26 जून 2026
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कांकेर IED ब्लास्ट: DRG के 3 जवान शहीद, 1 गंभीर घायल — नक्सलमुक्त घोषणा के बाद पहला बड़ा विस्फोट

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कांकेर IED ब्लास्ट: DRG के 3 जवान शहीद, 1 गंभीर घायल — नक्सलमुक्त घोषणा के बाद पहला बड़ा विस्फोट

सारांश

31 मार्च को नक्सलमुक्त घोषित हुए छत्तीसगढ़ में 2 मई को कांकेर-नारायणपुर सीमा पर IED विस्फोट ने DRG के तीन जवानों — इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढपाले — की जान ले ली। यह घटना बताती है कि नक्सलवाद की 'कागज़ी समाप्ति' और ज़मीन पर बची बारूदी विरासत के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है।

मुख्य बातें

कांकेर-नारायणपुर सीमा पर 2 मई 2026 को IED विस्फोट में DRG के 3 जवान शहीद , 1 गंभीर घायल ।
शहीद जवान: इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी , कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढपाले ; घायल: कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा ।
टीम डी-माइनिंग और सर्च ऑपरेशन पर थी, IED निष्क्रिय करने के दौरान विस्फोट हुआ।
31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त घोषित किए जाने के बाद यह पहला बड़ा IED विस्फोट है।
बस्तर रेंज IG सुंदरराज पट्टिलिंगम के अनुसार, माओवादियों के सैकड़ों IED अब भी इलाके में मौजूद हैं।

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 2 मई 2026 को एक आईईडी (IED) विस्फोट में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के तीन जवान शहीद हो गए और एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा के निकट उस समय हुई जब सुरक्षाबलों की टीम डी-माइनिंग, एरिया डॉमिनेशन और सर्च ऑपरेशन पर निकली थी। उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ को आधिकारिक तौर पर नक्सलवाद से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यह पहला बड़ा विस्फोट है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

पुलिस के अनुसार, DRG की टीम इलाके में पहले से बिछाए गए आईईडी को खोजकर निष्क्रिय करने के अभियान पर थी। इसी दौरान एक IED अचानक विस्फोट की चपेट में आ गई, जिससे चार जवान बुरी तरह घायल हो गए। घटना शनिवार को हुई जब टीम एक संदिग्ध आईईडी को निष्क्रिय करने की कोशिश कर रही थी।

शहीद और घायल जवानों की पहचान

विस्फोट में इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढपाले को गंभीर चोटें आईं और वे घटनास्थल पर ही वीरगति को प्राप्त हुए। वहीं, कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा गंभीर रूप से घायल हुए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका उपचार जारी है।

बस्तर में IED का खतरा अब भी बरकरार

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से मिली जानकारी और अन्य खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षाबलों ने बस्तर क्षेत्र में बड़ी संख्या में आईईडी बरामद कर उन्हें निष्क्रिय किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि माओवादियों द्वारा पहले से छिपाकर रखे गए सैकड़ों आईईडी अब भी इलाके में मौजूद हैं और उन्हें खोजकर निष्क्रिय करने का अभियान लगातार जारी है।

गौरतलब है कि बस्तर क्षेत्र के घने जंगलों में माओवादियों द्वारा वर्षों पहले बिछाई गई बारूदी सुरंगें आज भी सुरक्षाबलों और स्थानीय नागरिकों के लिए जानलेवा खतरा बनी हुई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की घोषणा के बाद पुनर्निर्माण और विकास कार्यों में तेजी लाने की कोशिश कर रही है।

नक्सलमुक्त घोषणा के बाद पहला बड़ा झटका

31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ को आधिकारिक तौर पर नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया गया था। यह घटना उस घोषणा की व्यावहारिक चुनौतियों को उजागर करती है — कागज़ पर नक्सलवाद की समाप्ति और ज़मीन पर बची हुई बारूदी विरासत के बीच की खाई अब भी गहरी है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जाँच जारी है और घटना से जुड़ी अन्य जानकारी जुटाई जा रही है।

आगे क्या होगा

सुरक्षाबलों द्वारा प्रभावित क्षेत्र में व्यापक सर्च ऑपरेशन जारी रखने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बस्तर के जंगलों में दशकों से बिछाए गए सभी आईईडी निष्क्रिय नहीं किए जाते, तब तक जवानों और आम नागरिकों पर खतरा बना रहेगा। शहीद जवानों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से मुआवजे की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2 मई का कांकेर विस्फोट यह याद दिलाता है कि घोषणाएँ और ज़मीनी हकीकत अक्सर अलग-अलग होती हैं। बस्तर के जंगलों में दशकों से बिछाई गई बारूदी सुरंगें किसी राजनीतिक कैलेंडर का पालन नहीं करतीं। असली सवाल यह है कि नक्सलमुक्ति की घोषणा के बाद डी-माइनिंग अभियान को और तेज़ क्यों नहीं किया गया — और क्या सुरक्षाबलों को पर्याप्त उपकरण व प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तीन जवानों की शहादत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि नीतिगत प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार का आह्वान है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांकेर IED ब्लास्ट में कौन-कौन से जवान शहीद हुए?
इस विस्फोट में DRG के इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कॉन्स्टेबल कृष्णा कोमरा और कॉन्स्टेबल संजय गढपाले शहीद हुए। कॉन्स्टेबल परमानंद कोमरा गंभीर रूप से घायल हैं और उनका अस्पताल में उपचार जारी है।
कांकेर IED विस्फोट कब और कहाँ हुआ?
यह विस्फोट 2 मई 2026 को कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा के निकट हुआ। DRG की टीम उस समय डी-माइनिंग और सर्च ऑपरेशन पर थी।
नक्सलमुक्त घोषणा के बाद भी IED का खतरा क्यों बना हुआ है?
बस्तर रेंज IG सुंदरराज पट्टिलिंगम के अनुसार, माओवादियों द्वारा वर्षों पहले छिपाकर रखे गए सैकड़ों IED अब भी इलाके में मौजूद हैं। 31 मार्च 2026 को नक्सलमुक्त घोषणा के बाद भी इन्हें खोजकर निष्क्रिय करने का अभियान जारी है।
DRG (जिला रिजर्व गार्ड) क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
DRG यानी जिला रिजर्व गार्ड छत्तीसगढ़ पुलिस की एक विशेष इकाई है, जिसमें मुख्यतः पूर्व माओवादी और स्थानीय आदिवासी युवा शामिल होते हैं। यह इकाई नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में डी-माइनिंग, सर्च ऑपरेशन और एरिया डॉमिनेशन जैसे अभियानों में अग्रणी भूमिका निभाती है।
इस घटना की जाँच कौन कर रहा है और आगे क्या होगा?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जाँच जारी है और घटना से जुड़ी अन्य जानकारी जुटाई जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में व्यापक सर्च ऑपरेशन जारी रखने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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