इलाहाबाद हाईकोर्ट के खुले में नमाज फैसले पर सियासी बवाल, शिया बोर्ड और जामा मस्जिद ने दी प्रतिक्रिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर सियासी और धार्मिक बहस तेज हो गई है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति नमाज अदा करने पर रोक लगाने की बात कही गई थी। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPLB) के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने शनिवार, 3 मई 2025 को इस फैसले पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई, जबकि जामा मस्जिद लखनऊ के मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने फैसले को सभी धर्मों पर समान रूप से लागू करने की माँग की। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल बना हुआ है।
हाईकोर्ट का फैसला और उसकी पृष्ठभूमि
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के किसी भी सार्वजनिक स्थान पर नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए, ताकि अन्य नागरिकों के अधिकारों का हनन न हो। गौरतलब है कि यह फैसला सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के संतुलन की व्यापक बहस के बीच आया है। न्यायालय की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
शिया बोर्ड की आपत्ति
AISPLB के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि सार्वजनिक जगहों पर रोज़ाना नमाज नहीं पढ़ी जाती — यह आमतौर पर जुमे, ईद और बकरीद जैसे विशेष अवसरों पर ही होती है। उन्होंने दावा किया कि अदालत को इस मामले में