26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चंपत राय का इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी का फैसला : पूर्णिमा कोठारी, आरोपों को बताया साजिश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चंपत राय का इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी का फैसला : पूर्णिमा कोठारी, आरोपों को बताया साजिश

सारांश

चंपत राय के इस्तीफे को पूर्णिमा कोठारी ने 'नैतिक जिम्मेदारी' का साहसी कदम बताया। 1990 के अयोध्या गोलीबारी में शहीद कारसेवकों की बहन ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद को कथित साजिश करार दिया और कहा — दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्य बातें

चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने राम मंदिर चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों के बाद अपने पदों से इस्तीफा दिया।
पूर्णिमा कोठारी — 1990 अयोध्या गोलीबारी में शहीद कारसेवकों की बहन — ने इस्तीफे को 'नैतिक जिम्मेदारी' का फैसला बताया।
कोठारी ने चंपत राय को 15 वर्षों से जानने और उनके राम मंदिर के प्रति समर्पण की प्रशंसा की।
चढ़ावा विवाद को उन्होंने कथित साजिश करार दिया — जो मंदिर को बदनाम करने की कोशिश हो सकती है।
PM नरेंद्र मोदी और CM योगी आदित्यनाथ की मंदिर सुरक्षा पर निगरानी का उल्लेख; दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन।

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर 26 जून 2026 को कोलकाता से पूर्णिमा कोठारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। 1990 में अयोध्या गोलीबारी में शहीद हुए कारसेवकों राम कुमार कोठारी और शरद कोठारी की बहन पूर्णिमा ने कहा कि चंपत राय ने यह कदम अपनी 'नैतिक जिम्मेदारी' को समझते हुए उठाया है। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के प्रति चंपत राय के समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी के आरोपों को लेकर देशभर में विवाद छिड़ने के कुछ दिन बाद चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। यह विवाद मंदिर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है।

पूर्णिमा कोठारी की प्रतिक्रिया

पूर्णिमा कोठारी ने कहा, 'शायद उन्होंने (चंपत राय ने) अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर और नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए यह फैसला किया है, क्योंकि वह ट्रस्ट में बहुत अहम पद पर थे।' उन्होंने बताया कि वह चंपत राय को पिछले 15 वर्षों से जानती हैं और अयोध्या जाने पर उनसे नियमित रूप से मिलती रही हैं।

कोठारी ने चंपत राय के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा, 'उन्होंने अपना जीवन राम मंदिर के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने अदालती मामले को भी संभाला था। उन्होंने राम मंदिर के निर्माण में अहम भूमिका निभाई और उन लोगों का मुकाबला किया जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे।'

उन्होंने यह भी कहा, 'जब उस व्यक्ति पर आरोप लगाए जाते हैं जिसने एक संत की तरह जीवन जिया हो, तो मुझे दुख होता है। उनके लिए पैसा कोई मायने नहीं रखता।' पूर्णिमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चंपत राय पर इस तरह के आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।

हेराफेरी को बताया साजिश

चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों पर पूर्णिमा कोठारी ने दावा किया कि यह उन लोगों की कथित साजिश हो सकती है जो राम मंदिर का निर्माण नहीं देखना चाहते थे। उन्होंने कहा, 'जो लोग कभी राम मंदिर नहीं जाना चाहते और एक रुपया भी दान नहीं करना चाहते, ऐसे लोग जरूर किसी साजिश में शामिल होंगे ताकि राम मंदिर को बदनाम किया जा सके और लोगों की आस्था को कम किया जा सके।'

उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में हजारों श्रद्धालु और कर्मचारी आते-जाते हैं, ऐसे में हर व्यक्ति की जाँच करना संभव नहीं है। उनके अनुसार, 'टीका' और 'कलावा' पहनकर कोई भी मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकता है, जिससे निगरानी और कठिन हो जाती है।

ट्रस्ट पर भरोसा, दोषियों पर कार्रवाई की माँग

पूर्णिमा कोठारी ने ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मंदिर की सुरक्षा पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, 'जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।' यह मामला आने वाले दिनों में ट्रस्ट की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा के रूप में देखा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब आंतरिक जवाबदेही के सवालों से घिरी है। पूर्णिमा कोठारी का बयान भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन यह हेराफेरी के ठोस आरोपों का जवाब नहीं देता। विवाद को 'साजिश' बताना एक परिचित राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जो असली सवाल — ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और लेखा-परीक्षण तंत्र — को किनारे कर देती है। जब तक स्वतंत्र जाँच और सार्वजनिक ऑडिट नहीं होता, तब तक न तो आरोप सिद्ध होंगे, न निर्दोषता।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा क्यों दिया?
राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में हेराफेरी के आरोपों को लेकर देशव्यापी विवाद के बाद चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया। पूर्णिमा कोठारी के अनुसार, यह चंपत राय की 'नैतिक जिम्मेदारी' की भावना से उठाया गया कदम था।
पूर्णिमा कोठारी कौन हैं और उनका बयान क्यों अहम है?
पूर्णिमा कोठारी, 1990 में अयोध्या गोलीबारी में शहीद हुए कारसेवकों राम कुमार कोठारी और शरद कोठारी की बहन हैं। राम मंदिर आंदोलन से उनके परिवार का गहरा जुड़ाव होने के कारण उनका बयान भावनात्मक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले चढ़ावे की राशि में हेराफेरी के आरोप सामने आए, जिससे देशभर में विवाद खड़ा हो गया। इसी विवाद के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया।
पूर्णिमा कोठारी ने हेराफेरी के आरोपों पर क्या कहा?
कोठारी ने इसे कथित तौर पर उन लोगों की साजिश बताया जो राम मंदिर को बदनाम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर में हजारों श्रद्धालु और कर्मचारी आते हैं, इसलिए हर व्यक्ति की जाँच संभव नहीं है।
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
पूर्णिमा कोठारी ने कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मंदिर की सुरक्षा पर नजर रखे हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 18 मिनट पहले
  2. 25 मिनट पहले
  3. 4 घंटे पहले
  4. 4 घंटे पहले
  5. 9 घंटे पहले
  6. 3 दिन पहले
  7. 6 दिन पहले
  8. 2 सप्ताह पहले