पूर्वी भारत कृषि विकास का ग्रोथ इंजन बन सकता है: शिवराज सिंह चौहान का भुवनेश्वर में ऐलान

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पूर्वी भारत कृषि विकास का ग्रोथ इंजन बन सकता है: शिवराज सिंह चौहान का भुवनेश्वर में ऐलान

सारांश

भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्वी भारत को देश का कृषि ग्रोथ इंजन बताया। 1 जून से 'खेत बचाओ अभियान' की घोषणा, नकली कृषि सामग्री पर कड़ी कार्रवाई और एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा देने का आह्वान — पाँच राज्यों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में।

मुख्य बातें

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 मई 2026 को भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित किया।
सम्मेलन में ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि शामिल हुए।
1 जून से देशव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' शुरू किया जाएगा, जिसमें मिट्टी स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर होगा।
चौहान ने नकली खाद, घटिया बीज और फर्जी कीटनाशकों को किसानों के खिलाफ गंभीर अपराध बताते हुए बड़े अभियान की चेतावनी दी।
पूर्वी भारत को दलहन और तिलहन उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम बताया गया।
बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन और कृषि वानिकी को फसल उत्पादन से जोड़कर छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर बल दिया गया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 मई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में कहा कि पूर्वी भारत अपनी उपजाऊ भूमि, प्रचुर जल संसाधनों, विविध जलवायु और परिश्रमी किसानों के बल पर देश के कृषि विकास का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सटीक नीतिगत समर्थन और प्रभावी हस्तक्षेप से इस क्षेत्र की अपार कृषि संभावनाओं को वास्तविकता में बदला जा सकता है।

सम्मेलन का आयोजन और भागीदारी

इस सम्मेलन का उद्घाटन कृषि मंत्री चौहान ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ संयुक्त रूप से किया। सम्मेलन में ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कृषि प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने, छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए एकीकृत कृषि मॉडल तथा प्राकृतिक खेती जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

कृषि की तीन प्रमुख प्राथमिकताएँ

चौहान ने किसानों को केवल 'अन्नदाता' नहीं, बल्कि 'जीवनदाता' बताया और कहा कि किसानों की सेवा करना ईश्वर की सेवा के समान है। उन्होंने कृषि क्षेत्र की तीन मुख्य प्राथमिकताएँ गिनाईं — 140 करोड़ भारतीयों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पौष्टिक भोजन की उपलब्धता और किसानों की आय व आजीविका में वृद्धि। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत घटाना, लाभकारी मूल्य दिलाना और कृषि का विविधीकरण आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

एकीकृत कृषि और आय वृद्धि

कृषि मंत्री ने कहा कि फसल उत्पादन के साथ-साथ बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी को जोड़कर छोटे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्य कृषि मंत्रियों और अधिकारियों से अपील की कि एकीकृत कृषि मॉडल को किसानों के बीच प्रेरणादायक और व्यावहारिक तरीके से प्रदर्शित किया जाए। चौहान ने पूर्वी भारत में आम जैसे उच्च मूल्य वाले फलों, निर्यात क्षमता और बाज़ार-आधारित खेती के महत्व पर भी विशेष जोर दिया।

मिट्टी स्वास्थ्य और 'खेत बचाओ अभियान'

सतत कृषि पर बल देते हुए चौहान ने चेतावनी दी कि बिना मिट्टी परीक्षण के उर्वरकों का अंधाधुंध इस्तेमाल न केवल खेती की लागत बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुँचाता है। उन्होंने राज्यों से वैज्ञानिक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहन देने की अपील की। किसानों से उन्होंने अपनी जमीन के कम से कम एक हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह भी किया।

चौहान ने घोषणा की कि 1 जून से देशव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' शुरू किया जाएगा, जिसमें संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी स्वास्थ्य, आधुनिक तकनीक और किसान शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

नकली कृषि सामग्री पर कड़ी कार्रवाई

केंद्रीय मंत्री ने नकली खाद, घटिया बीज और फर्जी कीटनाशकों को किसानों के विरुद्ध गंभीर अपराध करार देते हुए कहा कि इनके खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने राज्यों से सख्त कानून और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उचित लागत पर मिल सके। सब्सिडी वाले उर्वरकों के दुरुपयोग को रोकने और उन्हें केवल कृषि कार्यों में उपयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।

यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब केंद्र सरकार दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में नीतिगत प्रयास तेज कर रही है। आगामी खरीफ सीजन से पहले पूर्वी राज्यों के साथ इस स्तर का समन्वय कृषि रणनीति में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन अब भी अपेक्षाओं से पीछे है। 'खेत बचाओ अभियान' की घोषणा सकारात्मक है, पर असली सवाल यह है कि क्या यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित रहेगा या इसमें मिट्टी परीक्षण की बाध्यता और उर्वरक सब्सिडी से जुड़ा सत्यापन तंत्र भी होगा। नकली कृषि सामग्री पर 'बड़े अभियान' की बात वर्षों से होती रही है, लेकिन राज्य स्तर पर कानूनी ढाँचा अब भी कमज़ोर है — बिना राज्यों की सक्रिय भागीदारी के केंद्र की यह मंशा कागज़ पर ही रह सकती है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 क्या है और इसमें कौन शामिल हुआ?
यह 19 मई 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित केंद्र सरकार का कृषि नीति सम्मेलन है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने किया। ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कृषि प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया।
'खेत बचाओ अभियान' क्या है और यह कब शुरू होगा?
यह केंद्र सरकार का देशव्यापी अभियान है जो 1 जून 2026 से शुरू होगा। इसमें संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी स्वास्थ्य, आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं की जानकारी और किसान शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान ने नकली कृषि सामग्री पर क्या कहा?
कृषि मंत्री चौहान ने नकली खाद, घटिया बीज और फर्जी कीटनाशकों को किसानों के खिलाफ गंभीर अपराध बताया और कहा कि इनके विरुद्ध बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने राज्यों से सख्त कानून और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
पूर्वी भारत में दलहन और तिलहन उत्पादन की क्या संभावनाएँ हैं?
चौहान के अनुसार पूर्वी भारत में देश को दलहन और तिलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की अपार क्षमता है। इस क्षेत्र की उपजाऊ भूमि और प्रचुर जल संसाधन इसे इन फसलों के विस्तार के लिए उपयुक्त बनाते हैं।
एकीकृत कृषि मॉडल से छोटे किसानों को कैसे फायदा होगा?
कृषि मंत्री के अनुसार फसल उत्पादन के साथ बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी को जोड़कर छोटे और सीमांत किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। ICAR और कृषि विज्ञान केंद्रों से इस मॉडल को व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित करने की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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