कमल हासन की चोल विरासत पर टिप्पणी से उपजा विवाद, भाजपा ने मांगी सार्वजनिक माफी
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चेन्नई, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चुनाव प्रचार के दौरान अभिनेता-राजनेता कमल हासन ने तमिलनाडु के मंत्री सेकर बाबू के मंदिर पुनर्निर्माण कार्यों की तुलना चोल सम्राट राजा राजा चोल प्रथम से करके एक राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
रविवार को तमिलनाडु भाजपा के प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने कमल हासन की टिप्पणी को "बेहद खेदजनक" और "इतिहास के महानतम तमिल शासकों में से एक की विरासत का अपमान" कहा।
हासन ने कहा था कि शेखर बाबू ने राजा राजा चोल से भी अधिक 'कुंभभिषेकम' (मंदिर अभिषेक) किए थे, इस पर एएनएस प्रसाद ने कहा कि कमल हासन को अपनी टिप्पणियों को वापस लेना चाहिए और सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए।
प्रसाद ने कहा कि तमिल सभ्यता, प्रशासन और मंदिर वास्तुकला में राजा राजा चोल का योगदान अतुलनीय है और इसकी तुलना राजनीतिक उद्देश्यों से करना उचित नहीं है।
चोल सम्राट की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि राजा राजा चोल प्रथम ने तंजावुर में प्रसिद्ध बृहदीश्वर मंदिर का निर्माण कराया, जो द्रविड़ वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और चोल साम्राज्य का विस्तार श्रीलंका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों तक किया।
उन्होंने यह भी कहा कि शासक ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और मंदिर अनुदानों की ऐसी परंपरा शुरू की, जिससे धार्मिक गतिविधियां व्यवस्थित रूप से संचालित हो सकीं।
प्रसाद ने डीएमके सरकार और मंत्री सेकर बाबू की आलोचना करते हुए हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग में कुप्रबंधन के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य के कई मंदिर बुनियादी पूजा-अर्चना तक करने में परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
भाजपा नेता ने कमल हासन के डीएमके के साथ राजनीतिक जुड़ाव पर भी टिप्पणी की और कहा कि उनकी टिप्पणी मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के साथ निकटता के कारण प्रभावित हो सकती है। उन्होंने हासन से आत्ममंथन करने और अपने बयान की गंभीरता को समझने की अपील की।
सुधारात्मक कदम उठाने की मांग करते हुए प्रसाद ने कहा कि हासन को बृहदीश्वर मंदिर जाकर राजा राजा चोल को श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो इससे जनभावनाएं आहत हो सकती हैं, विशेषकर उन लोगों की जो चोल विरासत का सम्मान करते हैं।
यह विवाद तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले तेज होते प्रचार के बीच उभरा है, जहां मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।