चंपत राय का इस्तीफे के बाद पहला पत्र वायरल, बोले — एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने पर दूंगा क्रमवार जवाब
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद 7 जुलाई 2026 को पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके नाम से एक पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने रामभक्तों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का क्रमवार उत्तर देंगे। यह पत्र अयोध्या के राम मंदिर परिसर में 7 जून 2026 को दानपात्र गणना के दौरान हुई कथित चोरी की घटना की पृष्ठभूमि में आया है।
पत्र में क्या कहा चंपत राय ने
अपने पत्र में चंपत राय ने लिखा, '7 जून 2026 से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के दानपात्र की गणना के समय हुई चोरी के संबंध में अनेक प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। व्यक्तिगत रूप से मेरे ऊपर भी अनेक लोगों ने निराधार आरोप लगाए हैं। मैंने इस पूरे मामले पर मौन धारण कर लिया है।' उन्होंने आगे आश्वासन दिया, 'एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद फैलाए जा रहे सभी बिंदुओं पर क्रमवार अपना उत्तर दूंगा। तब पूरा सत्य सभी के सामने आ जाएगा।'
पत्र में गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस के अयोध्या कांड की चौपाई — 'धीरज धरम मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी' — भी साझा की गई, जो संकट में धैर्य रखने का संदेश देती है।
एसआईटी रिपोर्ट और ट्रस्ट बैठक का घटनाक्रम
चंपत राय के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट की जुलाई माह की सामान्य बैठक में एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जो अब सार्वजनिक भी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट मूलतः 'परम गोपनीय' थी। गौरतलब है कि इस्तीफे से पहले ट्रस्ट की उसी बैठक में यह रिपोर्ट सदस्यों के सामने रखी गई थी।
45 वर्षों के संगठनात्मक जीवन का उल्लेख
अपने पत्र में चंपत राय ने अपने संगठनात्मक इतिहास का भी ज़िक्र किया। उन्होंने लिखा, 'मुझे वर्ष 1991 के अक्टूबर माह में संगठन द्वारा अयोध्या भेजा गया था। मेरा प्रचारक जीवन 45 वर्षों का है। जहां-जहां मैं रहा, मेरा जीवन एक खुली पुस्तक की तरह रहा है।' पत्र का समापन उन्होंने 'सभी को आदरपूर्वक नमन' से किया।
इस्तीफा स्वीकृत, अंतरिम महासचिव नियुक्त
सोमवार, 7 जुलाई 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का महासचिव पद से इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। उनके स्थान पर कृष्ण मोहन को नए महासचिव की नियुक्ति होने तक अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह ऐसे समय में हुआ है जब मंदिर परिसर में दानपात्र चोरी की जांच अभी जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतज़ार है।
आगे क्या होगा
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चंपत राय के ऊपर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। ट्रस्ट में नए स्थायी महासचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आने वाले दिनों में तय होगी। चंपत राय का यह पत्र संकेत देता है कि वह सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखने के लिए जांच के निष्कर्षों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।