कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'प्रगति' पहल लॉन्च की, 20,000 कृषि उद्यमी और 20 लाख किसान होंगे लाभान्वित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में 'प्रगति' पहल का औपचारिक शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य 20,000 नए कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाना और 20 लाख किसानों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करना है। यह पहल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF) और गेट्स फाउंडेशन जैसे संस्थानों के सहयोग से तैयार की गई है और इसे देश के 8 प्रमुख कृषि-प्रधान राज्यों में लागू किया जाएगा।
पहल का उद्देश्य और दृष्टिकोण
शुभारंभ के अवसर पर चौहान ने कहा कि विकसित कृषि क्षेत्र और समृद्ध गाँवों के बिना 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है — इसमें खेती की लागत घटाना, किसानों की आय में वृद्धि, फसल विविधीकरण और कृषि को अधिक लाभदायक व्यवसाय बनाना भी शामिल है।
मंत्री ने विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि उनके लिए केवल पारंपरिक खेती पर्याप्त नहीं रह गई है। इसलिए मूल्यवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना अनिवार्य है।
प्रगति कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ
'प्रगति' कार्यक्रम किसानों को प्रौद्योगिकी, कृषि मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर बाज़ार पहुँच से जोड़कर उनकी आय के नए रास्ते तैयार करने पर केंद्रित है। यह एक व्यापक, समावेशी और जलवायु-लचीली पुनर्योजी कृषि पहल है, जो पहले से मौजूद 26,000 से अधिक कृषि उद्यमियों के नेटवर्क के अतिरिक्त 20,000 नए उद्यमियों का राष्ट्रव्यापी पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा करेगी।
गौरतलब है कि यह कार्यक्रम भारत के कई राज्यों में पहले लागू की गई कृषि-उद्यमिता पहलों से अर्जित अनुभव पर आधारित है, जिससे इसकी ज़मीनी व्यावहारिकता अपेक्षाकृत अधिक मानी जा रही है।
सहयोगी संस्थाओं की भूमिका
इस पहल का समर्थन करने वाली संस्था की वरिष्ठ उपाध्यक्ष (वैश्विक सामाजिक प्रभाव) मोनिका बाउर ने कहा कि किसान स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को गति देने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं और उनकी आजीविका का समर्थन करना एक सुदृढ़ खाद्य प्रणाली की नींव है। उनके सहयोगी जागृत कोटेचा ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को अधिक टिकाऊ कृषि के लिए ज़रूरी उपकरण और ज्ञान उपलब्ध कराना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य प्रणालियों को मज़बूत बनाना है।
लागू होने वाले राज्य
अधिकारियों के अनुसार, 'प्रगति' पहल मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान में लागू की जाएगी — ये सभी राज्य देश के कृषि उत्पादन और ग्रामीण रोज़गार के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण कृषि आय और शहरी आय के बीच की खाई को पाटना नीति-निर्माताओं की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।
आगे की राह
समावेशी भागीदारी और संतुलित प्रतिनिधित्व पर विशेष बल देते हुए 'प्रगति' यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि महिला किसान और हाशिये पर खड़े समुदाय भी इस पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा बनें। कार्यक्रम के क्रियान्वयन की प्रगति और इसके वास्तविक प्रभाव पर नज़र रखना अब नीति-विश्लेषकों और किसान संगठनों दोनों के लिए अगली बड़ी कसौटी होगी।