1 अगस्त 2026
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इंदौर डिक्लेरेशन: ब्रिक्स का वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणा पत्र, शिवराज सिंह चौहान ने बताई 4 प्राथमिकताएँ

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इंदौर डिक्लेरेशन: ब्रिक्स का वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणा पत्र, शिवराज सिंह चौहान ने बताई 4 प्राथमिकताएँ

सारांश

इंदौर में 5 दिनों की ब्रिक्स कृषि बैठक का समापन 'इंदौर डिक्लेरेशन' से हुआ — एक सर्वसम्मत घोषणा पत्र जो किसान को केंद्र में रखकर खाद्य सुरक्षा, जलवायु-सहिष्णु खेती और सतत कृषि विकास की साझा प्रतिबद्धता दर्ज करता है। ब्रिक्स देश वैश्विक कृषि भूमि और खाद्यान्न उत्पादन में 42-42 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं।

मुख्य बातें

इंदौर में 13 जून 2026 को ब्रिक्स कृषि बैठक के समापन पर सर्वसम्मति से 'इंदौर डिक्लेरेशन' पारित हुआ।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणा पत्र बताया।
बैठक में सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 100 प्रतिनिधि , जिनमें 60 विदेशी प्रतिनिधि शामिल थे।
ब्रिक्स देशों के पास वैश्विक कृषि भूमि का 42% और खाद्यान्न उत्पादन में 42% योगदान; दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व।
डिक्लेरेशन में खाद्य सुरक्षा, पोषण, क्लाइमेट रेजिलिएंट खेती और किसान-केंद्रित विकास की 4 प्रमुख प्राथमिकताएँ दर्ज।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 13 जून 2026 को इंदौर में घोषणा की कि ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्री स्तरीय बैठक के समापन पर सर्वसम्मति से पारित 'इंदौर डिक्लेरेशन' वैश्विक कृषि सहयोग का नया घोषणा पत्र है। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में 5 दिनों तक चली इस बैठक में सदस्य और सहयोगी देशों के लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें 60 विदेशी प्रतिनिधि शामिल थे।

इंदौर डिक्लेरेशन क्या है

ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्री स्तरीय और अधिकारी स्तरीय बैठकों के व्यापक विचार-विमर्श के बाद जो संयुक्त घोषणा पत्र तैयार हुआ, उसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इंदौर में अपनाए जाने के कारण इसे 'इंदौर डिक्लेरेशन' का नाम दिया गया है। शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह दस्तावेज केवल सहमति का कागज नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति और साझा उत्तरदायित्व का प्रतीक है।

चार प्रमुख प्राथमिकताएँ

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर गहन विमर्श हुआ — खाद्य सुरक्षा (फूड सिक्योरिटी), पौष्टिक आहार, कृषि व्यापार और सतत कृषि विकास। डिक्लेरेशन में किसान को केंद्र में रखकर खाद्य सुरक्षा, पोषण, आजीविका, नवाचार, निवेश, क्लाइमेट रेजिलिएंट खेती और सतत कृषि विकास को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता दर्ज की गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाएँ भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु परिवर्तन के दोहरे दबाव में हैं। गौरतलब है कि ब्रिक्स देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ब्रिक्स की कृषि में वैश्विक भूमिका

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ब्रिक्स देशों के पास वैश्विक कृषि भूमि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व के खाद्यान्न उत्पादन में भी लगभग 42 प्रतिशत योगदान इन्हीं देशों का है। इसीलिए उनकी सामूहिक आवाज वैश्विक मंच पर एक प्रभावी शक्ति के रूप में उभरी है। वैश्विक संकट और अनिश्चितताओं के बीच यह बैठक पूरी दुनिया के लिए आशा, विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त संदेश लेकर आई है।

सरकार की प्रतिबद्धता

केंद्रीय मंत्री ने अपने सहयोगी मंत्रियों रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी की उपस्थिति में कहा कि सदस्य देशों ने तय किया है कि इंदौर डिक्लेरेशन में दर्ज सभी पहलों को ज़मीन पर उतारने के लिए मिलकर, सामूहिक और सतत प्रयास किए जाएंगे। इसका उद्देश्य है कि इसके लाभ वास्तविक रूप से किसानों, ग्रामीण समुदायों और खाद्य प्रणालियों तक पहुँच सकें।

आगे की राह

इंदौर डिक्लेरेशन के क्रियान्वयन की दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच समन्वय की प्रक्रिया अब शुरू होगी। कृषि क्षेत्र में यह सहयोग भारत की अध्यक्षता में एक नई मिसाल कायम कर सकता है, बशर्ते घोषणाएँ नीतिगत ढाँचे में तब्दील हों और किसानों तक इसका ठोस लाभ पहुँचे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — ब्रिक्स के पिछले संयुक्त घोषणा पत्र अक्सर नीतिगत ढाँचे में तब्दील होने से पहले ही ठंडे बस्ते में चले गए। 42 प्रतिशत वैश्विक कृषि भूमि और खाद्यान्न उत्पादन की सामूहिक ताकत को देखते हुए यह गठबंधन सैद्धांतिक रूप से शक्तिशाली है, लेकिन सदस्य देशों के बीच व्यापारिक हित और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धाएँ इसकी एकजुटता को परखेंगी। किसान-केंद्रित भाषा स्वागत योग्य है, परंतु बिना सत्यापन-योग्य लक्ष्यों और समयसीमाओं के यह घोषणा पत्र एक और कूटनीतिक दस्तावेज बनकर रह सकता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर डिक्लेरेशन क्या है?
इंदौर डिक्लेरेशन ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्री स्तरीय बैठक में 13 जून 2026 को सर्वसम्मति से पारित संयुक्त घोषणा पत्र है। इसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण, क्लाइमेट रेजिलिएंट खेती और किसान-केंद्रित सतत कृषि विकास की साझा प्रतिबद्धता दर्ज की गई है।
ब्रिक्स कृषि बैठक इंदौर में क्यों आयोजित हुई?
इंदौर को इस बैठक के लिए चुना गया और वहाँ 5 दिनों तक मंत्री स्तरीय तथा अधिकारी स्तरीय दोनों बैठकें आयोजित हुईं। घोषणा पत्र इंदौर में अपनाए जाने के कारण ही इसे 'इंदौर डिक्लेरेशन' नाम दिया गया।
ब्रिक्स देशों का वैश्विक कृषि में कितना योगदान है?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, ब्रिक्स देशों के पास वैश्विक कृषि भूमि का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा है और विश्व के खाद्यान्न उत्पादन में भी लगभग 42 प्रतिशत योगदान इन्हीं देशों का है। साथ ही ये देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इंदौर डिक्लेरेशन में किन प्राथमिकताओं पर ज़ोर दिया गया है?
डिक्लेरेशन में चार प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं — खाद्य सुरक्षा, पौष्टिक आहार, कृषि व्यापार और सतत कृषि विकास। इसके अलावा किसान को केंद्र में रखकर आजीविका, नवाचार, निवेश और क्लाइमेट रेजिलिएंट खेती की साझा प्रतिबद्धता भी इसमें शामिल है।
इंदौर डिक्लेरेशन का किसानों पर क्या असर होगा?
सदस्य देशों ने तय किया है कि डिक्लेरेशन में दर्ज सभी पहलों को ज़मीन पर उतारने के लिए सामूहिक और सतत प्रयास किए जाएंगे। इसका उद्देश्य है कि इसके लाभ वास्तविक रूप से किसानों, ग्रामीण समुदायों और खाद्य प्रणालियों तक पहुँचें।
राष्ट्र प्रेस
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