उत्तर प्रदेश में फरवरी तक 1.96 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व संग्रह: मुख्यमंत्री की समीक्षा

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उत्तर प्रदेश में फरवरी तक 1.96 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व संग्रह: मुख्यमंत्री की समीक्षा

सारांश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राजस्व संग्रह की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों को पारदर्शिता और नवाचार के साथ लक्ष्य प्राप्ति के प्रयासों में तेजी लाने का निर्देश दिया। क्या प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है?

Key Takeaways

  • मुख्यमंत्री की बैठक में राजस्व संग्रह की विस्तृत समीक्षा की गई।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26 का राजस्व लक्ष्य ₹2,95,000 करोड़ है।
  • जीएसटी और वैट से महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त हुआ है।
  • आबकारी विभाग को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया।
  • राजस्व वृद्धि विकास कार्यों को प्रभावित करती है।

लखनऊ, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के फरवरी माह के अंत तक के कर एवं गैर-कर राजस्व की अद्यतन स्थिति की गहन समीक्षा की। जीएसटी, वैट, आबकारी, स्टाम्प एवं पंजीकरण, परिवहन, ऊर्जा, भू-राजस्व और खनन विभागों द्वारा प्रस्तुत लक्ष्यों और उपलब्धियों का विस्तार से मूल्यांकन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व वृद्धि प्रदेश में विकास कार्यों की गति को निर्धारित करती है।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार-आधारित कार्यप्रणाली के साथ लक्ष्य प्राप्ति के प्रयासों को तेज करने का निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कर-राजस्व का वार्षिक लक्ष्य ₹2,95,000 करोड़ निर्धारित है, जिसके अनुपालन में फरवरी 2026 तक ₹1,96,177 करोड़ की प्राप्ति हुई है। राज्य कर (जीएसटी + वैट) का लक्ष्य ₹1,75,725 करोड़ है, जिसमें अब तक ₹1,03,770 करोड़ का संग्रह किया गया है। इस संग्रह में जीएसटी के अंतर्गत ₹75,195 करोड़ और वैट के अंतर्गत ₹28,575 करोड़ की प्राप्ति शामिल है।

राज्य कर विभाग ने बताया कि जीएसटी 2.0, एआई आधारित जोखिम विश्लेषण, व्यापक स्क्रूटनी, ई-इनवॉइसिंग और ई-वे बिल की प्रभावी निगरानी के प्रयासों से कर अनुपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एआई द्वारा 1.59 लाख करदाताओं की जांच, 75 जनपदों में संवाद कार्यक्रम, फर्जी आईटीसी पर नियंत्रण तथा ₹3,117 करोड़ की वसूली विभाग के प्रमुख परिणाम रहे हैं। आबकारी विभाग की सूचना के अनुसार, विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹63,000 करोड़ है, जिसके सापेक्ष फरवरी 2026 तक ₹48,501 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.2 प्रतिशत अधिक है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दुकानों के नवीनीकरण की दर 93.75 प्रतिशत दर्ज की गई है। विभाग ने उपभोग आधारित रणनीति, दुकानों के नवीनीकरण, लाइसेंस शुल्क, असग्रम मांग पत्र और थोक एवं ब्रांड नवीनीकरण जैसी प्रक्रियाओं के माध्यम से मार्च में लगभग ₹9,050 करोड़ की अतिरिक्त प्राप्ति का रोडमैप प्रस्तुत किया है। वर्षांत तक राजस्व लगभग ₹57,550 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने वर्ष 2025-26 के अपने वार्षिक लक्ष्य ₹38,150 करोड़ के सापेक्ष फरवरी तक ₹29,487 करोड़ की प्राप्ति दर्ज की है।

विभाग ने यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, गाजियाबाद, बरेली, गोरखपुर और वाराणसी सहित विभिन्न विकास प्राधिकरणों की आगामी आवासीय एवं वाणिज्यिक परियोजनाओं से संभावित राजस्व का भी विवरण प्रस्तुत किया। खनन पट्टों के नवीनीकरण, अवशेष संपत्तियों के पंजीकरण अभियान, टोल प्लाज़ा मामलों का निपटारा और सर्किल दरों का वैज्ञानिक पुनरीक्षण को राजस्व संवर्धन के प्रभावी उपायों के रूप में प्रस्तुत किया गया। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग का वार्षिक लक्ष्य ₹14,000 करोड़ है, जिसके मुकाबले फरवरी तक ₹11,005 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।

वाहन पंजीकरण में सुधार, कर अदायगी की बेहतर व्यवस्था, तकनीक आधारित निगरानी और प्रवर्तन कार्यवाहियों की मजबूती के साथ विभाग ने राजस्व वृद्धि दर्ज की है। कर वसूली शिविर, निगरानी अभियान और डिजिटल मॉनिटरिंग को आगामी समय में और तेज करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। बैठक में भू-राजस्व एवं ऊर्जा विभाग ने संयुक्त रूप से फरवरी तक ₹3,414 करोड़ की उपलब्धि की जानकारी दी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.6 प्रतिशत अधिक है।

खनन एवं भू-तत्व विभाग ने बताया कि विभाग वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित ₹6,000 करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष फरवरी तक ₹3,597 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति कर चुका है। विभाग ने बताया कि खनन क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग, ओवरलोडिंग की रोकथाम, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग, विभिन्न राज्यों के पोर्टलों से एपीआई इंटीग्रेशन तथा अंतरराज्यीय समन्वय के परिणामस्वरूप राजस्व संग्रह में और मजबूती आई है। विभाग ने मार्च में लगभग ₹600 करोड़ की संभावित प्राप्ति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बढ़ता हुआ राजस्व प्रदेश में बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को गति प्रदान करता है।

उन्होंने सभी विभागों को टीम भावना, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ निर्धारित लक्ष्यों की उपलब्धि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आबकारी विभाग को होली पर्व के दौरान विशेष सतर्कता बरतने तथा अवैध और जहरीली शराब के उत्पादन एवं बिक्री को पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग से भूमि रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन की प्रगति की जानकारी लेते हुए रजिस्ट्री कार्यालयों के आधुनिकीकरण की गति बढ़ाने को कहा। परिवहन विभाग को मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम की बसों की फिटनेस, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की ठोस कार्ययोजना और नए रूट चिन्हित कर निजी बस संचालकों के सहयोग से बेहतर परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।

--आईएनएस

विकेटी/डीएससी

Point of View

जिसमें मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पारदर्शिता और नवाचार पर जोर दिया। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि बढ़ता राजस्व प्रदेश की विकास गति को प्रभावित करता है।
NationPress
19/04/2026

Frequently Asked Questions

योगी आदित्यनाथ ने राजस्व संग्रह की समीक्षा कब की?
योगी आदित्यनाथ ने 27 फरवरी को राजस्व संग्रह की समीक्षा की।
उत्तर प्रदेश का वित्तीय वर्ष 2025-26 का कर-राजस्व लक्ष्य क्या है?
उत्तर प्रदेश का कर-राजस्व लक्ष्य ₹2,95,000 करोड़ है।
राजस्व संग्रह में किस विभाग ने सबसे ज्यादा योगदान दिया?
राजस्व संग्रह में जीएसटी और वैट विभाग ने सबसे ज्यादा योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने किस विभाग को होली पर्व के दौरान सतर्क रहने का निर्देश दिया?
मुख्यमंत्री ने आबकारी विभाग को होली पर्व के दौरान सतर्क रहने का निर्देश दिया।
राजस्व वृद्धि का क्या महत्व है?
राजस्व वृद्धि प्रदेश में बुनियादी ढांचे और उद्योग विकास को गति देती है।
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