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इंदौर में 9-13 जून तक ब्रिक्स कृषि मंत्रियों का महाकुंभ, शिवराज सिंह चौहान बोले — लघु किसान रहेंगे केंद्र में

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इंदौर में 9-13 जून तक ब्रिक्स कृषि मंत्रियों का महाकुंभ, शिवराज सिंह चौहान बोले — लघु किसान रहेंगे केंद्र में

सारांश

इंदौर में 9 से 13 जून तक ब्रिक्स देशों की पाँच दिवसीय कृषि बैठक — जहाँ दुनिया की 42% कृषि भूमि और 70% लघु किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले देश एकजुट होंगे। शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, यह महज एक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा की दिशा तय करने का मंच है।

मुख्य बातें

इंदौर में 9 से 13 जून तक ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों और कृषि कार्य समूह की पाँच दिवसीय बैठक आयोजित होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि बैठक का मुख्य फोकस लघु और सीमांत किसानों का सशक्तिकरण होगा।
ब्रिक्स देशों के पास विश्व की 42% कृषि भूमि है और वैश्विक कृषि उत्पादन में भी इनकी हिस्सेदारी 42% से अधिक है।
विश्व के 58 करोड़ किसानों में से लगभग 70% छोटे व सीमांत किसान ब्रिक्स देशों में हैं।
12 जून को महिलाओं और युवाओं की कृषि में भूमिका पर विशेष सत्र होगा।
हर वर्ष लगभग एक अरब टन खाद्यान्न बर्बाद होने की समस्या पर सप्लाई चेन सुधार के उपायों पर चर्चा होगी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 जून को घोषणा की कि मध्य प्रदेश का इंदौर शहर 9 से 13 जून तक वैश्विक कृषि कूटनीति का केंद्र बनेगा, जहाँ ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि कार्य समूह और सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों की पाँच दिवसीय बैठक आयोजित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस आयोजन का मुख्य फोकस लघु और सीमांत किसानों के सशक्तिकरण पर रहेगा।

आयोजन की रूपरेखा और महत्व

चौहान ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह बैठक खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि, कृषि नवाचार और छोटे किसानों के उत्थान जैसे वैश्विक मुद्दों पर ठोस दिशा तय करेगी। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश विश्व के विकासशील देशों की एक प्रभावशाली सामूहिक आवाज़ हैं।

आँकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि है और वैश्विक कृषि उत्पादन में भी इनकी हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से अधिक है। विश्व के करीब 58 करोड़ किसानों में से लगभग 70 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान ब्रिक्स देशों में निवास करते हैं।

लघु किसानों की चुनौतियाँ और प्राथमिकताएँ

मंत्री चौहान ने रेखांकित किया कि छोटे किसानों के सामने जोत का सीमित आकार, संसाधनों की कमी और बाज़ार तक पहुँच जैसी बाधाएँ हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए बैठक में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाने, कृषि अनुसंधान के लाभों को किसानों तक पहुँचाने, कृषि ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और बाज़ार कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की दृष्टि में कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है — इसका दायरा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि, रोज़गार सृजन और सतत विकास तक विस्तृत है।

महिलाओं और युवाओं की भूमिका

बैठक में कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भूमिका को भी प्राथमिकता दी गई है। चौहान ने कहा कि कृषि कार्यबल में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जबकि युवा नई तकनीकों और नवाचार को तेज़ी से अपनाने में सक्षम हैं। 12 जून को 'महिलाओं और युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा' विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन और खाद्य अपव्यय पर चर्चा

केंद्रीय मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को कृषि के लिए गंभीर चुनौती बताया। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा और अत्यधिक वर्षा जैसी परिस्थितियाँ किसानों को सीधे प्रभावित कर रही हैं। इस संदर्भ में रीजनरेटिव फार्मिंग, क्लाइमेट रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।

खाद्य अपव्यय की समस्या पर भी चर्चा होगी। चौहान ने बताया कि हर वर्ष लगभग एक अरब टन खाद्यान्न बर्बाद होता है, जो संसाधनों की हानि के साथ-साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का भी एक प्रमुख कारण है। भंडारण, परिवहन और सप्लाई चेन में सुधार के उपायों पर विचार-विमर्श होगा।

ब्रिक्स कृषि कार्य समूह की चार प्राथमिकताएँ

चौहान के अनुसार, ब्रिक्स कृषि कार्य समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं — खाद्य सुरक्षा और पोषण, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूल और सतत कृषि, तथा नवाचार और अनुसंधान साझेदारी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब बढ़ती वैश्विक आबादी और बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच सुरक्षित व पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और बाज़ार पहुँच को बढ़ाना इस दिशा में अनिवार्य कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर क्रियान्वयन की निगरानी का ढाँचा लगातार कमज़ोर रहा है। जब तक इस बैठक से बाध्यकारी प्रतिबद्धताएँ और सत्यापन-योग्य लक्ष्य नहीं निकलते, यह आयोजन एक और उच्च-स्तरीय संवाद बनकर रह जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर में ब्रिक्स कृषि बैठक कब और क्यों हो रही है?
यह बैठक 9 से 13 जून 2025 तक इंदौर में आयोजित हो रही है, जिसमें ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्री और कृषि कार्य समूह के प्रतिनिधि भाग लेंगे। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस आयोजन का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और लघु किसानों के सशक्तिकरण पर सामूहिक दिशा तय करना है।
ब्रिक्स देशों की कृषि में वैश्विक हिस्सेदारी कितनी है?
ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि है और वैश्विक कृषि उत्पादन में भी इनकी हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा, विश्व के करीब 58 करोड़ किसानों में से लगभग 70 प्रतिशत लघु और सीमांत किसान इन्हीं देशों में रहते हैं।
बैठक में लघु किसानों के लिए क्या एजेंडा है?
शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, बैठक में उत्पादन लागत घटाने, कृषि ऋण की उपलब्धता बढ़ाने, अनुसंधान के लाभ किसानों तक पहुँचाने और बाज़ार कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा। छोटी जोत, सीमित संसाधन और बाज़ार पहुँच की कमी को मुख्य चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया गया है।
12 जून के विशेष सत्र में क्या होगा?
12 जून को 'महिलाओं और युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा' विषय पर एक समर्पित सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें कृषि कार्यबल में महिलाओं के योगदान और युवाओं द्वारा नई तकनीकों को अपनाने की क्षमता पर चर्चा होगी।
जलवायु परिवर्तन और खाद्य अपव्यय पर बैठक में क्या चर्चा होगी?
बैठक में रीजनरेटिव फार्मिंग और क्लाइमेट रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर पर विचार-विमर्श होगा। साथ ही, हर वर्ष बर्बाद होने वाले लगभग एक अरब टन खाद्यान्न की समस्या से निपटने के लिए भंडारण, परिवहन और सप्लाई चेन सुधार के उपायों पर भी चर्चा होगी।
राष्ट्र प्रेस
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