8 जुलाई 2026
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राम मंदिर चंदा विवाद: बिहार मंत्री संतोष सुमन बोले — 'एसआईटी जांच के बाद दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई हो'

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राम मंदिर चंदा विवाद: बिहार मंत्री संतोष सुमन बोले — 'एसआईटी जांच के बाद दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई हो'

सारांश

राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर बिहार मंत्री संतोष सुमन ने साफ कहा — यह करोड़ों आस्थावानों के साथ धोखा है। चंपत राय के इस्तीफे को उचित ठहराते हुए उन्होंने एसआईटी जांच के बाद दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की। विपक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

बिहार मंत्री संतोष कुमार सुमन ने 8 जुलाई 2026 को राम मंदिर चंदा चोरी विवाद को पूरे देश के लिए शर्मनाक करार दिया।
उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा उचित बताया, कहा — घटना उन्हीं के कार्यकाल में हुई।
विपक्षी नेता अखिलेश सिंह और कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
बिहार में दो वर्षों में रोज़गार सृजन और उद्योग आगमन से सकारात्मक बदलाव का दावा।
बंगाल एनकाउंटर का समर्थन करते हुए महिला सुरक्षा के लिए कड़े कानून की मांग की।

बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने 8 जुलाई 2026 को पटना में राम मंदिर चंदा चोरी विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना पूरे देश के लिए शर्मनाक है और एसआईटी जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को भी इस संदर्भ में उचित ठहराया।

मंत्री सुमन का मुख्य बयान

पटना में पत्रकारों से बातचीत में मंत्री सुमन ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हमारी आस्था से जुड़े स्थानों पर इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए। सामाजिक संगठनों और सरकार को एकजुट होकर दोषियों को कठोर से कठोर दंड देना चाहिए, ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपों और बचाव पक्ष — दोनों की जांच की जाएगी और निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कार्यवाही तय होगी।

चंपत राय के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया

मंत्री सुमन ने कहा कि जब चंपत राय महासचिव पद पर थे, उसी दौरान यह घटना हुई, इसलिए उनका इस्तीफा देना स्वाभाविक कदम था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित होगा। गौरतलब है कि राम मंदिर चंदा विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है।

विपक्ष पर निशाना

मंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विपक्षी नेताओं पर दिए बयान का समर्थन करते हुए कहा कि कुछ नेता खुद को सनातनी बताते हैं, लेकिन अयोध्या के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाते हैं। उन्होंने अखिलेश सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया, 'आप खुद को सनातनी कहते हैं, लेकिन आस्था पर टिप्पणी करते हैं। जब अपनी तरफ घटना होती है तो चुप रह जाते हैं और दूसरी तरफ इसे देश-दुनिया में फैलाने का काम करते हैं। यह सनातन की छवि धूमिल करने का प्रयास है।'

कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए सुमन ने कहा कि पार्टी के पास अब पुरानी यादों के अलावा कुछ नहीं बचा और बिहार में उसका जनाधार पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि नेहरू की नीतियों के कारण देश को अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों से जूझना पड़ा, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं।

बिहार सरकार की प्राथमिकताएं

मंत्री सुमन ने बताया कि एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए 'सात निश्चय' के लक्ष्यों पर तेज गति से काम हो रहा है। रोज़गार सृजन, शांति व्यवस्था, भ्रष्टाचार मुक्ति और निवेश आकर्षण सरकार की प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दो वर्षों में उद्योगों के आगमन से बिहार में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखेगा।

बंगाल एनकाउंटर पर रुख

मंत्री सुमन ने बंगाल में हुई हालिया एनकाउंटर घटना पर कहा कि यह मानवता को शर्मसार करने वाली है और बेटियों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून एवं सख्त प्रशासनिक कार्रवाई अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अपराधियों के विरुद्ध पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर का भी समर्थन करते हैं। राम मंदिर विवाद से लेकर बंगाल एनकाउंटर तक — मंत्री सुमन के बयान स्पष्ट करते हैं कि सत्ता पक्ष कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह नहीं बताते कि ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी प्रणाली कहाँ चूकी। चंपत राय के इस्तीफे को 'स्वाभाविक' बताना जवाबदेही को व्यक्तिगत जिम्मेदारी तक सीमित करता है, जबकि संस्थागत पारदर्शिता का सवाल अनुत्तरित रहता है। करोड़ों श्रद्धालुओं के दान से बने ट्रस्ट में इस तरह के विवाद यह भी दर्शाते हैं कि धार्मिक संस्थाओं के लिए स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक वित्तीय प्रकटीकरण की व्यवस्था अभी भी अधूरी है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चंदा चोरी विवाद क्या है?
राम मंदिर चंदा चोरी विवाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान की राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसकी जांच एसआईटी कर रही है। इस विवाद के बाद ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
चंपत राय ने इस्तीफा क्यों दिया?
बिहार मंत्री संतोष सुमन के अनुसार, यह घटना चंपत राय के महासचिव कार्यकाल के दौरान हुई, इसलिए उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। एसआईटी जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
एसआईटी जांच के बाद क्या होगा?
बिहार मंत्री सुमन ने स्पष्ट किया कि एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद आरोपों और बचाव पक्ष — दोनों के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच के निष्कर्ष ही आगे की कार्यवाही तय करेंगे।
बिहार सरकार इस विवाद पर क्या रुख रखती है?
बिहार सरकार ने इस घटना को करोड़ों आस्थावानों के साथ धोखा बताते हुए निंदा की है। मंत्री सुमन ने कहा कि सामाजिक संगठनों और सरकार को एकजुट होकर दोषियों को कठोर दंड देना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मंत्री सुमन ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
मंत्री सुमन ने अखिलेश सिंह और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वे खुद को सनातनी बताते हैं, लेकिन अयोध्या के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाते हैं। उनका कहना था कि ऐसे बयान सनातन की छवि धूमिल करने का प्रयास हैं।
राष्ट्र प्रेस
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