े कानूनों के दुरुपयोग की आशंका भी बनी रहती है, इसलिए जाँच की पारदर्शिता ज़रूरी है। असली कसौटी यह होगी कि क्या ये गिरफ्तारियाँ अदालत में टिकती हैं और नेटवर्क को वास्तविक नुकसान पहुँचाती हैं।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

पुलवामा में गिरफ्तार आतंकी सहयोगी कौन है?
गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान मोहम्मद उमर मलिक के रूप में हुई है, जो पुलवामा जिले के काचीपोरा कस्बेयार का निवासी है। पुलिस के अनुसार वह एक आतंकी सहयोगी (ओवरग्राउंड वर्कर) है जो हथियार आपूर्ति में संलिप्त था।
पुलवामा में क्या हथियार बरामद हुए?
बरामद हथियारों में एक पिस्तौल, एक मैगजीन, दो कारतूस और दो हैंड ग्रेनेड शामिल हैं। यह सामग्री मोहम्मद उमर मलिक के ठिकाने की तलाशी के दौरान मिली।
इस अभियान में कौन-कौन सी सुरक्षा एजेंसियाँ शामिल थीं?
यह अभियान सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स, सीआरपीएफ की 183 बटालियन और पुलवामा पुलिस ने संयुक्त रूप से राजपोरा इलाके में चलाया। तीनों एजेंसियों के समन्वय से यह कार्रवाई सफल रही।
आरोपी पर कौन-से कानूनी प्रावधान लगाए गए हैं?
राजपोरा पुलिस स्टेशन में आर्म्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। आगे की जाँच जारी है।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी रणनीति में क्या बदलाव आया है?
सुरक्षा बल अब केवल हथियारबंद आतंकवादियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि OGW, हवाला नेटवर्क और नशा तस्करों सहित पूरे आतंकी सपोर्ट सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। इस बदली रणनीति का उद्देश्य आतंकवाद की जड़ों को काटना है।
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