राम मंदिर चढ़ावा विवाद: चंपत राय के इस्तीफे को विहिप ने बताया नैतिकता की मिसाल, SIT जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
राम मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र जैन ने 28 जून 2026 को स्पष्ट किया कि ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय का इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। जैन के अनुसार, चंपत राय पर कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं होने के बावजूद उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ा, जो सार्वजनिक जीवन में आदर्श स्थापित करता है।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
सुरेंद्र जैन ने बताया कि चंपत राय ने एफआईआर दर्ज होने के अगले ही दिन संबंधित कोषाध्यक्ष को बुलाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके अनुसार यह कदम सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही की मिसाल है और इसका सभी को सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं, उनके अपने राजनीतिक इतिहास में कई विवाद रहे हैं, फिर भी उन्होंने कभी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया।
विहिप का रुख और SIT जांच
मुंबई में विहिप के प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा कि संगठन पहले दिन से निष्पक्ष जांच के पक्ष में है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने स्वयं एसआईटी (SIT) गठन की मांग की थी और जांच के बाद अंतरिम रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी जा चुकी है। नायर ने स्पष्ट किया कि यदि धन के कथित गबन में कोई भी व्यक्ति — चाहे वह किसी भी पद पर हो — दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतिम निष्कर्ष SIT की पूर्ण रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
विपक्ष पर पलटवार
राम मंदिर ट्रस्ट के फंड में हजारों करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों पर सुरेंद्र जैन ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं पर निशाना साधा। उनका कहना है कि ऐसे दावों का उद्देश्य राम जन्मभूमि के प्रति लोगों की आस्था को कमजोर करना है। उन्होंने आरोप लगाने वालों से अपील की कि यदि उनके पास ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें SIT और पुलिस के समक्ष प्रस्तुत करें। बिना सबूत के आरोप लगाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ऐसा उन्होंने कहा।
विपक्षी दलों की मांग
रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि जिस प्रकार अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े मामलों की जांच होती है, उसी तरह इस प्रकरण की भी जांच होनी चाहिए। माझी ने जोर दिया कि जांच में जाति, धर्म, पार्टी या राजनीति नहीं देखी जानी चाहिए, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला है। उनके अनुसार कानून सभी के लिए समान है और निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
आगे क्या होगा
SIT की पूर्ण रिपोर्ट आने तक यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना रहेगा। विहिप ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना जरूरी है और सभी पक्षों को जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए। यह मामला भारत के सबसे चर्चित धार्मिक स्थल से जुड़े वित्तीय प्रशासन की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।