पाकिस्तान का एसएफजे को खुला समर्थन: कराची प्रेस क्लब से खालिस्तान जनमत संग्रह अभियान, भारत में दुष्प्रचार युद्ध की तैयारी
सारांश
कराची प्रेस क्लब से एसएफजे का खालिस्तान जनमत संग्रह अभियान — यह महज़ एक घोषणा नहीं, बल्कि पाकिस्तान की खुली संलिप्तता का प्रमाण है। भारतीय खुफिया एजेंसियाँ अब एआई-जनित फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया दुष्प्रचार से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।
मुख्य बातें
एसएफजे ने 29 अप्रैल 2026 को कराची प्रेस क्लब से भारत में खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए मतदाता पंजीकरण अभियान की घोषणा की।
एसएफजे प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया कि दुनिया भर में 18 लाख लोग पंजीकरण करा चुके हैं; भारतीय खुफिया अधिकारियों ने इन आँकड़ों को संदिग्ध बताया।
पंजीकरण गुरुद्वारों के माध्यम से होगा — पहले दिल्ली , फिर हिमाचल प्रदेश , हरियाणा और अंत में पंजाब ।
पंजाब पुलिस ने इसी सप्ताह आईएसआई और खालिस्तानी संगठनों की साजिश का खुलासा करते हुए आरडीएक्स, आरपीजी और ग्रेनेड बरामद किए।
एसएफजे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर फर्जी वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार फैलाने की योजना बना रहा है।
भारतीय खुफिया एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं और फर्जी अभियानों को वायरल होने से रोकने के लिए सक्रिय हैं।
नई दिल्ली — प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने 29 अप्रैल 2026 को कराची प्रेस क्लब से भारत में रहने वाले सिखों को लक्षित कर खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए मतदाता पंजीकरण अभियान की घोषणा की। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, इस घोषणा का स्थान स्वयं यह संकेत देता है कि पाकिस्तान का तंत्र एसएफजे को खुला समर्थन दे रहा है — और इसे छिपाने की भी कोशिश नहीं की जा रही।
कराची से अभियान: पाकिस्तानी संलिप्तता का संकेत
अधिकारियों का कहना है कि कराची प्रेस क्लब में एसएफजे को मंच देना यह स्पष्ट करता है कि आईएसआई खालिस्तान नैरेटिव को अपनी ज़मीन से आगे बढ़ाना चाहती है। एक अधिकारी ने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
इसलिए पाकिस्तान की ओर यह झुकाव रणनीतिक पुनर्स्थापन है। असली चिंता एआई-जनित दुष्प्रचार है — फर्जी वीडियो और डीपफेक जो पंजाब की स्थिति को विकृत रूप में पेश कर सकते हैं; यह पारंपरिक खुफिया निगरानी की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और व्यापक खतरा है। भारत की एजेंसियाँ जागरूक हैं, लेकिन सोशल मीडिया एल्गोरिदम और एन्क्रिप्टेड चैट ग्रुप इस लड़ाई को असमान बनाते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एसएफजे का खालिस्तान जनमत संग्रह अभियान क्या है?
एसएफजे ने 29 अप्रैल 2026 को कराची प्रेस क्लब से भारत में सिखों के लिए खालिस्तान जनमत संग्रह हेतु मतदाता पंजीकरण अभियान शुरू करने की घोषणा की। पंजीकरण गुरुद्वारों के माध्यम से दिल्ली से शुरू होकर हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब तक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
पाकिस्तान की इस मामले में क्या भूमिका है?
भारतीय अधिकारियों के अनुसार, कराची प्रेस क्लब में एसएफजे को मंच देना आईएसआई की खुली संलिप्तता का संकेत है। अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान यह खेल खुलेआम खेल रहा है और इसे छिपाने की कोशिश भी नहीं कर रहा।
गुरपतवंत सिंह पन्नू कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
गुरपतवंत सिंह पन्नू एसएफजे के प्रमुख हैं, जिन्हें भारत सरकार ने प्रतिबंधित घोषित किया है। एसएफजे ने भारतीय नेताओं की हत्या की माँग की है, जरनैल सिंह भिंडरावाले की प्रशंसा की है और एयर इंडिया के कनिष्क विमान हादसे को अंजाम देने वालों को नायक माना है।
पंजाब पुलिस ने हाल ही में क्या खुलासा किया?
पंजाब पुलिस ने इसी सप्ताह आईएसआई और खालिस्तानी संगठनों द्वारा रची गई एक साजिश का खुलासा किया, जिसमें आरडीएक्स, आरपीजी और ग्रेनेड बरामद किए गए। इनका उपयोग राज्यभर में बड़े हमलों के लिए किया जाना था।
भारतीय एजेंसियाँ एसएफजे के दुष्प्रचार से कैसे निपट रही हैं?
खुफिया एजेंसियाँ एसएफजे की सोशल मीडिया गतिविधियों, एन्क्रिप्टेड चैट ग्रुपों और एआई-जनित फर्जी वीडियो पर कड़ी नज़र रख रही हैं। एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर हैं ताकि ऐसे फर्जी अभियानों को वायरल होने से रोका जा सके।