क्या राहुल गांधी विदेश में भारत की आलोचना कर रहे हैं? अर्जुन राम मेघवाल का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- अर्जुन राम मेघवाल ने राहुल गांधी की विदेश में आलोचना की।
- जेएनयू में विवादास्पद नारे उठाए गए।
- कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप।
- राहुल गांधी मुद्दों पर चर्चा से भागते हैं।
- न्यायपालिका के फैसले पर असहमति का अधिकार।
नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राहुल गांधी की विदेश में भारत की आलोचना करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जेएनयू में उठाए गए विवादास्पद नारों और दिल्ली दंगों के आरोपियों को जमानत न मिलने को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
अर्जुन राम मेघवाल ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि यदि हम पिछले कुछ वर्षों में राहुल गांधी के कार्यों का विश्लेषण करें, तो यह स्पष्ट होता है कि वह अक्सर विदेश में भारत की निंदा करते हैं। वह एक ऐसा कार्यक्रम आयोजित करते हैं जिसमें कुछ छात्र और प्रोफेसर शामिल होते हैं, और इस दौरान वह भारत की संवैधानिक संस्थाओं जैसे चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई, ईडी और कभी-कभी लोकतंत्र की भी आलोचना कर देते हैं, जो कि उनके लिए उचित नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि देश की जनता कांग्रेस को लगातार चुनावों में हरा रही है, तो उन्हें यह समझने की आवश्यकता है कि भाजपा की नीतियां सही दिशा में हैं। राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करने से भागने की प्रवृत्ति है। जब एसआईआर पर चर्चा हो रही थी, तब वह कहाँ थे? बिहार में जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, तो जनता ने उन्हें मुँहतोड़ जवाब दिया। इसके बावजूद भी उन्हें समझ में नहीं आ रहा है।
कानून मंत्री ने कहा कि जेएनयू में उठाए गए नारों को आपत्तिजनक माना जाना चाहिए। जेएनयू प्रशासन इस पर कार्य कर रहा है, लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि चूंकि आरोपियों में मुस्लिम हैं, इसलिए उन्हें जमानत नहीं मिल रही। परंतु इस मामले में पांच आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, और वे भी मुस्लिम थे।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका कुछ फैसले करती है, चाहे वह सुप्रीम कोर्ट हो या हाईकोर्ट। यदि आपको निर्णय सही नहीं लगता, तो लीगल रेमेडी का सहारा लेना चाहिए। जो लोग इस तरह का नैरेटिव बनाने का प्रयास कर रहे हैं, वह लोकतंत्र में ठीक नहीं है। जेएनयू प्रशासन इस मामले पर कार्य कर रहा है। बाबा साहब अंबेडकर ने हमें संवैधानिक अधिकारों के प्रति सचेत रहने की बात कही है, और हमें उसी के तहत कार्य करना चाहिए।
अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस तो तुष्टिकरण पर ही जीवित है।