राम मंदिर दान घोटाला: एनडीए नेताओं का ऐलान — 'योगी सरकार में कोई दोषी नहीं बचेगा', VHP बोली — चंपत राय जांच से बाहर नहीं
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में दान राशि के कथित गबन मामले में पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने एकजुट होकर कड़ी कार्रवाई का संकल्प जताया है। 26 जून को आई इन प्रतिक्रियाओं में नेताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार किसी भी दोषी को नहीं बख्शेगी। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने स्पष्ट किया कि एफआईआर में नाम न होने के बावजूद चंपत राय और अन्य संदिग्ध जांच के दायरे से बाहर नहीं हैं।
मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की चेतावनी
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस मामले पर कहा, 'योगी आदित्यनाथ की सरकार में अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस का नारा शुरू से दिया गया है। आप महसूस करते होंगे कि उसी के अनुरूप योगी जी का एक्शन भी रहा है। योगी सरकार में कोई भी दोषी नहीं बचेगा। जिसने गड़बड़ी की होगी, उसको जरूर सजा मिलेगी।' उनका यह बयान इस बात का संकेत है कि सरकार इस मामले को राजनीतिक दबाव से परे रखकर कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाएगी।
बिहार मंत्री और जदयू नेताओं की प्रतिक्रिया
बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने एफआईआर को सही कदम बताते हुए कहा, 'राम मंदिर में चोरी हो, ये दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन वहां कार्रवाई कर रहा है। जो लोग इसमें संलिप्त पाए जाएंगे, उन्हें गिरफ्तार किया गया है और जो भी लोग इसमें शामिल होंगे, उन्हें भी किया जाएगा। सरकार का उचित कदम है।'
जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद संजय झा ने कहा, 'राम मंदिर सभी की आस्था का केंद्र है। जिसने भी चढ़ावे में गबन किया है, वह बिल्कुल गलत है। सरकार ने मामले में अपनी कार्रवाई शुरू की है। आरोपियों के खिलाफ जरूर कार्रवाई होगी।' जदयू के एमएलसी नीरज कुमार ने और सख्त रुख अपनाते हुए कहा, 'चंपत राय हों या कोई अन्य, जिसने भी अपराध किया है, वो जेल जाएगा। भगवान के नाम पर लोगों ने दान के नाम पर आर्थिक सेवा दी थी। इस राशि का कोई गबन कर ले, ये बिल्कुल न्यायसंगत नहीं है।'
VHP का चंपत राय पर स्पष्टीकरण
एफआईआर में चंपत राय का नाम शामिल न होने पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, 'इससे क्या हासिल होगा? वे जांच से बाहर नहीं हैं। उनसे भी पूछताछ होगी। मैंने छोटी मछली और बड़ी मछली वाली बात कही थी। एफआईआर में नाम एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर शामिल किए गए हैं। लेकिन मैं दोहराता हूं कि इसमें और अन्य लोग भी शामिल हैं। इसलिए, न तो चंपत और न ही अनिल इस जांच के दायरे से बाहर हैं और न ही ऐसा कोई इरादा है।' गौरतलब है कि चंपत राय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे हैं और उनका नाम इस विवाद के केंद्र में है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े दान संग्रह को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। कथित तौर पर श्रद्धालुओं द्वारा दी गई दान राशि के दुरुपयोग की शिकायतों के बाद विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर पहली एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है।
आगे क्या होगा
SIT की जांच जारी है और आलोक कुमार के बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में और नाम भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। NDA नेताओं के एकसुर बयान यह दर्शाते हैं कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस मामले में किसी को भी संरक्षण देने की स्थिति में नहीं दिखना चाहता। अगला कदम SIT की अंतिम रिपोर्ट और न्यायालय की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।