राम मंदिर ट्रस्ट विवाद: चंपत राय के इस्तीफे पर संत समाज बंटा, निष्पक्ष जांच की उठी माँग
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हालिया संगठनात्मक फेरबदल और कथित चढ़ावा अनियमितताओं को लेकर अयोध्या का संत समाज 7 जुलाई 2025 को स्पष्ट रूप से दो खेमों में विभाजित नज़र आया। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद एक वर्ग ने उनके दशकों के योगदान का हवाला देते हुए समर्थन जताया, तो दूसरे वर्ग ने फैसले का स्वागत करते हुए पारदर्शी जांच और जवाबदेही की माँग की।
समर्थन में संतों की आवाज़
बद्रीनाथ के ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु स्वामी ओंकारानंद ने कहा, 'मैं यह जानना चाहता हूँ कि आखिर चंपत राय से इस्तीफा क्यों लिया गया। यदि मंदिर के खजाने से चोरी या अनियमितता हुई है, तो उसकी जवाबदेही संबंधित व्यवस्था संभालने वाले लोगों की भी बनती है।' उन्होंने कहा कि चंपत राय ने दशकों तक राम जन्मभूमि आंदोलन और कारसेवकों की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया है, और यदि उनकी कोई गलती रही भी है तो वह केवल किसी पर विश्वास करना था।
स्वामी ओंकारानंद ने यह भी कहा कि वे चंपत राय को वर्ष 1987 से जानते हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन के शुरुआती दौर से उन्हें पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते देखा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नई जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों के अनुभव और आंदोलन से जुड़ाव की तुलना चंपत राय से की जानी चाहिए।
जांच और जवाबदेही की माँग
महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने भिन्न दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि कई रामभक्तों के मन में शंकाएं थीं और वे चाहते थे कि चंपत राय और अनिल मिश्रा अपने पद छोड़ें। उन्होंने कहा, 'अब दोनों के इस्तीफे के बाद अनेक श्रद्धालु संतुष्ट हैं। हालांकि किसी व्यक्ति पर एक बार आरोप लग जाने के बाद उसकी छवि पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।'
आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा कि चंपत राय के पत्र से उनके मन का दर्द सामने आया है। उनके अनुसार, ट्रस्ट की प्रेस वार्ता सुनने के बाद ऐसा प्रतीत हुआ कि चंपत राय को 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'यदि शुरुआत से ही पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जाती तो लोगों के मन में कम सवाल उठते।'
ट्रस्ट के फैसले का समर्थन
तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने ट्रस्ट के निर्णय का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'ट्रस्ट ने जो भी फैसला लिया है, वह स्वीकार्य है। भविष्य में भी ट्रस्ट जो निर्णय करेगा, संत समाज उसके साथ खड़ा रहेगा।'
सच्चाई सामने आए — महंत धर्म दास
रामलला विराजमान मामले के पूर्व वादी और हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत धर्म दास ने कहा कि इस मामले को पक्ष और विपक्ष के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, 'यदि किसी प्रकार की अनियमितता या चोरी के आरोप लगे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं और मामले की जांच अभी जारी बताई जा रही है।