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चंपत राय के इस्तीफे पर अयोध्या संत समाज का समर्थन, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से अपील

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चंपत राय के इस्तीफे पर अयोध्या संत समाज का समर्थन, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से अपील

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर अयोध्या संत समाज एकजुट हो गया है। संतों ने ट्रस्ट से इस्तीफा न स्वीकारने की अपील की, आरोपों को निराधार बताया और एसआईटी जाँच का स्वागत करते हुए कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि से भी कड़े सवाल पूछे।

मुख्य बातें

अयोध्या के संत समाज ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर चंपत राय के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाला।
संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न करने की अपील की।
चंपत राय ने स्वयं एसआईटी जाँच की माँग की थी; सरकार द्वारा एसआईटी गठन का संत समाज ने स्वागत किया।
संतों ने कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि से मंदिर कोष सुरक्षा और बैठक जल्दी बुलाने पर स्पष्टीकरण माँगा।
संत समाज ने राम मंदिर से जुड़े हर मुद्दे पर पारदर्शिता बनाए रखने की माँग की।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को लेकर उठे विवाद के बीच अयोध्या के संत समाज ने 5 जुलाई 2025 को खुलकर उनके पक्ष में मोर्चा संभाल लिया। संतों ने शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में ट्रस्ट से आग्रह किया कि चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए और उन पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार करार दिया।

संत समाज का स्पष्ट समर्थन

प्रेस वार्ता में संतों ने कहा कि चंपत राय दशकों से राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े रहे हैं। उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता और समर्पण का रहा है। संतों के अनुसार उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इससे उनकी छवि को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।

संत समाज ने यह भी कहा कि विवाद के दौरान चंपत राय ने पूर्ण संयम बनाए रखा और सार्वजनिक रूप से किसी प्रकार की बयानबाज़ी से परहेज किया — जो उनकी परिपक्वता और निष्ठा का प्रमाण है।

एसआईटी जाँच का स्वागत

संतों ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि चंपत राय ने स्वयं मामले की एसआईटी जाँच कराने का आग्रह किया था, जो यह दर्शाता है कि उन्हें जाँच से कोई परहेज नहीं है। सरकार द्वारा एसआईटी गठित किए जाने के फैसले का भी संत समाज ने स्वागत किया और कहा कि जाँच पूरी होने पर सभी तथ्य स्वतः सामने आ जाएंगे।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष से सवाल

प्रेस वार्ता में संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मंदिर कोष की सुरक्षा व्यवस्था में पर्याप्त सतर्कता क्यों नहीं बरती गई। इसके अलावा संतों ने यह भी जानना चाहा कि प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक निर्धारित समय से पहले क्यों बुलाई गई और इसके पीछे क्या कारण था।

आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर

संत समाज ने ट्रस्ट से इन सभी सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की माँग की। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े हर मुद्दे पर पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या अनावश्यक विवाद उत्पन्न न हो।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक पर टिकी हैं, जहाँ चंपत राय के इस्तीफे पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है। एसआईटी की जाँच रिपोर्ट भी इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि धार्मिक-राजनीतिक आयाम भी ले चुका है। चंपत राय का स्वयं एसआईटी जाँच की माँग करना एक असामान्य कदम है — यह या तो आत्मविश्वास का प्रतीक है या दबाव से उबरने की रणनीति। गौरतलब है कि ट्रस्ट पर सवाल उठाना और कोषाध्यक्ष को घेरना यह संकेत देता है कि संत समाज केवल चंपत राय का बचाव नहीं कर रहा, बल्कि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर व्यापक जवाबदेही की माँग कर रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संस्थान में पारदर्शिता की कमी दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंपत राय का इस्तीफा विवाद क्या है?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कथित तौर पर इस्तीफा दिया है, जिसके बाद ट्रस्ट और संत समाज के बीच इस पर मतभेद उभर आए हैं। चंपत राय पर लगाए गए आरोपों को संत समाज ने निराधार बताया है।
अयोध्या संत समाज ने क्या माँग की है?
संत समाज ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार न करने की अपील की है। साथ ही ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि से मंदिर कोष सुरक्षा और बैठक जल्दी बुलाने पर स्पष्टीकरण माँगा है।
एसआईटी जाँच का इस मामले में क्या महत्व है?
चंपत राय ने स्वयं इस मामले की एसआईटी जाँच कराने का आग्रह किया था, जिसे संत समाज ने उनकी पारदर्शिता का प्रमाण बताया। सरकार द्वारा एसआईटी गठित किए जाने के फैसले का संत समाज ने स्वागत किया है।
गोविंद देवगिरि पर क्या सवाल उठाए गए हैं?
संतों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि से पूछा कि मंदिर कोष की सुरक्षा में पर्याप्त सतर्कता क्यों नहीं बरती गई और प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक निर्धारित समय से पहले क्यों बुलाई गई।
इस विवाद का राम मंदिर और श्रद्धालुओं पर क्या असर हो सकता है?
संत समाज ने चेताया है कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए ट्रस्ट से जुड़े हर मुद्दे पर पारदर्शिता अनिवार्य है। पारदर्शिता की कमी से श्रद्धालुओं में भ्रम और अविश्वास उत्पन्न हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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