इंदौर में 9-13 जून तक ब्रिक्स कृषि मंत्रियों का महाकुंभ, शिवराज सिंह चौहान बोले — लघु किसान रहेंगे केंद्र में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 जून को घोषणा की कि मध्य प्रदेश का इंदौर शहर 9 से 13 जून तक वैश्विक कृषि कूटनीति का केंद्र बनेगा, जहाँ ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि कार्य समूह और सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की पाँच दिवसीय बैठक आयोजित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस आयोजन का मुख्य फोकस लघु और सीमांत किसानों के सशक्तिकरण पर रहेगा।
आयोजन की रूपरेखा और महत्व
चौहान ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह बैठक खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि, कृषि नवाचार और छोटे किसानों के उत्थान जैसे वैश्विक मुद्दों पर ठोस दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश विश्व के विकासशील देशों की एक प्रभावशाली सामूहिक आवाज़ हैं।
आँकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि है और वैश्विक कृषि उत्पादन में भी इनकी हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से अधिक है। विश्व के करीब 58 करोड़ किसानों में से लगभग 70 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान ब्रिक्स देशों में निवास करते हैं।
लघु किसानों की चुनौतियाँ और प्राथमिकताएँ
मंत्री चौहान ने रेखांकित किया कि छोटे किसानों के सामने जोत का सीमित आकार, संसाधनों की कमी और बाज़ार तक पहुँच जैसी बाधाएँ हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए बैठक में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाने, कृषि अनुसंधान के लाभों को किसानों तक पहुँचाने, कृषि ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और बाज़ार कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की दृष्टि में कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है — इसका दायरा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि, रोज़गार सृजन और सतत विकास तक विस्तृत है।
महिलाओं और युवाओं की भूमिका
बैठक में कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भूमिका को भी प्राथमिकता दी गई है। चौहान ने कहा कि कृषि कार्यबल में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जबकि युवा नई तकनीकों और नवाचार को तेज़ी से अपनाने में सक्षम हैं। 12 जून को 'महिलाओं और युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा' विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।
जलवायु परिवर्तन और खाद्य अपव्यय पर चर्चा
केंद्रीय मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को कृषि के लिए गंभीर चुनौती बताया। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा और अत्यधिक वर्षा जैसी परिस्थितियाँ किसानों को सीधे प्रभावित कर रही हैं। इस संदर्भ में रीजनरेटिव फार्मिंग, क्लाइमेट रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।
खाद्य अपव्यय की समस्या पर भी चर्चा होगी। चौहान ने बताया कि हर वर्ष लगभग एक अरब टन खाद्यान्न बर्बाद होता है, जो संसाधनों की हानि के साथ-साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का भी एक प्रमुख कारण है। भंडारण, परिवहन और सप्लाई चेन में सुधार के उपायों पर विचार-विमर्श होगा।
ब्रिक्स कृषि कार्य समूह की चार प्राथमिकताएँ
चौहान के अनुसार, ब्रिक्स कृषि कार्य समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं — खाद्य सुरक्षा और पोषण, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि, तथा नवाचार और अनुसंधान साझेदारी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब बढ़ती वैश्विक आबादी और बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच सुरक्षित व पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और बाज़ार पहुँच को बढ़ाना इस दिशा में अनिवार्य कदम माना जा रहा है।