27 जून 2026
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राम मंदिर दानपात्र घोटाला: भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रमुख सैयद बाशा ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, कड़ी कार्रवाई की माँग

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राम मंदिर दानपात्र घोटाला: भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रमुख सैयद बाशा ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, कड़ी कार्रवाई की माँग

सारांश

दशकों के संघर्ष के बाद बने राम मंदिर के दानपात्र में घोटाले की खबर ने श्रद्धालुओं को झकझोर दिया है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रमुख सैयद बाशा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए CM योगी और PM मोदी से सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

मुख्य बातें

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रमुख सैयद बाशा ने राम मंदिर दानपात्र घोटाले को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया।
श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए सोना, चाँदी और अन्य सामग्री का कथित तौर पर निजी स्वार्थ के लिए दुरुपयोग किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया है।
बाशा के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले में सख्त कदम उठाने के पक्ष में हैं।
बाशा ने CBSE की त्रिभाषा नीति का समर्थन करते हुए हिंदी, स्थानीय भाषा और एक अंतरराष्ट्रीय भाषा पढ़ाने की वकालत की।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रमुख सैयद बाशा ने राम मंदिर के दानपात्र में सामने आए घोटाले को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया है और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है। 27 जून को विजयवाड़ा में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दशकों के संघर्ष के बाद निर्मित इस पवित्र स्थल के साथ इस तरह की धोखाधड़ी अत्यंत निंदनीय है।

मुख्य घटनाक्रम

सैयद बाशा ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए श्रद्धालुओं ने सोना, चाँदी और अन्य बहुमूल्य सामग्री दान की थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने इन दान की गई वस्तुओं का उपयोग निजी स्वार्थ के लिए किया। उन्होंने कहा, 'इतने सालों के संघर्ष के बाद राम मंदिर बनकर तैयार हुआ है — ऐसे में दानपात्र घोटाले का मामला प्रकाश में आना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।'

सरकार की प्रतिक्रिया

बाशा ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि इस घपले में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, 'हमें मुख्यमंत्री योगी पर पूरा भरोसा है कि वे इस पूरे मामले में गंभीरतापूर्वक कार्रवाई करेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले में सख्त कदम उठाने के पक्ष में हैं।

आम जनता पर असर

यह मामला उन लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा है जिन्होंने राम मंदिर के निर्माण के लिए अपनी श्रद्धा से दान दिया था। गौरतलब है कि मंदिर निर्माण के दौरान देशभर से करोड़ों रुपये, सोना और अन्य सामग्रियाँ दान स्वरूप प्राप्त हुई थीं। ऐसे में इस घोटाले ने आस्था और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीबीएसई त्रिभाषा नीति पर बाशा का रुख

इसी बातचीत में सैयद बाशा ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की त्रिभाषा नीति का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत विद्यार्थियों को हिंदी, अपनी स्थानीय भाषा और एक अंतरराष्ट्रीय भाषा पढ़ाई जानी चाहिए। आंध्र प्रदेश से आने वाले बाशा ने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके राज्य के बच्चों के लिए हिंदी के साथ तेलुगु भाषा का समावेश आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के शैक्षिक सुधार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही संभव हैं।

क्या होगा आगे

दानपात्र घोटाले में प्रशासनिक जाँच और संभावित कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले में पारदर्शी जाँच और दोषियों को सार्वजनिक रूप से जवाबदेह ठहराना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है। भाजपा के अपने नेता का इस पर सार्वजनिक रूप से 'दुर्भाग्यपूर्ण' कहना दर्शाता है कि मामला दल की आंतरिक असहजता तक पहुँच चुका है। असली परीक्षा यह है कि जाँच कितनी पारदर्शी होती है और क्या दोषियों की जवाबदेही केवल बयानों तक सीमित रहती है या ठोस कानूनी कार्रवाई तक पहुँचती है। मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और स्वतंत्र ऑडिट का सवाल अब और टाला नहीं जा सकता।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दानपात्र घोटाला क्या है?
राम मंदिर के दानपात्र में जमा श्रद्धालुओं के दान — जिसमें सोना, चाँदी और अन्य बहुमूल्य सामग्री शामिल है — के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने इन दान की गई वस्तुओं का निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया।
सैयद बाशा ने इस घोटाले पर क्या कहा?
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रमुख सैयद बाशा ने 27 जून को विजयवाड़ा में इस घोटाले को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि दशकों के संघर्ष के बाद बने राम मंदिर के साथ ऐसी धोखाधड़ी अत्यंत निंदनीय है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
CM योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में क्या रुख अपनाया है?
सैयद बाशा के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि दानपात्र घोटाले में शामिल आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बाशा ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है।
सीबीएसई त्रिभाषा नीति पर सैयद बाशा का क्या कहना है?
बाशा ने CBSE की त्रिभाषा नीति का समर्थन किया। उनके अनुसार विद्यार्थियों को हिंदी, अपनी स्थानीय भाषा (जैसे आंध्र प्रदेश में तेलुगु) और एक अंतरराष्ट्रीय भाषा पढ़ाई जानी चाहिए, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
राम मंदिर दानपात्र घोटाले में आगे क्या होगा?
कथित तौर पर इस मामले में प्रशासनिक जाँच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। CM योगी के बयान के बाद दोषियों की पहचान और उनके विरुद्ध कार्रवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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