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चंपत राय का इस्तीफे के बाद पहला पत्र वायरल, बोले — एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने पर दूंगा क्रमवार जवाब

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चंपत राय का इस्तीफे के बाद पहला पत्र वायरल, बोले — एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने पर दूंगा क्रमवार जवाब

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने इस्तीफे के बाद पहली बार एक्स पर पत्र जारी कर चुप्पी तोड़ी। दानपात्र चोरी कांड में खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए उन्होंने एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने तक प्रतीक्षा का संकल्प जताया।

मुख्य बातें

चंपत राय ने 7 जुलाई 2026 को एक्स पर पत्र जारी कर इस्तीफे के बाद पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी।
7 जून 2026 को अयोध्या के राम मंदिर परिसर में दानपात्र गणना के दौरान कथित चोरी के मामले में उन पर आरोप लगे थे।
उन्होंने कहा कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद सभी बिंदुओं पर क्रमवार जवाब देंगे।
ट्रस्ट ने सोमवार को उनका इस्तीफा स्वीकार कर कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया।
चंपत राय का प्रचारक जीवन 45 वर्षों का है; उन्हें 1991 में संगठन द्वारा अयोध्या भेजा गया था।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद 7 जुलाई 2026 को पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके नाम से एक पत्र सामने आया, जिसमें उन्होंने रामभक्तों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का क्रमवार उत्तर देंगे। यह पत्र अयोध्या के राम मंदिर परिसर में 7 जून 2026 को दानपात्र गणना के दौरान हुई कथित चोरी की घटना की पृष्ठभूमि में आया है।

पत्र में क्या कहा चंपत राय ने

अपने पत्र में चंपत राय ने लिखा, '7 जून 2026 से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के दानपात्र की गणना के समय हुई चोरी के संबंध में अनेक प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। व्यक्तिगत रूप से मेरे ऊपर भी अनेक लोगों ने निराधार आरोप लगाए हैं। मैंने इस पूरे मामले पर मौन धारण कर लिया है।' उन्होंने आगे आश्वासन दिया, 'एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद फैलाए जा रहे सभी बिंदुओं पर क्रमवार अपना उत्तर दूंगा। तब पूरा सत्य सभी के सामने आ जाएगा।'

पत्र में गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस के अयोध्या कांड की चौपाई — 'धीरज धरम मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी' — भी साझा की गई, जो संकट में धैर्य रखने का संदेश देती है।

एसआईटी रिपोर्ट और ट्रस्ट बैठक का घटनाक्रम

चंपत राय के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट की जुलाई माह की सामान्य बैठक में एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जो अब सार्वजनिक भी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट मूलतः 'परम गोपनीय' थी। गौरतलब है कि इस्तीफे से पहले ट्रस्ट की उसी बैठक में यह रिपोर्ट सदस्यों के सामने रखी गई थी।

45 वर्षों के संगठनात्मक जीवन का उल्लेख

अपने पत्र में चंपत राय ने अपने संगठनात्मक इतिहास का भी ज़िक्र किया। उन्होंने लिखा, 'मुझे वर्ष 1991 के अक्टूबर माह में संगठन द्वारा अयोध्या भेजा गया था। मेरा प्रचारक जीवन 45 वर्षों का है। जहां-जहां मैं रहा, मेरा जीवन एक खुली पुस्तक की तरह रहा है।' पत्र का समापन उन्होंने 'सभी को आदरपूर्वक नमन' से किया।

इस्तीफा स्वीकृत, अंतरिम महासचिव नियुक्त

सोमवार, 7 जुलाई 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का महासचिव पद से इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। उनके स्थान पर कृष्ण मोहन को नए महासचिव की नियुक्ति होने तक अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह ऐसे समय में हुआ है जब मंदिर परिसर में दानपात्र चोरी की जांच अभी जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतज़ार है।

आगे क्या होगा

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चंपत राय के ऊपर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। ट्रस्ट में नए स्थायी महासचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आने वाले दिनों में तय होगी। चंपत राय का यह पत्र संकेत देता है कि वह सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखने के लिए जांच के निष्कर्षों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न ही कोई नया तथ्य सामने रखते हैं। एसआईटी रिपोर्ट तक चुप्पी का यह चुनाव उन्हें फिलहाल सुरक्षित रखता है, लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि क्या ट्रस्ट की आंतरिक जांच प्रक्रिया पारदर्शी रही। दानपात्र चोरी जैसी संवेदनशील घटना में 'परम गोपनीय' रिपोर्ट का सार्वजनिक होना और फिर महासचिव का इस्तीफा — यह क्रम संस्थागत प्रशासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। राम मंदिर जैसी राष्ट्रीय महत्व की संस्था में जवाबदेही का ढांचा कितना मजबूत है, यह एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट ही तय करेगी।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा क्यों दिया?
चंपत राय का इस्तीफा 7 जून 2026 को राम मंदिर परिसर के दानपात्र गणना के दौरान हुई कथित चोरी की घटना की पृष्ठभूमि में आया। इस मामले में उन पर व्यक्तिगत आरोप लगाए गए, जिन्हें उन्होंने निराधार बताया है।
चंपत राय के पत्र में क्या कहा गया है?
पत्र में चंपत राय ने कहा कि वह एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद सभी आरोपों का क्रमवार जवाब देंगे। उन्होंने अपने 45 वर्षों के प्रचारक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन 'एक खुली पुस्तक' की तरह रहा है।
राम मंदिर ट्रस्ट का नया महासचिव कौन है?
चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्थायी महासचिव की नियुक्ति बाद में होगी।
राम मंदिर दानपात्र चोरी मामले में एसआईटी की जांच कहां तक पहुंची है?
एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट ट्रस्ट की जुलाई बैठक में प्रस्तुत की जा चुकी है और वह सार्वजनिक भी हो चुकी है। अंतिम रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, जिसके बाद चंपत राय के अनुसार पूरा सत्य सामने आएगा।
चंपत राय कब से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े थे?
चंपत राय को अक्टूबर 1991 में संगठन द्वारा अयोध्या भेजा गया था। उनका कुल प्रचारक जीवन 45 वर्षों का है और वह श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से एक रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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